कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने जन्मदिन पर इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर लिखा- “प्लीज, कॉल न करें।” अभिजीत की इस बात को मानने वालों में उनके माता-पिता- अनीता दीपके और भगवान शंकर दीपके भी शामिल थे।

भगवान शंकर दीपके ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “जब वह दिल्ली में पढ़ रहा था, तब भी वह अपने जन्मदिन पर घर आता था, हम केक काटते थे, उसे नए कपड़े तोहफे में देते थे, उसके दोस्तों के साथ जश्न मनाते थे और बाहर खाना खाने जाते थे। चिकन बिरयानी उसकी पसंदीदा डिश है।”

अभिजीत दीपके का परिवार औरंगाबाद में रहता है। औरंगाबाद को अब छत्रपति संभाजीनगर कहा जाता है। पिछले दो सालों से अभिजीत दीपके अमेरिका में थे, जहां वह बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे।

अभिजीत दीपके के माता-पिता चाहते थे कि इस साल उनका बेटा जन्मदिन पर फिर से घर आए लेकिन 31 साल के अभिजीत दीपके दिल्ली में थे। कॉकरोच जनता पार्टी ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान किया है।

भगवान शंकर दीपके कहते हैं, “हमने उससे घर आने के लिए कहा लेकिन उसने कहा कि यह मुमकिन नहीं है।”

गांव में युवाओं ने लगाया रक्तदान शिविर

अभिजीत दीपके का पुश्तैनी गांव हिंगोली जिले में है। उनके गांव का नाम संटुक पिंपरी है। गांव के युवाओं ने इस मौके पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया। भगवान शंकर कहते हैं, “जब अभिजीत घर आता है तो हर दिन 100 से ज्यादा लोग उससे मिलने आते हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं, कॉलेज के छात्र और पूरे महाराष्ट्र से सामाजिक कार्यकर्ता होते हैं। अभी घर में बहुत सन्नाटा है।”

मंगलवार को सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने दीपके के लिए दिल को छू लेने वाला मैसेज पोस्ट किया। राकां ने लिखा, “जब हम उम्मीद खोने लगे थे, तब तुमने इस देश (और मुझे) आगे बढ़ाया।” दिल्ली जाने से पहले अभिजीत ने अपनी मां से कहा था, “मम्मी, टेंशन मत लो। अब मैं तुम्हारा बच्चा कम और देश का ज्यादा हूं।”

भगवान शंकर दीपके महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से रिटायर हो चुके हैं। वह सिविल इंजीनियर के पद पर थे। जैसे-जैसे अभिजीत देश में युवाओं के आंदोलन का चेहरा बने, उनके परिवार की जिंदगी में भी बदलाव आए हैं।

पेंशन से चुका रहे अभिजीत का एजुकेशन लोन

भगवान शंकर दीपके अपनी पेंशन से अभिजीत का एजुकेशन लोन चुका रहे हैं। वह कहते हैं, “अभी भी काफी रकम बाकी है।” अभिजीत ने अपने परिवार को बता दिया है कि वह अभी कोई नौकरी नहीं करेगा। वह आम लोगों के मुद्दे उठा रहा है और उनके लिए लड़ रहा है। भगवान शंकर कहते हैं, “वह राजनीति में शामिल नहीं होगा। बस समाज सेवा करेगा।”

दो-तीन साल तक शादी न करने का फैसला

अभिजीत की मां अनीता दीपके कहती हैं, “उसने दो-तीन साल तक शादी न करने का फैसला किया है। वह देश के लिए काम कर रहा है। हम अब कुछ नहीं कहते।” मां कहती हैं कि जब अभिजीत घर पर होता है तो अपने पिता की कार लेकर स्कूलों का जायजा लेने गांव निकल जाता है।

अनीता बताती हैं, “सीजेपी ग्रामीण स्कूलों की हालत को सबके सामने ला रही है। पहले गांवों में स्कूलों पर कोई ध्यान नहीं देता था। जब से सीजेपी ने यह मुद्दा उठाया है, तब से उनमें सुधार होने लगा है।”

अनीता दीपके कहती हैं कि उन्हें विरोध-प्रदर्शनों के दौरान होने वाली हिंसा को लेकर अभिजीत की चिंता होती है। पिता भगवान दीपके कहते हैं कि अभिजीत को बहुत समर्थन भी मिल रहा है और इससे हमें खुशी होती है।

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने पहली बार बीजेपी शासित किसी राज्य के सरकारी स्कूल की तारीफ की है। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने असम के एक सरकारी स्कूल की तस्वीर और वीडियो को देखकर स्कूल में दी जा रही सुविधाओं की तारीफ की। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।