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डिजिटल इंडिया के दौर में ऑनलाइन आरटीआइ की हालत खस्ता

उत्तर प्रदेश में सिर्फ 2015-16 और 2016-17 में 65 हजार से अधिक आवेदन आएं हैं। अगर 2005 से आंकड़ें सामने आते तो यह संख्या महाराष्ट्र से भी ज्यादा होती।

भोपालउत्तर प्रदेश को 15 करोड़ रुपए का बजट मिलता है। (फोटो सोर्स -इंडियन एक्सप्रेस)

गजेंद्र सिंह

डिजिटल इंडिया के दौर में सबसे जरूरी राज्य सूचना आयोग की वेबसाइटें खस्ता हालत में हैं। देश में 17 राज्य ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक आॅनलाइन आरटीआइ आवेदन की सेवा शुरू नहीं की है। इसके अलावा सूचना देने के मामले में भी ये राज्य दिलचस्पी नहीं ले रहें। 19 राज्य अपनी सूचना आयोग की वेबसाइट पर मामलों का ब्योरा और वार्षिक रिपोर्ट तक नहीं उपलब्ध करा रहे हैं। किसी भी विभाग से जुड़ने के लिए वेबसाइट एक बड़ा साधन है। यह जितनी अपडेट की जाएगी पारदर्शिता भी उतनी ही बनी रहेगी। लेकिन देश भर में सूचना के अधिकार कानून को लेकर बनी सूचना आयोग की वेबसाइट की हालत देखकर कोई नहीं कह सकता कि ये पारदर्शिता बनाने के लिए हैं।

कानून लागू हुए 13 साल हो गए लेकिन अभी तक आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, सिक्किम, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने अपने यहां आरटीआइ दाखिल करने की आॅनलाइन सेवा नहीं शुरू की है। उत्तर प्रदेश और बिहार की हालत तो सबसे बुरी है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बजट मिलने के बाद भी न तो वेबसाइट को सुचारू बनाने पर काम हो रहा है और न ही सूचना उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं बिहार की आरटीआइ वेबसाइट 2017 के बाद से बंद पड़ी है। हालांकि कर्नाटक ने मोबाइल ऐप्लीकेशन शुरू कर दी है लेकिन आॅनलाइन आवेदन नहीं शुरू किया है।

केंद्रीय सूचना आयोग के अलावा 29 राज्यों में आरटीआइ कानून का उपयोग किया जा रहा है लेकिन मात्र 11 राज्य ऐसे हैं जो आॅनलाइन सूचना मांगने की प्रक्रिया शुरू कर पाए हैं। कई बिंदुुओं पर ली गई रिपोर्ट में पता चला है कि 19 राज्य ऐसे हैं जो आरटीआइ के निस्तारित मामले और पेंडिंग स्थिति की रिपोर्ट नहीं डालते हैं। सात राज्य ऐसे हैं जो बजट और खर्च को वेबसाइट में नहीं दर्शाते। उत्तर प्रदेश न तो वार्षिक रिपोर्ट डालता है और न ही केंद्रीय सूचना आयोग का कोई आदेश। केंद्रीय सूचना आयोग को जहां 27 करोड़ से अधिक और उत्तर प्रदेश को 15 करोड़ रुपए का बजट मिलता है।

सबसे अधिक आरटीआइ यूपी में लेकिन जानकारी नहीं
ब्रज भूषण सिंह बताते हैं कि वैसे तो केंद्रीय सूचना आयोग के बाद महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल में सबसे अधिक सूचनाएं मांगी गई हैं। इनके यहां 2005 से 2018-19 तक क्रमश: 78 लाख 93 हजार, 61 लाख 80 हजार, 26 लाख 91 हजार, 22 लाख और 21 लाख से अधिक आरटीआइ आवेदन प्राप्त किए गए हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में सिर्फ 2015-16 और 2016-17 में 65 हजार से अधिक आवेदन आएं हैं। अगर 2005 से आंकड़ें सामने आते तो यह संख्या महाराष्ट्र से भी ज्यादा होती।

उत्तर प्रदेश में आरटीआइ को लेकर गंभीरता पर सवाल उठते कहते हैं कि यहां न तो साप्ताहिक रिपोर्ट मिलती है और न ही रिमाइंडर को गंभीरता से लिया जाता है।
-ब्रज भूषण सिंह, उप निदेशक, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया

अफगानिस्तान और श्रीलंका में भारत के बाद आरटीआइ शुरू की गई थी लेकिन आज ये हम से ऊपर पायदान पर हैं, क्योंकि वहां आरटीआइ को लेकर गंभीरता दिख रही है।
-मुहम्मद खालिद जीलानी सूचना के अधिकार कानून कार्यकर्ता

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