पश्चिम बंगाल में शुभेंदु सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया है। 1 जून को 35 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इसमें 13 कैबिनेट, तीन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 19 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली थी। सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या 40 हो गई है। मंत्रिमंडल विस्तार में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल के हर क्षेत्र को साधने का पूरा प्रयास किया गया है। हालांकि मंत्रिमंडल में उत्तर बंगाल का दबदबा साफ दिख रहा है। उत्तर बंगाल से आने वाले 9 विधायकों को शुभेंदु अधिकारी ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है।
अनुभवी नेताओं को मिली जगह
मंत्रिमंडल में शुभेंदु अधिकारी ने अनुभवी नेताओं को भी जगह दी है। इसमें स्वप्नदास गुप्ता, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, गौरी शंकर घोष, कल्याण चक्रवर्ती जैसे दिग्गज नेताओं का नाम शामिल है। स्वप्नदास गुप्ता पूर्व में राज्यसभा सांसद और मशहूर पत्रकार रह चुके हैं। माना जा रहा है कि सरकार में पॉलिसी मेकिंग का काम स्वप्नदास गुप्ता की देखरेख में हो सकता है। वहीं जगन्नाथ चट्टोपाध्याय अनुभवी और संगठनात्मक कौशल वाले नेता माने जाते हैं। दक्षिण बंगाल में पार्टी के लिए लंबे समय से जगन्नाथ चट्टोपाध्याय काम कर रहे हैं। कल्याण चक्रवर्ती कृषि जैसे अहम मुद्दों पर काफी मुखर रहे हैं और उनका पूरा फोकस गांव के विकास पर रहता है।
शुभेंदु सरकार में बंगाल के दिग्गज नेता अर्जुन सिंह और तापस रॉय को भी जगह मिली है। अर्जुन सिंह ट्रेड यूनियन के नेता के तौर पर जाने जाते हैं। कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेता थे। अर्जुन सिंह बंगाल की नौपारा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। 2018 तक टीएमसी के नेता रहे अर्जुन सिंह 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी से जीते थे। 2021 में जब बंगाल में फिर से ममता बनर्जी की सरकार बनी तो उन्होंने फिर टीएमसी को ज्वाइन कर लिया। हालांकि 2024 में जब उन्हें टीएमसी ने लोकसभा का टिकट नहीं दिया फिर उन्होंने बीजेपी का दामन थामा। अर्जुन सिंह ने बैरकपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा हालांकि हार नसीब हुई। इसके बाद 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी ने टिकट दिया और उन्होंने जीत हासिल की। अब अर्जुन सिंह बंगाल सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
वहीं तापस रॉय के पास बंगाल की राजनीति का दशकों का अनुभव है। 2021 तक उन्होंने टीएमसी से लगातार जीत हासिल की थी। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें भाजपा का दामन थामा था और अब बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए हैं और शुभेंदु सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली है।
उत्तरी बंगाल को तरजीह
शुभेंदु सरकार में उत्तरी बंगाल से आने वाले मनोज कुमार ओरांव, शंकर घोष, दीपक बर्मन, निशीथ प्रमाणिक, विराज विश्वास, कौशिक चौधरी बिशाल लामा, आनंदमय बर्मन और मालती रॉय को मंत्री बनाया गया है। उत्तर बंगाल बीजेपी का पिछले करीब 10 सालों से गढ़ बना हुआ है। 2019 के लोकसभा चुनाव, 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उत्तर बंगाल में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया था।
दार्जिलिंग लोकसभा से आने वाले दो विधायकों को शुभेंदु सरकार में शामिल किया गया है। दोनों अनुभवी नेता हैं। सिलीगुड़ी से विधायक शंकर घोष को मंत्री बनाया गया है। शंकर घोष सीपीएम से बीजेपी में शामिल हुए थे। शंकर घोष 2021 में भी विधायक बने थे और इस बार भी 73 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की है। वहीं आनंदमय बर्मन को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। एक ही लोकसभा से दो मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल करने का मतलब है शुभेंदु दार्जिलिंग और वहां के मुद्दों का समाधान चाहते हैं। दार्जिलिंग लोकसभा सीट से बीजेपी लगातार 2009 के लोकसभा चुनाव से बड़े अंतर से जीत रही है।
आदिवासी समुदाय से आने वाले नेताओं को मिली जिम्मेदारी
मंत्रिमंडल में शुभेंदु अधिकारी ने आदिवासी नेताओं को भी जगह दी है। मालती रॉय, राजेश महतो, जेएल मुर्मू जैसे नेताओं को मंत्री बनाया गया है। राजेश महतो पिछड़े समुदाय के प्रमुख नेता हैं और अपने दम पर अपना राजनीतिक आधार बनाया है। तो वहीं मालती रॉय उत्तर बंगाल की प्रमुख आदिवासी महिला नेताओं में से एक हैं। महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर वह लगातार काम कर रही हैं। वहीं आदिवासी अधिकारियों के लिए लड़ने वाले जेएल मुर्मू को भी राज्य मंत्री बनाया गया है।
गोरखाओं को साधा
दार्जिलिंग कैसे पहाड़ी क्षेत्र से आने वाले बिशाल लामा को भी शुभेंदु अधिकारी सरकार में जगह मिली है। उन्हें राज्य मंत्री बनाया गया है। विशाल लामा पहाड़ी क्षेत्र में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में से एक है और गोरखा समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं।
महिलाओं को मिली अहम जिम्मेदारी
शुभेंदु सरकार में सात महिलाओं को जगह मिली है। अग्निमित्रा पॉल को पहले ही कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। वहीं 1 जून को 6 महिला विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसमें मालती रॉय, मौमिता विश्वास मिश्रा, पूर्णिमा चक्रवर्ती, गार्गी दास घोष, सुमन सरकार और कलिता माझी शामिल हैं। कलिता माझी वही महिला हैं जो पहले दूसरों के घरों में बर्तन मांजने का काम करती थी। अब वह बंगाल सरकार की माननीय मंत्री बन गई हैं। कलिता माझी का जीवन काफी संघर्ष भरा रहा है। दूसरों के घरों में काम कर ₹4000 महीने कमाने वाली कलिता माझी अब बंगाल की मंत्री हैं। कलिता माझी ने औसग्राम विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी।
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विधानसभा चुनावों में हार के बाद टीएमसी में राजनीतिक उथल-पुथल मची है। अब ममता बनर्जी ने उन्होंने अपनी पार्टी के दलबदलुओं पर निशाना साधते हुए ‘गिरगिट’ शीर्षक से एक व्यंग्यात्मक कविता लिखी है। पढ़ें पूरी खबर
