Tamil Nadu News: तमिलनाडु सरकार ने शुक्रवार को बेंगलुरु स्थित केवीएन ग्रुप के चेयरमैन और विजय की रिलीज न हुई आखिरी फिल्म जन नायकन के प्रोड्यूसर के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में राज्य का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया। यह पद कैबिनेट रैंक का होता है और आम तौर पर इस पद पर रहने वाले व्यक्ति को राज्य और केंद्र सरकार के बीच अक्सर जटिल रहने वाले रिश्तों को संभालने की जिम्मेदारी दी जाती है।
मुख्य सचिव एम. साई कुमार की तरफ से जारी सरकारी आदेश में एक साल के लिए इस अस्थायी पद के सृजन को मंजूरी दी गई। नारायण की नियुक्ति की शर्तें और नियम अलग से बताए जाएंगे। इस नियुक्ति की विपक्षी दलों ने तुरंत आलोचना की, न सिर्फ इसलिए कि नारायण राजनीति से बाहर के व्यक्ति हैं, बल्कि इसलिए भी कि टीवीके प्रमुख विजय के साथ उनके नजदीकी संबंध हैं।
प्रतिनिधि दिल्ली और तमिलनाडु के बीच सेतु का काम करता है
यह विशेष प्रतिनिधि नई दिल्ली और तमिलनाडु के बीच एक राजनीतिक कड़ी के तौर पर काम करता है। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के बीच बैठकों में तालमेल बिठाने के अलावा, यह कार्यालय बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं, केंद्रीय फंडिंग, नीतिगत मामलों और संसदीय कामकाज में समन्वय का काम भी देखता है। आम तौर पर राज्य प्रशासनिक कामों के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को ‘रेजिडेंट कमिश्नर’ नियुक्त करते हैं, लेकिन तमिलनाडु में यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील पद पारंपरिक रूप से अनुभवी राजनेताओं के लिए ही रखा जाता रहा है।
इस बार सरकार ने एक बिजनेसमैन को चुना है। नारायण, अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले केवीएन ग्रुप के प्रमुख हैं, जो रियल एस्टेट और एंटरटेनमेंट के कारोबार से जुड़ा है। प्रेस्टीज ग्रुप के पूर्व सीईओ रहे नारायण ने 2020 में केवीएन प्रोडक्शंस की शुरुआत की थी। यह कंपनी अब जन नायकन फिल्म बना रही है, जिसके बारे में माना जा रहा है कि यह फुल-टाइम पॉलिटिक्स में आने से पहले विजय की आखिरी फिल्म होगी।
डीएमके के राज्यसभा सदस्य पी. विल्सन ने कहा कि ऐसे पद पर किसी फिल्म प्रोड्यूसर को नियुक्त करना इस पद की गरिमा को कम करेगा। उन्होंने तर्क दिया कि यह पद केंद्र सरकार के सामने तमिलनाडु के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है, ताकि मंत्रालयों के साथ तालमेल बिठाया जा सके, संसदीय सत्रों के दौरान सांसदों की मदद की जा सके और राज्य व केंद्र के बीच कामकाज सुचारू रूप से चल सके।
बीजेपी ने राज्य की जनता के साथ धोखा बताया
बीजेपी तमिलनाडु के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने सवाल उठाया कि कर्नाटक के करीबी व्यक्ति कैसे नई दिल्ली में तमिलनाडु के हितों का असरदार ढंग से प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। उन्होंने इस फैसले को राज्य की जनता के साथ बड़ा धोखा बताया।
इसी तरह, एआईएडीएमके के आईटी विंग ने भी सवाल किया कि क्या सरकार कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के “प्रॉक्सी” के तौर पर काम कर रही है। वहीं, एएमएमके के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अच्छे शासन को प्राथमिकता देने के बजाय व्यक्तिगत वफादारी को इनाम दे रही है।
टीवीके ने क्या कहा?
हालांकि, सत्ताधारी टीवीके के अंदर इस नियुक्ति को अलग नजरिये से देखा जा रहा है। टीवीके के एक वरिष्ठ नेता ने इस फैसले को सिर्फ आभार जताना बताया। नेता ने कहा, “पार्टी के भीतर इसे कोई फायदेमंद पद नहीं माना जाता है। यह उस व्यक्ति के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका है जो जन नायक से जुड़े सबसे मुश्किल दौर में मुख्यमंत्री के साथ मजबूती से खड़ा रहा। उन्होंने कभी पब्लिसिटी नहीं चाही। वे उनके साथ खड़े रहे।”
नेता के अनुसार, नारायण का बिजनेस बैकग्राउंड और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर व कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स के साथ उनका लंबा जुड़ाव कमजोरी के बजाय फायदेमंद माना गया। मूल रूप से तेलुगु मूल के होने के बावजूद, नारायण ने कई सालों तक कर्नाटक में रहकर काम किया और फिल्म प्रोडक्शन में आने से पहले बेंगलुरु के जाने-माने बिजनेस ग्रुप्स में से एक को खड़ा किया।
यह नियुक्ति नए प्रशासन में उभरते एक पैटर्न को भी दिखाती है। यह तीसरी ऐसी अहम नियुक्ति है जिसमें विजय के करीबी लोग शामिल हैं। इससे पहले, विजय के फिल्म करियर के दौरान उनके मैनेजर रहे जगदीश पलानीस्वामी को प्राइवेट सेक्रेटरी (पॉलिटिकल) नियुक्त किया गया था। वहीं, ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को कुछ समय के लिए ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (पॉलिटिकल) नियुक्त किया गया था, लेकिन आलोचना के बाद यह नियुक्ति वापस ले ली गई थी।
नारायणन सफल होंगे या नहीं, यह शायद सिनेमा की दुनिया से उनके बैकग्राउंड पर कम और नई दिल्ली की नौकरशाही को समझने की उनकी काबिलियत पर ज्यादा निर्भर करेगा, एक ऐसा शहर जहां फिल्में शायद ही कभी फाइलों को आगे बढ़ा पाती हैं, लेकिन रिश्ते अक्सर ऐसा कर देते हैं।
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