पंजाब चुनावः NDA के पूर्व सहयोगी SAD बादल लेंगे Mindshare Analytics की सेवाएं, जानें- क्या करती है काम?

दिव्या गोयल की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव प्रबंधन एजेंसियों की फीस 2 करोड़ रुपये तक जा सकती है, लेकिन छोटी कंपनियां प्रति सीट 5 लाख रुपये में काम करने के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इस बार चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सेवाएं नहीं लेने का फैसला किया है। इस बार उनका पोता पूरा चुनावी प्रचार संभाल रहा है।

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सुखबीर सिंह बादल ने माइंडशेयर एनालिटिक्स की सेवाएं लेने का फैसला किया है। (Express photo)

दिव्या गोयल

पंजाब में चुनावी तैयारियां जोरों पर हैं। उम्मीदवारों ने अपनी जीत तय करने के लिए जुगत लगाना शुरू कर दिया है। चुनाव प्रचार की रूपरेखा और कार्ययोजना तय करने के लिए एजेंसियों की मदद ली जा रही है। इस समय पंजाब के चुनावी बाजार में पांच लाख रुपए प्रति सीट से लेकर दो करोड़ रुपए तक के बजट वाली एजेंसियां काम कर रही हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इस बार चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सेवाएं नहीं लेने का फैसला किया है। उनका चुनावी प्रबंधन उनका पोता देख रहा है।

अगले साल की शुरुआत में पंजाब में विधानसभा विधानसभा चुनाव होंगे। इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। बड़े मैनेजमेंट फर्म से लेकर नए स्टार्ट-अप्स तक, चेन्नई से लेकर पलामू तक, उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को प्रचार सेवाएं देने वाली कई एजेंसियां इस समय पंजाब के चुनावी मैदान में हैं।

चाहे बड़े नेता हों या फिर छोटे संभावित उम्मीदवार सभी इन एजेंसियों की सहायता ले रहे हैं या फिर ले चुके हैं। इन एजेंसियों की फीस पांच लाख से दो करोड़ रुपए तक जा सकती है। छोटी कंपनियां प्रति सीट 5 लाख रुपये में काम करने के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इस बार चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सेवाएं नहीं लेने का फैसला किया है। इस बार यह काम उनका पोता देख रहा है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के सुखबीर सिंह बादल ने माइंडशेयर एनालिटिक्स नाम की एजेंसी की सेवाएं लेने का फैसला किया है।

चेन्नई के सुनील कानुगोलु की माइंडशेयर एनालिटिक्स के अलावा, चंडीगढ़ की डिजाइन बॉक्सिंग, बेंगलुरु की पोल मैट्रिक्स कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, पलामू (झारखंड) की कॉग्नेट आरंभ सर्विसेज और गुड़गांव की पॉलिटिकल एज सहित कई अन्य एजेंसियां इस समय पंजाब के चुनावी प्रचार मैदान का मोर्चा संभालने के लिए तैयार हैं।

इन कंपनियों की डील पैकेज में सर्वे, डोर-टू-डोर अभियान, सोशल मीडिया संभालना, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडिटिंग जैसी चीज़ें शामिल हैं। एजेंसी में अंग्रेजी और हिंदी भाषा के अलावा पंजाबी जानने वाले कॉपी राइटर्स को भी भर्ती किया जा रहा है।

खन्ना सीट के एक रियल एस्टेट डेवलपर रूपिंदर सिंह राजा गिल, साहनेवाल से कांग्रेस के टिकट की उम्मीद में हैं। गिल ने अपने कैम्पेन के लिए आरंभ सर्विसेज की सेवाएं ली हैं। कंपनी खन्ना विधायक गुरकीरत कोटली और पायल विधायक लखवीर लक्खा के लिए भी काम कर रही है।

गिल ने कहा कि उन्होंने आरंभ सर्विसेज को काम इसलिए दिया क्योंकि पार्टी ने अभी तक एजेंसी पर कोई फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा, “अगर हम जमीनी काम शुरू करने के लिए पार्टी-स्तरीय एजेंसी की प्रतीक्षा करते रहते हैं तो देरी हो जाती है। बाद में कंपनियों को दोष देने के बजाय अपने स्तर पर तैयारी करना बेहतर है।”

माइंडशेयर एनालिटिक्स ने हाल ही में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के लिए गल पंजाब दी अभियान के साथ चुनावी काम शुरू किया। जिसके तहत पूर्व डिप्टी सीएम ने पूरे पंजाब में यात्रा शुरू कर दी है। अकाली दल की पीआर एंड कम्युनिकेशन टीम के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “कंपनी पार्टी के चुनावी अभियान को समग्र रूप से देखेगी और प्रत्येक उम्मीदवार के साथ सदस्यों को जोड़ेगी। वे तय करेंगे कि किस समुदाय को क्या संदेश देना है। पार्टी ने अभियान गतिविधियों के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक के बजट को अंतिम रूप दिया है, जिसमें इस कंपनी की भर्ती भी शामिल है, और हम उम्मीदवारों से योगदान ले रहे हैं।”

माइंडशेयर एनालिटिक्स अकाली दल के लिए काम कर रही है, जबकि कई अकाली उम्मीदवारों जैसे दाखा से विधायक मनप्रीत सिंह अयाली और मोगा के उम्मीदवार बरजिंदर सिंह माखन बराड़ ने भी अपने स्तर पर कंपनियों को काम पर रखा है।

अमृतसर दक्षिण से कांग्रेस विधायक इंदरबीर सिंह बोलारिया और पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने डिजाइन बॉक्स को अपने चुनावी प्रचार का जिम्मा सौंपा है। वहीं बंगलुरु की कंपनी पोल मैट्रिक्स कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड की सेवाएं छह उम्मीदवार ले रहे हैं। इनमें आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं सहित एक मौजूदा मंत्री भी शामिल हैं।

पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री गुरनाम सिंह अबुलखुराना के बेटे जगपाल सिंह अबुलखुराना को कांग्रेस पार्टी से टिकट की उम्मीद है। एक नेता का कहना है कि मौजूदा समय में प्रचार के पुराने तरीके से चुनाव नहीं जीता जा सकता है। अब के चुनावों में सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा महत्व है। इससे आप युवाओं से जुड़ते हैं और यही युवा आपकी चुनावी तकदीर बनाता है। इसलिए प्रोफेशनल्स की जरूरत तो पड़ेगी।

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