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रामदेव की ‘Coronil’ के प्रचार पर रोकः AYUSH मंत्रालय ने मांगे ‘कोरोना की दवा’ के डिटेल्स, तो बोले Patanjali सीईओ- रह गया था कम्युनिकेशन गैप

उन्होंने मोदी के मंत्रालय और स्वामी रामदेव को टैग करते हुए Patanjali के सीईओ आचार्य बालकृष्ण ने मंगलवार को ट्वीट किया, "यह सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन व गौरव देने वाली है।

Coronavirus, COVID-19, Coronil, Swami Ramdev, Baba Ramdevयोग गुरु रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद ने कोविड-19 के इलाज में शत-प्रतिशत कारगर होने का दावा करते हुए मंगलवार को बाजार में एक औषधि उतारी है। (फाइल फोटोः एजेंसी)

जाने-माने योग गुरु और Patanjali Ayurved Limited के सर्वेसर्वा बाबा रामदेव ने मंगलवार को कोरोनावायरस से निजात दिलाने वाली दवा इजाद कर लेने का दावा किया। Coronil नाम की इस दवा की खबर के थोड़ी ही देर बाद Indian Council of Medical Research (ICMR) और भारत सरकार के Ministry of Ayurveda, Yoga & Naturopathy, Unani, Siddha and Homoeopathy (AYUSH) ने इस दावे से पल्ला झाड़ लिया। कहा कि हमें इस बारे में खासा जानकारी नहीं है। मोदी के मंत्रालय ने इस बाबत तो दवा के डिटेल्स मांग लिए। साथ ही कहा कि जब तक इस मुद्दे की जांच नहीं हो जाती, तब के लिए कंपनी इस दवा का प्रचार-प्रसार न करे।

हालांकि, पतंजलि के सीईओ और स्वामी रामदेव के करीबी आचार्य बालकृष्ण ने इस मसले पर सफाई दी। कहा कि सरकार और उन लोगों के बीच कम्युनिकेशन गैप रह गया था। उन्होंने मोदी के मंत्रालय और स्वामी रामदेव को टैग करते हुए Patanjali के सीईओ आचार्य बालकृष्ण ने मंगलवार को ट्वीट किया, “यह सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन व गौरव देने वाली है। जो कम्युनिकेशन गैप था, वह दूर हो गया है। Randomised Placebo Controlled Clinical Trials के जितने भी स्टैंडर्ड पैरामीटर हैं, उन सबको 100% पूरा किया (इसी दवा ने) है। इसकी सारी जानकारी हमने आयुष मंत्रालय को दे दी है।”

पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से दवा से जुड़े विस्तृत डिटेल्स की प्रति आयुष मंत्रालय को भेज दी गई है।

आयुष मंत्रालय ने पतंजलि के दावे पर कहा कि इस दावे के तथ्य और बताया जा रहे वैज्ञानिक अध्ययन के ब्योरे के बारे में उसे जानकारी नहीं है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, ‘‘संबद्ध आयुर्वेदिक औषधि विनिर्माता कंपनी को सूचित किया गया है कि आयुर्वेदिक औषधि सहित दवाइयों का इस तरह का विज्ञापन औषधि एवं चमत्कारिक उपाय (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम,1954 तथा उसके तहत आने वाले नियमों और कोविड-19 के प्रसार के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों से विनियमित होता है।

पतंजलि को नमूने के आकार, स्थान एवं उन अस्पतालों का ब्योरा देने को कहा गया है, जहां अनुसंधान अध्ययन किया गया। साथ ही संस्थागत नैतिकता समिति की मंजूरी भी दिखाने को कहा गया है। इससे पहले, हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में संवाददाताओं से रामदेव ने कहा, ‘‘यह दवाई शत प्रतिशत (कोविड-19) मरीजों को फायदा पहुंचा रही है।100 मरीजों पर नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल किया गया, जिसमें तीन दिन के अंदर 69 प्रतिशत और चार दिन के अंदर शत प्रतिशत मरीज ठीक हो गये और उनकी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई।’’

रामदेव का दावा है कि आयुर्वेद पद्धति से जड़ी-बूटियों के गहन अध्ययन और अनुसंधान के बाद यह दवा बनी है। यह मरीजों को शत प्रतिशत फायदा पहुंचा रही है। पतंजलि के मुताबिक, 100 मरीजों पर नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल किया गया, जिसमें तीन दिन के अंदर 69 प्रतिशत और चार दिन के अंदर शत प्रतिशत मरीज ठीक हो गये और उनकी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई। बाबा रामदेव ने कहा, “यह इतिहास की बहुत बड़ी घटना है।’’ उन्होंने इस संबंध में कटाक्ष भी किया और कहा था कि हो सकता है कि कई लोग इस दवाई पर संदेह करें और ‘कहें कि यह कैसे हो सकता है।’

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