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सियाचिन में जवानों को कम मिल रहा राशन और उपकरण, CAG की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

रक्षा मंत्रालय ने अपनी ओर से सीएजी को बताया कि सेना के मुख्यालय के भंडार में विशेष ऊंचाई पर रहने वाले सैनिकों के लिए जरूरी कपड़ों और उपकरणों की कमी है।

ऊंचाई वाले बर्फीले इलाके में तैैनात भारतीय सेना (फोटो- पीटीआई)

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सियाचीन, लद्दाख और डोकलाम जैसे बर्फीले और ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सेना के जवानों के पास सर्दियों के विशेष कपड़ों, बर्फ के चश्मे, बहुउद्देश्यीय जूते और अन्य उपकरणों की भारी कमी है। सैनिकों को आवश्यक कैलोरी वाले पर्याप्त राशन भी नहीं मिल रही है।

रक्षा मंत्रालय ने अपनी ओर से सीएजी को बताया कि सेना के मुख्यालय के भंडार में विशेष ऊंचाई पर रहने वाले सैनिकों के लिए जरूरी कपड़ों और उपकरणों की कमी है। हालांकि “बजट की कमी” के बावजूद समय के साथ उसे पूरा किया जाएगा।

सेना के एक अधिकारी ने बताया, “सीएजी की रिपोर्ट 2015-16 से 2016-17” तक की है। तब से स्थितियों में सुधार हुआ है। अब सियाचीन जैसी जगह, जहां 16 हजार से 22 हजार फीट की ऊंचाई पर सेना तैनात हैं, में कपड़ों और उपकरणों की कमी नहीं है। इसके साथ सियाचिन की ऊंचाइयों पर रहने वाले हर एक सैनिक के लिए लगभग 1 लाख रुपए कपड़ों पर खर्च होते हैं। सेना कोशिश कर रही है कि विशेष रूप से अत्यधिक सर्दियों के कपड़े स्वदेशी और उन्नत किस्म के बनाए जाएं। अभी तक यह आयात किए जाते हैं।

संसद में पेश कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना मुख्यालय में विभिन्न मदों के लिए अधिकृत होल्डिंग्स में 24% से 100% कमियां हैं। उदाहरण के लिए सैनिकों को पुनर्नवीनीकरण बहुउद्देश्यीय जूते बनाने पड़ते हैं, जो पैरों को माइनस 55 डिग्री सेल्सियस तापमान तक सुरक्षित रखते हैं। ये नवंबर 2015 से सितंबर 2016 तक उपलब्ध नहीं थे। सैनिकों के लिए जरूरी और मानक के अनुरूप कैलोरी वाले राशन में भी कमी देखी गई। महंगे सामान लेने और कम कैलोरी वाले राशन से सैनिकों के फिटनेस और स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।

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