कांग्रेस हाईकमान ने आखिरकार भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभारी के पद से हटा दिया। बघेल की जगह राजस्थान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और युवा चेहरे सचिन पायलट को प्रभारी बनाया गया है। कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले के बाद दो बड़े सवाल खड़े होते हैं।
पहला यह कि क्या भूपेश बघेल के बाद पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की भी छुट्टी होगी? दूसरा सवाल यह कि क्या हाईकमान के इस ताजा फैसले से पंजाब कांग्रेस में चल रही लड़ाई खत्म हो पाएगी?
पंजाब कांग्रेस में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक पिछले कई दिनों से आमने-सामने हैं। चन्नी और उनके समर्थकों ने तब बगावती तेवर दिखाए थे, जब कांग्रेस हाईकमान ने वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बनाए रखने का फैसला लिया था।
लगाए थे ‘गो बैक बघेल’ के पोस्टर
भूपेश बघेल राज्य के प्रभारी रहते हुए जब पंजाब के 8 दिन के दौरे पर आए थे तो चन्नी समर्थकों ने कई जगहों पर वड़िंग के साथ ही भूपेश बघेल का भी पुरजोर विरोध किया था। चन्नी समर्थकों का कहना था कि भूपेश बघेल ने पार्टी कार्यकर्ताओं की बात को शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंचाया। हालात यह थे कि चन्नी गुट ने पंजाब में कई जगहों पर- ‘गो बैक बघेल’ के पोस्टर लगा दिए थे।
चन्नी-वड़िंग की लड़ाई इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को इसमें दखल देना पड़ा और आखिरकार भूपेश बघेल की प्रभारी के पद से छुट्टी हो गई।
चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी ने कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया था। संगठन के लिहाज से यह भी अहम ओहदा है लेकिन चन्नी के समर्थकों का कहना है कि उनके नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।
क्या चाहते हैं चन्नी समर्थक?
जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों को ऐसी उम्मीद है कि पार्टी अब राजा वड़िंग के खिलाफ भी एक्शन लेगी। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा चल रही है कि हाईकमान प्रदेश संगठन में बदलाव करेगा लेकिन क्या कांग्रेस नेतृत्व के लिए ऐसा करना आसान होगा?
इस बात को समझना जरूरी है कि पंजाब में छह महीने के भीतर चुनाव हो जाएंगे। इतने कम वक्त में नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में चुनाव मैदान में जाना खतरे से खाली नहीं होगा और कांग्रेस भी इस बात को समझती है। वड़िंग मार्च, 2022 से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, वह पंजाब सरकार में मंत्री रहे हैं और प्रदेश अध्यक्ष के पद पर रहते हुए उन्होंने राज्य में अपनी टीम तैयार की है।
अमरिंदर को हटाकर चन्नी को बनाया था सीएम
कांग्रेस के लिए एक मुश्किल यह भी है कि वह चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों को कैसे मनाए? पंजाब में लगभग 34% आबादी दलित समुदाय की है। 2021 में जब कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाया तो चन्नी को आगे बढ़ाया और राज्य में पहली बार किसी दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाने का दांव खेला था।
यही नहीं, 2022 के विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने चन्नी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन ऐसा करना कांग्रेस के लिए फायदेमंद नहीं रहा और पार्टी बुरी तरह हार गई। कांग्रेस को सिर्फ 18 सीटों पर जीत मिली और चरणजीत सिंह चन्नी भी दोनों सीटों से चुनाव हार गए।
कांग्रेस के सामने मुश्किल है कि अगर चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों की मांग मानी गई और वड़िंग को उनके पद से हटाया गया तो इससे प्रदेश अध्यक्ष के समर्थक नाराज हो सकते हैं। वड़िंग जट्ट सिख समुदाय से आते हैं। पंजाब में इस समुदाय की आबादी 22 से 25% है और यह राजनीतिक और सामाजिक रूप से ताकतवर समुदाय है।
2022 से पहले वाले हालात
एक बड़ा सवाल पंजाब कांग्रेस में चल रही खींचतान का भी है। पंजाब कांग्रेस में ठीक वैसे ही हालात बन चुके हैं, जैसे 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले दिखाई देता था। उस समय प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू थे और उन्होंने सीएम की कुर्सी पर बैठे कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ था। पार्टी ने जब अमरिंदर सिंह को हटाकर चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया तो सिद्धू चन्नी के सामने डटकर खड़े हो गए। इसका नतीजा यह हुआ कि पंजाब की सत्ता से पार्टी की विदाई हो गई।
राहुल गांधी अगले कुछ दिनों में पंजाब का दौरा करेंगे और इस दौरान उनकी कोशिश पार्टी में चल रही गुटबाजी को खत्म करने और चन्नी-वड़िंग को एक मंच पर लाने की होगी। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी संगठन को उम्मीद है कि पंजाब में पार्टी की सरकार बना सकते हैं।
किसी और नेता को मिलेगा मौका?
कांग्रेस नेतृत्व ने वड़िंग पर भरोसा करके ही उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बनाए रखा था लेकिन शायद चन्नी और उनके समर्थक वड़िंग को हटाने से कम कुछ भी नहीं चाहते। ऐसे में हो सकता है कि किसी ऐसे नेता को प्रदेश संगठन की कमान दे दी जाए जिसके नाम पर वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी, दोनों सहमत हों। ऐसे नेता के रूप में गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम सामने आता है।
अब पंजाब इकाई में बदलाव होगा या नहीं, इसका फैसला राहुल गांधी को ही लेना है। कांग्रेस नेतृत्व ने बघेल को हटाकर चन्नी गुट की आधी बात तो मान ली है लेकिन क्या वह वड़िंग को लेकर भी कोई बड़ा फैसला लेगा, पंजाब कांग्रेस के नेता उसके अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं?
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पंजाब में संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया राज्यव्यापी ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ अभियान कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी का मंच बनता नजर आ रहा है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
