सर्वे: कोरोना ने तोड़ी मिडिल क्लास लोगों की आर्थिक कमर, लॉकडाउन में 15 फीसदी इनकम का नुकसान

अप्रैल-जून 2019 में 5 लाख रुपए सालाना या इससे ज्यादा की कमाई करने वाले आधे से ज्यादा लोगों की कमाई में बढ़ोत्तरी हुई थी। लेकिन इस साल लॉकडाउन के चलते इसमें 15 फीसदी की गिरावट आयी है।

कोरोना वायरस लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर देश के मध्यम वर्ग पर पड़ा है।

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते हुए देशव्यापी लॉकडाउन ने समाज के सभी वर्गों पर असर डाला है। हालांकि सर्वे से खुलासा हुआ है कि इस कोरोना वायरस लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर देश के मध्यम वर्ग पर पड़ा है। आर्थिक रिसर्च फर्म सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (CMIE) ने एक सर्वे किया है, जिसमें पता चला है कि अप्रैल-जून 2020 के दौरान मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग को कमाई की ग्रोथ के मामले में ज्यादा नुकसान हुआ है।

सर्वे में सीएमआईई ने लोगों की बीते साल की कमाई में हुई बढ़ोत्तरी और इस साल हुई कमाई में बढ़ोत्तरी के अनुपात का अध्ययन किया है। सर्वे के अनुसार, जिन लोगों की मासिक कमाई 4000 रुपए से कम थी, लॉकडाउन के दौरान उनकी कमाई में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई। जिन लोगों की कमाई 6 हजार रुपए प्रति माह थी, उनकी कमाई में एक फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि बीते साल यह 14 फीसदी थी।

अप्रैल-जून 2019 में 5 लाख रुपए सालाना या इससे ज्यादा की कमाई करने वाले आधे से ज्यादा लोगों की कमाई में बढ़ोत्तरी हुई थी। लेकिन इस साल लॉकडाउन के चलते इसमें 15 फीसदी की गिरावट आयी है। 10 लाख या उससे ज्यादा सालाना कमाने वाले लोगों की कमाई में जबरदस्त गिरावट देखी गई है।

वहीं 18 से 24 लाख रुपए सालाना कमाने वाले लोगों की कमाई में कोई भी बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। यह जबरदस्त गिरावट है क्योंकि साल 2019 में इस वर्ग की कमाई में 65 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई थी।

उल्लेखनीय है कि भारत के उच्च वर्ग, जिसकी कमाई सालाना 36 लाख रुपए से ज्यादा है, उसकी कमाई लॉकडाउन के दौरान बढ़ी है। हालांकि लॉकडाउन का असर इन पर भी पड़ा है। सीएमआईई डाटा के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान ईपीएफओ के करीब 13 फीसदी खाताधारकों ने अपना पैसा निकाला है।

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