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नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा को आदित्य नाथ ने जो रिपोर्ट सौंपी उसका हॉर्वर्ड से नहीं कोई लेना-देना, ना ही उसमें है योगी सरकार की तारीफ

योगी आदित्यनाथ ने जो पुस्तक प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री, राष्ट्रपति और जेपी नड्डा को दी थी, दरअसल उसका संबंध हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से नहीं है। इसमें योगी सरकार की तारीफ़ भी नहीं की गई है।

गृह मंत्री अमित शाह को पुस्तक भेंट करते सीएम योगी। फोटो- ट्विटर @myogiadityanath

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नेतृत्व की नाराज़गी चर्चा जोरों पर है। हालांकि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष से मुलाक़ात करके इस तरह के कयासों को ख़ारिज करने की कोशिश की। इन मुलाक़ातों के दौरान एक पुस्तक की भी चर्चा गरम रही जो कि योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत बड़े नेताओं को भेंट की। इस पुस्तक का शीर्षक था, ‘कोविड-19 एवं प्रवासी संकट का समाधानः उत्तर प्रदेश पर एक रिपोर्ट।’ एक नज़र में देखने पर बड़ा-बड़ा ‘समाधान’ शब्द ही नज़र आता था।

नड्डा को योगी ने जो पुस्तक दी थी उसका शीर्षक अंग्रेजी में लिखा हुआ था। यूएनआई न्यूज एजेंसी समेत कई समाचार संस्थानों ने इस पुस्तक पर रिपोर्ट लिखी। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि हॉरवर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी के आधार पर यह पुस्तक जारी की गई है। हालांकि आल्ट न्यूज के मुताबिक यह रिपोर्ट पूरी तरह से ग़लत है। न तो इस रिपोर्ट का हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से कोई लेना-देना है और न ही इसमें योगी सरकार की तारीफ़ की गई है।

न्यूज एजेंसी UNI ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था, ‘यह बड़े प्रवासी संकट से निपटने का एक प्रमाण है। योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी को हॉरवर्ड यूनिवर्सिटी के अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट सौंपी। योगी ने पीएम मोदी को तीन पुस्तकें सौंपी हैं जिनमें जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की स्टडी भी शामिल है।’

इन पुस्तकों के लोगो की तरफ़ ध्यान दिया गया तो इसमें इंस्टिट्यूट फॉर कंपटीटिवनेस (IFC) और माइक्रोइकोनॉमिक्स ऑफ कंपटीटिवनेस (MOC) का लोगो बना हुआ है जो कि हॉरवर्ड बिजनस स्कूल से संबद्ध एक नेटवर्क भर है। आल्ट न्यूज का दावा है कि अप्रैल में भी कुछ मीडिया संस्थानों ने कहा था कि हॉरवर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी में योगी सरकार की तारीफ़ की गई है। लेकिन यह रिपोर्ट हॉरवर्ड ने नहीं बल्कि IFC ने तैयार की है।

IFC की वेबसाइट के मुताबिक यह खु़द को हॉरवर्ड का हिस्सा नहीं बताता है। यहां तक कि इंस्टिट्यूट फॉर स्ट्रैटजी ऐंड कंपटीटिवनेस (ISC) भी इसे MOC से ही संबद्ध बताता है जो कि हॉरवर्ड का एक कोर्स भर है। इसे प्रोफेसर माइकल पोर्टर और उनके स्टाफ ने डिवेलप किया था। IFC के चेयरमैन अमित कपूर ने बताया कि MOC से जुड़ी स्टडी को हॉरवर्ड का बताना बिल्कुल उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इस स्टडी में कोई ऐसी तुलना नहीं की गई है कि यूपी सरकार ने दूसरे राज्यों के मुकाबले प्रवासी संकट को बेहतरी से संभाला है।

उन्होंने कहा, ‘यह केवल उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों से संबंधित है। यह दस्तावेज केवल आंतरिक विश्लेषण के लिए था और इसको सार्वजनिक करने का कोई उद्देश्य नहीं था। इस तरह से इसे पेश किया जाना भी ग़लत है। इस रिपोर्ट से लोगो हटा दिया जाएगा ताकि इसे गलत तरीके से न पेश किया जा सके।’

कपूर ने यह भी कहा कि MOC के लोगो को इसलिए नहीं हटाया गया था क्योंकि इसे छपवाकर सार्वजनिक किए जाने का विचार ही नहीं था। उन्होंने कहा कि हालिया कॉपी में एमओसी के लोगो को हटा दिया गया है। रिपोर्ट पर केवल आईएफसी का ही लोगो है।

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