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रंग-बिरंगा भारत

होली फाल्गुन की पूर्णिमा सेआधे चैत्र तक मनाई जाती है। हिन्दू मान्यता और सनातन धर्म के अनुसार नया संवत्सर शुरू होने के लिए इस त्योहार का आयोजन होता है।

Author March 24, 2016 4:30 AM

पूर्वांचल
होली फाल्गुन की पूर्णिमा सेआधे चैत्र तक मनाई जाती है। हिन्दू मान्यता और सनातन धर्म के अनुसार नया संवत्सर शुरू होने के लिए इस त्योहार का आयोजन होता है। पूर्वांचल में होली के दिन संवत्सर दहन किया जाता है। होलिका की पूजा की जाती है और नए साल में खुशियों की कामना की जाती है। नए संवत्सर की सभी को बधाई दी जाती है। बिहार में फाग-पूर्णिमा धूमधाम से मनाया जाने वाला त्योहार है।
महाराष्ट्र
होली को रंगपंचमी के नाम से भी जाना जाता है। कुछ जगहों पर इसे शिमगा और शिमगो के नाम से जाना जाता है। मुख्य रूप से यह मछुआरों के लोक त्योहार के रूप में लोकप्रिय है। इस दिन वे नाचते हैं, गाते हैं, खुशियां मनाते हैं। वे अपने मुंह से एक अलग किस्म की आवाज निकालकर खुशी जाहिर करते हैं।
गोवा
होली पर गोवा में शिमगोत्सव का आयोजन होता है। यह कोंकणी भाषा का शब्द है। विशेष भोज्य पदार्थों के रूप में यहां मसालेदार मांस और मटन करी वाला शगोती बनाया जाता है और मिठाइयां बनाई जाती हैं। इस उत्सव पर बड़ा जुलूस निकाला जाता है। इस दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए जाते हैं।
हरियाणा
भाभियां साड़ी का चाबुक बनाती हैं और देवर उन्हें रंग लगाने के लिए आते हैं। उस दौरान भाभियां उस चाबुक को लेकर देवरों के पीछे भागती हैं और उन्हें रंग डालने से रोकती हैं।
पश्चिम बंगाल
वसंतोत्सव के रूप में पश्चिम बंगाल में होली मनाई जाती है जबकि डोल पूर्णिमा या डोल जात्रा के नाम से भी वहां होली का त्योहार आयोजित किया जाता है। छात्र-छात्राएं नारंगी रंग की पोशाक पहनते हैं और गले में फूलों के हार पहन कर उत्सव मनाते हैं। पश्चिम बंगाल में बसंत को आशा, प्रेम और खुशी का प्रतीक माना जाता है। लिहाजा पूरे बंगाल में वसंतोत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर शांति निकेतन में मंत्रों का जाप, गीत, नृत्य आदि होते हैं और अबीर गुलाल से खेलते हैं।
पंजाब
होला मोहल्ला के नाम से उन्माद से भरी होली पंजाब में खेली जाती है। खासतौर पर आनंदपुर साहेब में होली के दिन होला मोहल्ला का आयोजन होता है। पंजाब में इस दिन मेला लगता है। साल भर के त्योहार के रूप में होने वाले इस आयोजन पर सिख गुरु गोविंद सिंह को भी याद किया जाता है। पंजाब में यह त्योहार तीन दिनों तक मनाया जाता है। इन दिनों तक सिख समुदाय के लोग विभिन्न शक्ति प्रदर्शन करते हैं। इनमें मॉक एनकाउंटर से लेकर घुड़सवारी, दौड़ते घोड़ों को पकड़ना आदि शामिल हैं। अंतिम तीसरे दिन एक विशाल जुलूस निकलता है जो किला आनंदगढ़, लोहगढ़ साहिब, माता जीतोजी आदि गुरुद्वारों से होते हुए तख्त तक जाता है।
तमिलनाडु
कामदेव की पूजा का त्योहार माना जाने वाला कामन पांडिगी, कामविलास, काम-दाहनम मनाया जाता है। लोग कामदेव और शिव की आराधना करते हैं। ऐसे में वसंत के आगमन के साथ ही यहां कामदेव की पूजा-अर्चना शुरू की जाती है। इस दिन सभी लोग शिव और कामदेव की प्राचीन कथा को भी आपस में सुनाते हैं। इस अवसर पर रति के प्रेम और कामदेव के लिए उसके समर्पण और दुख पर कई मंचन किए जाते हैं।
आंध्र प्रदेश
युवा सांझ ढलने से पहले सूखे रंगों और अबीर को लोगों के साथ खेलते हैं। इस दिन खुशियां मनाई जाती हैं। सभी एक दूसरे को मिठाइयां बांटते हैंं। आंध्र-प्रदेश की बंजारा जाति इसे खास त्योहार के रूप में मनाती है। उसका अंदाज भी अलहदा होता है।
जनजातियों में
विभिन्न जातियां और जनजातियां होली मनाती हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों में बसने वाली ये जनजातियां होली पर देवी-देवताओं की पूजा करने के साथ ही आग जलाती हैं। परिक्रमा करती हैं। गीत गाती हैं। नाचती हैंं। खुशियां मनाती हैं और आगे भी ऐसा त्योहार मनाने का वादा करती हैं। ये लोग इस दिन पेड़ों पर आने वाली नई शाखों का भी स्वागत करते हैं। सबसे खास बात भील जनजाति के युवा इस त्योहार को खास रूप में देखते हैं। इस दिन युवाओं को अपना जीवनसाथी चुनकर विवाह करने की अनुमति मिल जाती है। युवा अपने-अपने प्रेम के साथ जीवन जीने के लिए पूर्ण रूप से अनुमति लेकर तैयार होते हैं।
विदेशों में
विभिन्न देशों में होली बड़े उत्साह और तैयारी के साथ मनाई जाती है। बांग्लादेश, पाकिस्तान, गुयाना, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, दक्षिण अफ्रीका, सूरीनाम, अमेरिका, इंग्लैंड, त्रिनिदाद और टोबेगो आदि में होली का उत्साह रहता है। इन देशों में जहां भारतीय लोगों की पहुंच रहने के कारण होली का उत्साह दोगुना होता है, वहीं विदेशी भी भारत की जमीन पर आकर यहां के रंगों में रच बस जाते हैं।
सभी देशों में सभी धर्मों के लोग होली को रंगों और गुलाल के साथ धूमधाम से मनाते हैं।

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