तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विकसित भारत गारंंटी योजना के क्रियान्वयन का विरोध किया है। हाल ही में शुरू की गई ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (VB-GRAMG) योजना में अहम बदलाव करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री विजय ने पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में कहा कि अगर मौजूदा स्वरूप में इस योजना को लागू किया गया तो तमिलनाडु पर 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

उन्होंने केंद्र सरकार से योजना की फंडिंग व्यवस्था और संचालन संबंधी दिशानिर्देशों की दोबारा समीक्षा करने का आग्रह किया है। विजय का कहना है कि मौजूदा प्रावधानों के कारण ग्रामीण रोजगार और राज्य की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

5000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कहा, ”मैं ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ [VB-GRAMG] योजना के लागू किए जाने को लेकर आपको लिख रहा हूं। इस योजना के नए फंडिंग मॉडल और इसके सख्त संचालन संबंधी प्रावधानों के कारण राज्य सरकार पर 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।”

विजय ने आगे कहा कि यदि VB-GRAMG अधिनियम, 2025 के कुछ प्रावधानों में केंद्र सरकार बदलाव नहीं करती है तो इस योजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी और सुचारु रूप से लागू करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका सबसे अधिक असर उन ग्रामीण लोगों पर पड़ेगा जो अपनी आजीविका के लिए ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम पर निर्भर हैं।

फंडिंग फॉर्मूले में बदलाव की मांग

सीएम जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में केंद्र व राज्य के बीच फंडिंग के पुराने मॉडल को बहाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नई VB-GRAMG योजना के तहत मजदूरी, निर्माण सामग्री और प्रशासनिक खर्च के लिए 60:40 का केंद्र-राज्य खर्च शेयर करने का प्रावधान किया गया है। विजय का कहना है कि यह व्यवस्था पिछले करीब 20 वर्षों से लागू मनरेगा के फंडिंग सिस्टम से बिल्कुल अलग है।

पत्र में उन्होंने लिखा कि मनरेगा दो दशकों तक एक अलग फंडिंग ढांचे के तहत संचालित होती रही। ऐसे में अचानक यह बदलाव राज्य के खजाने पर असहनीय वित्तीय बोझ डालेगा। इससे या तो ग्रामीणों को मिलने वाले रोजगार के दिनों में कमी आ सकती है या फिर राज्य की अन्य जरूरी कल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि मजदूरी और प्रशासनिक खर्च का 100 फीसदी वहन केंद्र सरकार ही करे जबकि निर्माण सामग्री (मैटेरियल) पर होने वाले खर्च को 75:25 के अनुपात में केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच साझा किया जाए।

उन्होंने पत्र में कहा, ”मैं अनुरोध करता हूं कि मजदूरी और प्रशासनिक मद में 100 प्रतिशत केंद्रीय फंडिंग जारी रखी जाए जबकि मैटेरियल कॉम्पोनेंट का खर्च 75:25 के अनुपात में केंद्र और तमिलनाडु सरकार साझा करें।”

फंड आवंटन के मॉडल पर भी विजय की आपत्ति

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने योजना के तहत गांवों की पंचायतों को फंड आवंटित करने के लिए प्रस्तावित केंद्रीकृत व्यवस्था (centralised methodology) पर भी सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र का यह मॉडल राज्यों के स्थानीय सामाजिक और आर्थिक हालात को नजरअंदाज करता है। पत्र में विजय ने लिखा कि फंड आवंटन की प्रस्तावित केंद्रीकृत व्यवस्था जरूरत से ज्यादा नियंत्रण (माइक्रोमैनेजमेंट) को बढ़ावा देती है। पूरे देश के लिए एक जैसा फॉर्मूला लागू करने से अलग-अलग क्षेत्रों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों की अनदेखी होगी जिससे जमीनी स्तर पर संसाधनों का असंतुलित वितरण हो सकता है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ग्राम पंचायतों के बीच फंड बांटने का तरीका तय करने का अधिकार राज्यों को दिया जाए ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों की स्थानीय जरूरतों और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार संसाधनों का बेहतर वितरण कर सकें ना कि पूरे देश के लिए एक समान मॉडल लागू किया जाए।

महात्मा गांधी के नाम से ही योजना जारी रखने की मांग

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ग्रामीण रोजगार योजना का नाम महात्मा गांधी के नाम पर ही जारी रखने की भी अपील की है। उन्होंने कहा कि इस नाम का ऐतिहासिक महत्व है और लोगों के बीच इसकी अच्छी पहचान और विश्वास बना हुआ है।

अपने पत्र में विजय ने लिखा, ”महात्मा गांधी की विरासत का सम्मान करने और योजना की मूल भावना के अनुरूप जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए इसे महात्मा गांधी के नाम से ही जारी रखा जाए।”

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तमिलनाडु ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में हमेशा अग्रणी राज्यों में रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार उनके सुझाए गए बदलावों पर सकारात्मक विचार करेगी ताकि यह योजना ग्रामीण लोगों को अधिकतम लाभ पहुंचा सके और साथ ही राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी न पड़े।

300 से 450 रुपये तक होगी दिहाड़ी, जानिए आपके राज्य में मिलेगी कितनी मजदूरी

केंद्र सरकार ने मनरेगा की जगह लागू हुए नए ग्रामीण रोजगार कानून के तहत मजदूरों की नई दैनिक मजदूरी दरें जारी कर दी हैं। नए नियम बुधवार (1 जुलाई 2026) से लागू हो गए हैं। इसके तहत राज्यों के हिसाब से मजदूरी 300 रुपये से 409 रुपये प्रतिदिन तय की गई है जबकि सिक्किम की कुछ ग्राम पंचायतों में यह 450 रुपये होगी।