तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने नीति आयोग की बैठक के दौरान एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए केवल 12वीं बोर्ड परीक्षा के अंकों को ही आधार बनाया जाए।
मुख्यमंत्री विजय की ओर से यह मांग नीति आयोग की 11वीं बैठक में उठाई गई। उन्होंने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) का विरोध करते हुए कहा कि तमिलनाडु मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए नीट को आधार बनाए जाने का विरोध करता है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को नुकसान हुआ है।
राज्य सरकार चाहती है कि केंद्र उसे एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष की सभी सीटों पर प्रवेश 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर देने की अनुमति दे।
मुख्यमंत्री विजय की यह मांग ऐसे समय में आई है, जब देशभर में नीट को लेकर बहस जारी है। 21 जून को NEET UG 2026 का री एग्जाम आयोजित होना है। इससे पहले तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी ऐसी ही मांग उठा चुके हैं। वह भी लंबे समय से नीट परीक्षा का विरोध करते रहे हैं। अब उसी लाइन पर आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री विजय ने भी यह मुद्दा केंद्र सरकार के सामने रखा है।
कुछ दिन पहले तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने सिंगाप्पन स्पेशल टास्क फोर्स लॉन्च की है थी। इसका मकसद राज्य में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने और संकटकालीन कालों पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। इस स्पेशल टास्क फोर्स की खास बात यह भी है कि यह पूरी तरह से महिला पुलिस इकाई है। इसीलिए इसे All Women Police Unit भी कहा जाता है।
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