जब लाइव शो में गौरव भाटिया का मजाक बनाने लगे सपा प्रवक्ता, बोले- बता दो, गन्ना रबी की फसल या ख़रीफ की फसल, मिला यह जवाब

सवाल के जवाब में भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया एक टीचर की तरह मुझसे सवाल पूछ रहे हैं, मानों मैं उनका छात्र हूं।

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पंजाब के लुधियाना शहर में अपने खेत पर एक किसान। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः गुरमीत सिंह)

टीवी चैनलों पर आए दिन विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रवक्ता अलग-अलग मुद्दों पर एक-दूसरे को घेरते रहते हैं। उनको एक्सपोज करने की कोशिश करते हैं। कई बार इसको लेकर बहुत ज्यादा गर्मागर्मी भी हो जाती है। अब यूपी समेत पांच राज्यों का विधानसभा चुनाव जल्द ही होने वाला है। ऐसे में टीवी चैनलों पर इसको लेकर काफी डिबेट हो रहे हैं। आजतक के डिबेट दंगल में एंकर गौरव सावंत के साथ भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया और सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया के बीच जिन्ना और गन्ना पर बहस चल रही थी। इसमें सपा प्रवक्ता ने भाजपा प्रवक्ता का मजाक उड़ाने लगे।

सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने एंकर गौरव सावंत से कहा कि वे भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया से एक सवाल पूछना चाहते है। उससे पता चल जाएगा कि वे कितना किसान भक्त हैं। अनुराग ने पूछा कि गन्ना रबी की फसल है या खरीफ की फसल है। सोयाबीन रबी की फसल है या खरीफ की फसल है। इस पर गौरव भाटिया ने कहा कि सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया एक टीचर की तरह मुझसे सवाल पूछ रहे हैं, मानों मैं उनका छात्र हूं।

इस पर सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया जोर-जोर से गौरव भाटिया का मजाक उड़ाते हुए कहा कि ये एक्सपोज हो गए। इन्हें नहीं मालूम है कि गन्ना रबी की फसल है या खरीफ की फसल है।

दरअसल अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की। हालांकि इसके बाद भी पिछले करीब एक साल से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसान अपना आंदोलन अब भी खत्म नहीं किए हैं। अब किसान नेताओं का कहना है कि वे कई दूसरी मांगों को भी जब तक पूरी नहीं करवा लेंगे तब तक यहां से नहीं हटेंगे।

बुधवार को कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और कुछ अन्य सदस्यों ने आंदोलनकारी किसानों की मांगों से जुड़ा मुद्दा लोकसभा में उठाया और कहा कि सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने समेत अन्य मांगें स्वीकार करनी चाहिए। सदन में शून्यकाल के दौरान विभिन्न सदस्यों ने जनहित के अलग-अलग मुद्दे उठाए।

कांग्रेस के मणिकम टैगोर ने मांग उठाई कि कि कोराना वायरस महामारी में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने किसान आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए कहा, ‘‘700 से अधिक किसान काले कानूनों के खिलाफ आंदोलन करते हुए शहीद हुए हैं। इनके परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए…किसानों के साथ न्याय करना चाहिए और उनकी दूसरी मांगें स्वीकार की जानी चाहिए।’’

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल और एआईएमआईएम के इम्तियाज जलील ने भी कहा कि एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत किसानों की अन्य मांगें सरकार को माननी चाहिए। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सांसद दानिश अली ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान बंद हुए विश्वविद्यालयों को खोला जाना चाहिए। भाजपा के मनोज कोटक ने पिछले दिनों महाराष्ट्र के अमरावती में हुई हिंसा का मुद्दा सदन में उठाया और दावा किया कि इस घटना में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है।

उन्होंने मांग की कि रजा अकादमी और पीएफआई जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाए, वहीं पुलिस और प्रशासन की भूमिका की भी जांच हो। बसपा की संगीता आजाद ने ‘यूपीटेट’ परीक्षा का पेपर लीक होने का मुद्दा उठाया और कहा कि इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और आगे इस तरह से पेपर लीक होने से रोका जाए।

आम आदमी पार्टी के भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में सेना की भर्ती की लिखित परीक्षा कराई जाए। तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा, भाजपा के रमेश बिधूड़ी, तीरथ सिंह रावत, रामकृपाल यादव, सुनीता दुग्गल एवं विजय कुमार दुबे और कुछ अन्य दलों के सदस्यों ने भी विभिन्न मुद्दे उठाए।

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