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कोबरा पोस्ट ने कहा- हमने नहीं किया, खरीदा है “पेड हिंदुत्व कंटेंट” वाला स्टिंग, जानिए क्या कहते हैं फंसने वाले संस्थान

कोबरा पोस्ट के स्टिंग में जिन मीडिया संस्थानों के नाम हैं उनमें जी न्यूज, स्टार इंडिया, द टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे ग्रुप, नेटवर्क 18, एबीपी ग्रुप, पेटीएम, रेडियो वन, सुवर्ना न्यूज, इंडिगो 91.9एफएम, दैनिक जागरण, भारत समाचार, स्वराज एक्सप्रेस न्यूज, सन ग्रुप, लोकमत. एबीएन आंध्र ज्योति, टीवी5 न्यूज, दिनामलार, बिग एफएम, के न्यूज, इंडिया वॉयस, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, एमवीटीवी न्यूज, ओपन मीडिया नेटवर्क, वर्तमान और दैनिक संवाद शामिल है।

कोबरा पोस्ट ने पैसे लेकर हिन्दुत्व से जुड़े कंटेंट छापने के मामले में देश के 27 मीडिया संस्थानों का स्टिंग ऑपरेशन किया है। इस वीडियो स्टिंग का नाम ‘ऑपरेशन 136-II’ रखा गया है।

खोजी पत्रकारिता के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले कोबरा पोस्ट ने पैसे लेकर हिन्दुत्व से जुड़े कंटेंट छापने के मामले में देश के 27 मीडिया संस्थानों का स्टिंग ऑपरेशन किया है। ‘ऑपरेशन 136-II’ नाम के इस वीडियो स्टिंग में दिखाया गया है कि अधिकांश संस्थानों ने पेड न्यूज को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, बाद में कई मीडिया संस्थानों ने इसका खंडन किया है और आरोप लगाया है कि कोबरा पोस्ट ने फर्जी और मनगढ़ंत तरीकों से उसकी छवि बदनाम करने की कोशिश की है। इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप का इस स्टिंग में नाम नहीं है। इसलिए निष्पक्ष होकर उन मीडिया संस्थानों का पक्ष जानने की कोशिश की। इसके लिए इंडियन एक्सप्रेस ने 25 मीडिया संस्थानों को ई-मेल भेजकर मामले में पक्ष रखने को कहा। अधिकांश मीडिया संस्थानों ने कोबरा पोस्ट के स्टिंग वीडियो को फर्जी करार दिया है। बता दें कि कुल 49 वीडियो स्टिंग में हिन्दुत्व, राजनीति और कांग्रेस, बीएसपी, एसपी और जेडीएस जैसी कुछ खास पार्टियों के खिलाफ खबर छापने के बारे में बातचीत के अंश हैं।

इंडियन एक्सप्रेस ने जब स्टिंग करने वाले कोबरा पोस्ट से पूछा कि स्टिंग के लिए फंड किसने मुहैया कराया तो एडिटर इन चीफ अनिरुद्ध बहल ने बताया कि पुष्प शर्मा ने ये स्टिंग अपने खर्चे पर किया है और पैसे देकर कोबरा पोस्ट ने इसे खरीदा है। जब उनसे पूछा गया कि वीडियो में सिर्फ चैट दिख रहा है तो उन्होंने कहा कि रिपोर्टर एक विशेष मकसद से वहां गया, इसलिए लोगों ने उसे गंभीरता से लिया। बहल ने कहा कि उनमें से कोई भी मीडियावाले तब रिपोर्टर को गंभीरता से नहीं लेता, जब उसे पता चलता कि उसके पास पैसे नहीं हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या किसी संस्थान को पैसे दिए गए तो उन्होंने कहा, “हम पैसे कैसे दे सकते हैं? हमारे पास कोई पैसा नहीं है।” उन्होंने कहा कि स्टिंग का मकसद सिर्फ “इरादा” जानने भर का था।

कोबरा पोस्ट के स्टिंग में जिन मीडिया संस्थानों के नाम हैं उनमें जी न्यूज, स्टार इंडिया, द टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे ग्रुप, नेटवर्क 18, एबीपी ग्रुप, पेटीएम, रेडियो वन, सुवर्ना न्यूज, इंडिगो 91.9एफएम, दैनिक जागरण, भारत समाचार, स्वराज एक्सप्रेस न्यूज, सन ग्रुप, लोकमत, एबीएन आंध्र ज्योति, टीवी5 न्यूज, दिनामलार, बिग एफएम, के न्यूज, इंडिया वॉयस, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, एमवीटीवी न्यूज, ओपन मीडिया नेटवर्क, वर्तमान और दैनिक संवाद शामिल है। इनमें से 25 संस्थानों से इंडियन एक्सप्रेस ने पक्ष जानने की कोशिश की है।

