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पहली बार आई रिपोर्ट में खुलासा- गायों की मददगार नहीं है सरकार, हो रहे भारी अत्‍याचार

राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार हुई इस छानबीन के बाद तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि इन गौशालाओं की वित्तीय स्थिति खस्ताहाल है। इक्के-दुक्के गौशाला को ही सरकारी फंड मिलता है जबकि शेष धार्मिक संगठनों या धर्म-कर्म के दान से ही संचालित होते हैं।

गाय, गौशाला, गोकशी, गोतस्करी और गौरक्षा पिछले चार सालों में राजनीति के केंद्र में रहे हैं लेकिन एक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 13 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेश की गौशालाओं की स्थिति भयावह और बदतर है। वहां गंदगी का अंबार तो है ही पशुओं पर भी अत्याचार हो रहा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन (एफआईएपीओ) ने चार सितंबर को ‘गौ गाथा’ नामक रिपोर्ट जारी किया है जिसमें कहा गया है, “गौशालाएं ऐसा प्रतीत हो रही हैं कि वे सभी चोरी-छिपे डेयरी फार्म चलाने के लिए स्थापित की गई हों, वहां बड़े पैमाने पर कदाचार हो रहा है, बिना प्रशिक्षण के स्टाफ पशुओं की देखभाल कर रहे हैं, गोबर और कचड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है और सरकार द्वारा आधारभूत सुविधाओं की भी घोर कमी है। यहां तक कि गोबर और गौ-मूत्र के कॉर्मर्शियल इस्तेमाल तक की कोई व्यवस्था नहीं है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि 50 फीसदी गौशालाओं में गायों को एक मीटर से भी छोटी रस्सी में बांधा जाता है। ऐसी स्थिति में गायें ढंग से अपना सिर भी ऊपर-नीचे नहीं कर पाती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 76 फीसदी गायों के दिनभर एक ही जगह पर बांधे रखा जाता है।

राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार हुई इस छानबीन के बाद तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि इन गौशालाओं की वित्तीय स्थिति खस्ताहाल है। इक्के-दुक्के गौशाला को ही सरकारी फंड मिलता है जबकि शेष धार्मिक संगठनों या धर्म-कर्म के दान से ही संचालित होते हैं। कुछ पैसे दूध बेचकर या अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स से होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश गौशालाओं में गायों के साथ क्रूर बर्ताव किया जाता है और उन गायों का पालन-पोषण सिर्फ लाभ पाने की मानसिकता से अलग हटकर नहीं किया जा रहा है।

एफआईएपीओ के कार्यकारी निदेशक वर्दा मेहरोत्रा ने ‘द हिन्दू’ से बातचीत में कहा कि 50 फीसदी गौशालाओं में सिर्फ दूध पर नजर रहती है जबकि गोबर और गौ-मूत्र जैसे दूसरे उत्पाद पर गौशाला संचालक ध्यान नहीं देते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को पशु कल्याण और गौ संवर्धन से संबंधित कानूनों में अविलंब संशोधन करना चाहिए ताकि पशुओं को बेहत सुविधाएं मिल सके। रिपोर्ट में केंद्र के साथ-साथ सभी राज्य सरकारों से भी गौशालाओं में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और गाय पर किए चुनावी वादे को निभाने की बात कही गई है। बता दें कि देश के आधे से अधिक राज्यों में बीजेपी की सरकार है और बीजेपी गाय पर राजनीति करती रही है। उनके चुनावी वादों में भी गौ-कल्याण की बात होती है लेकिन असल में गौशालाओं की स्थिति बदतर है।

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