TVK Stand on Delimitation: परिसीमन के मुद्दे पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने अपने रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने पहले कहा था कि लोकसभा की सीटों को फ्रीज कर दिया जाए। इसके विपरीत अब गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रत्येक राज्य के संसदीय प्रतिनिधित्व के वर्तमान हिस्से को संरक्षित करने का अनुरोध किया है।
दरअसल, चेन्नई में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में सीएम जोसेफ विजय ने कहा, “मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूं कि वह स्पष्ट विधायी आश्वासन दें कि जनसंख्या में स्थिरता लाने की सफलता के कारण संसद में राज्य के प्रतिनिधित्व के अनुपात में कमी नहीं होगी।”
अमित शाह से क्या बोले विजय?
सीएम जोसेफ विजय ने कहा, “जैसे-जैसे 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के आवंटन पर लगी रोक समाप्त होने वाली है और परिसीमन विधेयक 2026 पर विचार किया जा रहा है, दक्षिणी राज्यों में यह वास्तविक और साझा चिंता है कि मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर परिसीमन संसद में हमारी वर्तमान आवाज को कम कर सकता है।”
पहले विरोध में पास किया था प्रस्ताव
तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय के बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि उन्होंने 12 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में पेश किए गए प्रस्ताव के माध्यम से परिसीमन के प्रति अपने स्पष्ट विरोध से हटकर एक नया रुख अपना लिया है। इसे सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी के लिए झटके के तौर पर देखा जा सकता है, क्योंकि कांग्रेस सीएम विजय की सरकार को समर्थन दे रही है।
कांग्रेस को झटका क्यों?
कांग्रेस की सुप्रीम कमेटी यानी कांग्रेस कार्य समिति ने हाल ही में हुई बैठक में प्रस्ताव पारित किया है कि वह परिसीमन के तहत सीटें बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि मौजूदा 543 सीटों में ही महिला आरक्षण भी लागू किया जाए और उसी के तहत 2029 के लोकसभा चुनाव कराए जाएं।
दूसरी ओर बैठक में मौजूद कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने CWC मीटिंग के प्रस्ताव पर भी अपना रुख बनाए रखा। उन्होंने कहा,”केंद्र सरकार अगले 25 वर्षों के लिए मौजूदा लोकसभा सीटों को बरकरार रखे और उसी के तहत महिला आरक्षण लागू किया।”
डीएमके के लिए सहज स्थिति
टीवीके चीफ और सीएम विजय ने परिसीमन के मुद्दे पर राज्यों के अनुपात में कमी न होने की मांग की और यह संकेत दिया कि अगर ऐसा होता है तो वे इसका विरोध नहीं करेंगे। इसे डीएमके लिए राहत की बात मानी जा रही है क्योंकि डीएमके एनडीए का इस मुद्दे पर साथ देने को कथित तौर पर तैयार भी थी।
हालांकि, राज्य की सियासत और टीवीके के रुख के चलते उसे असमंजस का सामना करना पड़ रहा है। अब जब गृहमंत्री अमित शाह के सामने सीएम विजय ने अपने रुख बदलाव के संकेत दिए हैं, तो डीएमके के लिए परिसीमन के मुद्दे पर एनडीए का समर्थन करना सहज हो सकता है।
यह भी पढ़ें: जातिगत भेदभाव पर यूजीसी के नियम: केंद्र सरकार अपने रुख पर पुनर्विचार क्यों कर रही है?
भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उस समानता नियम पर पुनर्विचार कर रही है जिसे चुनौती दी गई है। नरेंद्र मोदी सरकार फिलहाल इस पूरे विवाद से निकलने की कोशिश कर रही है। एक तरफ वह सामान्य वर्ग को भी नाराज नहीं करना चाहती तो दूसरी तरफ उसे एससी, एसटी और ओबीसी का भी ख्याल रखना है, क्योंकि 1989 से पार्टी के प्रमुख मतदाता वर्ग रहे उच्च जातियों में संभावित “दुरुपयोग” को लेकर आक्रोश के संकेत मिल रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर…