इंडिया टुडे ग्रुप से जब इस स्टिंग के बारे में इंडियन एक्सप्रेस ने पक्ष जानने की कोशिश की और उसे ई-मेल भेजा तो उसका कोई जवाब नहीं आया। हालांकि, कोबरा पोस्ट के स्टिंग पर इंडिया टुडे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वीडियो स्टिंग आउट ऑफ कन्टेक्स्ट है और इंडिया टुडे ग्रुप की छवि को बदनाम करने, नुकसान पहुंचाने, प्रतिष्ठा को कमजोर करने के इरादे से छेड़छाड़ कर प्रस्तुत किया गया है। ग्रुप ने लिखा है, “आपके रिपोर्टर को संस्थान ने साफ तौर पर कहा है कि हमारे यहां किसी भी तरह की अनैतिक खबरें, आधारहीन विज्ञापनपरपक खबरें या ऐसे कन्टेंट नहीं छापे जाते हैं जो समाज में जाति, धर्म या अन्य आधार पर नफरत फैलाने की कुत्सित कोशिश करते हैं।”

देखें- इंडिया टुडे ग्रुप का वीडियो स्टिंग

टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के एमडी विनीत जैन को इंडियन एक्सप्रेस ने दो मेल भेजे लेकिन कोई जवाब नहीं आया। वीडियो स्टिंग में विनीत जैन को रिपोर्टर द्वारा 50 करोड़ रुपये कैश देने की बात कहते हुए दिखाया गया है लेकिन वीडियो में जैन के एक सहयोगी द्वारा चेक से पेमेंट करने के लिए राजी करते हुए दिखाया गया है। वीडियो में दिखाया गया है कि जैन रिपोर्टर का काम करने को तैयार हैं लेकिन वो कहते दिख रहे हैं कि कंटेंट दिखने में न्यूट्रल होना चाहिए।

देखें- टाइम्स ग्रुप का वीडियो स्टिंग

एचटी मीडिया की तरफ से चीफ रेवेन्यू ऑफिसर अनिल दुआ ने इंडियन एक्सप्रेस को भेजे जवाबी मेल में लिखा है, “हमारे यहां एक संपादकीय नीति है, जो किसी भी तरह की पेड न्यूज को हतोत्साहित और खारिज करती है। हमें अपनी नीति पर बहुत गर्व है। इसका हम बड़ी गंभीरता से पालन करते हैं। मेरी व्यक्तिगत टिप्पणियां स्पष्ट रूप से बताती हैं कि यदि सामग्री कानूनी और उचित है और हमारे संपादकीय दिशा-निर्देशों को पूरा करती हैं तो हम इसकी आंतरिक मंजूरी लेंगे। हालांकि, स्टिंग में मेरी पूरी बात को नहीं दिखाया गया है और उसे अपने लाभ के लिए एडिट किया गया है।” स्टिंग में दुआ यह कहते हुए दिख रहे हैं कि देखिए आप जो अपनी तरफ से करना चाहते हैं उसमें हमें करने में कोई प्रॉब्लम नहीं है। स्टिंग में एचटी मीडिया के चेयरपर्सन शोभना भरतिया से मुलाकात के बारे में भी चर्चा है।

देखें- एचटी मीडिया ग्रुप का वीडियो स्टिंग

जी न्यूज की तरफ से सीईओ- रिजनल चैनल्स पुरुषोत्तम वैष्णव ने जवाबी ई-मेल में लिखा है कि वह जी न्यूज ही था जिसने पुष्प शर्मा का पैसे बांटते हुए स्टिंग ऑपरेशन किया था। उन्होंने लिखा है कि कोबरा पोस्ट ने बातचीत और मुलाकात के वीडियो में छेड़छाड़ की है और एडिटेड वीडियो क्लिप अपलोड किया है। रिपोर्टर ने वैष्णव को 25 करोड़ रुपये की पेशकश की थी।

देखें- जी न्यूज ग्रुप का वीडियो स्टिंग

कन्नड़ प्रभा के एडिटर इन चीफ रवि हेगड़े ने ई-मेल में लिखा है कि उन पर लगे आरोप आधारहीन हैं। उन्होंने लिखा है, रिपोर्टर से मुलाकात के तुरंत बाद हमने पुलिस अधिकारियों को इस बारे में सूचित किया था कि एक शख्स गलत इरादे से कुछ खबरें हमारे अखबार में छपवाने के लिए संपर्क किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि वीडियो स्टिंग झूठ का पुलिंदा है। उसमें बातचीत के अंश को छेड़छाड़ और एडिट कर अपने हित को साधने के मकसद से प्रोड्यूस किया गया है। उन्होंने लिखा है कि हम ऐसी कोशिशों की निंदा करते हैं जो हमारे ग्रुप की प्रतिष्ठा का धूमिल करने की चेष्टा कर रहे हैं।

लोकमत ग्रुप के प्रवक्ता ने इंडियन एक्सप्रेस को जवाबी मेल में लिखा है, “नैतिकता और राष्ट्रीय अखंडता लोकमत के 100 साल के इतिहास का प्रतीक रहा है। वीडियो में व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं और ग्रुप न तो इसका समर्थन करता है और न ही इसकी सदस्यता लेता है। हमारे पास एक बहु स्तरीय संपादकीय नीति है जो चेक एंड बैलेंस की नीति पर चलते हुए सुधि पाठकों तक निष्पक्ष रिपोर्टिंग सुनिश्चित करता है। स्टिंग में बातचीत के क्रम मे दिख रहा व्यक्ति अब लोकमत कर्मचारी नहीं है। वह किसी भी हैसियत के साथ लोकमत ग्रुप से जुड़ा हुआ नहीं है।”

देखें- लोकमत ग्रुप का वीडियो स्टिंग

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