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शिवसेना ने कहा- कमलनाथ इतनी जल्दी हार मानने वाले नहीं, BJP महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक ड्रामे के लिए तैयार रहे

शिवसेना ने सिंधिया के BJP में शामिल होने पर सहयोगी कांग्रेस की आलोचना की, कहा- भाजपा दिन में सपने देखना छोड़ दे।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र मुंबई | Updated: March 12, 2020 3:16 PM
Uddhav Thackerayशिवसेना अध्यक्ष और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, साथ में उनके बेटे आदित्य ठाकरे।

शिवसेना ने महाराष्ट्र सरकार में अपनी सहयोगी कांग्रेस पर निशाना साधा है। पार्टी के मुखपत्र सामना में गुरुवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने पर तंज कसा गया। शिवसेना ने युवा नेताओं की आकांक्षाओं को नजरअंदाज करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की है। साथ ही कहा है कि मध्य प्रदेश की राजनीति में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को ऊपर रखना जरूरी था, लेकिन सिंधिया जैसे एक अच्छे नेता को पूरी तरह किनारे करना बिल्कुल भी ठीक नहीं था।

सामना के संपादकीय में कांग्रेस पर हमले के बावजूद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की तारीफ की गई है। इसमें कहा गया है कि कमलनाथ एक बहादुर नेता हैं और इतनी जल्दी हार नहीं मानेंगे। जिस तरह महाराष्ट्र में अप्रत्याशित राजनीतिक ड्रामा हुआ, उसी तरह का प्रयोग आने वाले समय में मध्य प्रदेश में भी दिखाई दे सकता है।

शिवसेना ने लेख के जरिए एनडीए में सहयोगी रही भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा है। कहा गया है कि महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार मजबूत और अभेद्य है। इसमें किसी खतरनाक चीटी के भी आने-जाने की जगह नहीं है। इसलिए भाजपा को दिन में सपने देखना बंद कर देना चाहिए।

‘जब वरिष्ठ नेता फेल हों, तब युवाओं को मौका मिलना चाहिए’: पार्टी ने सामना में कांग्रेस के नेता कमलनाथ और अशोक गहलोत पर तंज कसते हुए कहा- “जब वरिष्ठ नेता नाकाम हो जाएं, तब युवाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। यह नहीं हो रहा और इसीलिए राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और मुख्यमंत्री गहलोत में टकराव रहता है। अगर मामला नहीं सुलझता, तो हो सकता है राजस्थान भी मध्य प्रदेश के ही रास्ते पर चल पड़े।”

‘सिंधिया की मांगें मान ली जातीं, तो ऐसी स्थिति न होती’: लेख में कहा गया कि महज 8 महीने पहले ही कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार गिरने के बाद सिंधिया ने भाजपा को लोकतंत्र का हत्यारा करार दिया था। 15 दिन पहले भी उन्होंने नफरत भरे भाषण देने के लिए भाजपा नेताओं पर निशाना साधा था। लेकिन भाजपा जॉइन करने के बाद उन्होंने कहा कि कांग्रेस वो पार्टी नहीं रह गई, जो वो पहले हुआ करती थी। आखिर सिंधिया की मांग ही क्या थीं? मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष पद या राज्यसभा टिकट। उन्हें दोनों ही नहीं मिले। अगर उनकी एक भी मांग मान ली जाती, तो ऐसी स्थिति न पैदा होती।

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