तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रदेश की राजधानी चेन्नई में परिसीमन विधेयक के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सांसदों की एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया और राज्य के संसदीय प्रतिनिधित्व पर इसके असर को लेकर तमिलनाडु की चिंताओं पर चर्चा की गई।
इसमें अलग-अलग पार्टियों के सांसद शामिल हो रहे हैं। DMK, AIADMK और PMK ने TVK सरकार द्वारा बुलाई गई चर्चा में शामिल होने का विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है।
क्यों बुलाई गई थी यह बैठक?
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, जोसेफ विजय ने केंद्र की प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर राज्य की ओर से एक साझा रुख तय करने के लिए यह बैठक बुलाई थी क्योंकि इस विधेयक को लेकर चिंता जताई गई थी कि इससे दक्षिणी राज्यों की संसदीय सीटों की संख्या कम हो सकती है।
ऐसे में उनकी बैठक में प्रदेश के 57 सांसदों में से केवल 20 ही शामिल हुए है, जबकि 32 सांसदों ने बैठक से दूर रहने का फैसला किया। इस राजनीतिक घटना से मुख्यमंत्री की इस पहल पर प्रदेश के दलों के बीच आम सहमति न होने का संकेत मिलता है।
इस मीटिंग के बाद सरकार के सहयोगी दल VCK के अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन ने कहा, “इस बैठक में सिर्फ एक प्रस्ताव पास किया गया है कि कोई निष्पक्ष परिसीमन या कोई दूसरा विकल्प नहीं है। केंद्र सरकार को 543 की संख्या को फ्रीज कर देना चाहिए, और हमने एक प्रस्ताव पास किया है कि राज्यों में भी सीटों की संख्या को बनाए रखा जाए।”
कौन-सी पार्टियां शामिल हुई?
मौजूद लोगों की जानकारी के मुताबिक, बैठक में शामिल होने वाले 20 सांसद अधिकतर कांग्रेस और उसके छोटे सहयोगियों से हैं। कांग्रेस के 12 सांसद मौजूद हैं, जबकि VCK, CPI और CPI(M) के दो-दो सांसद हैं, और MDMK और IUML का एक-एक सांसद है।
किस पार्टी ने बनाई बैठक से दूरी?
इस बीच, विपक्षी पार्टी DMK ने इस बैठक का बहिष्कार किया है और उसके सभी 30 सांसद मीटिंग से दूर रहे। प्रदेश की अन्य विपक्षी पार्टी AIADMK ने भी इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी जिस कारण उसके भी चार सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके अलावा, PMK, MNM और DMDK ने भी इसका बहिष्कार किया है, इन पार्टियों के पास एक-एक सांसद हैं, जो शामिल नहीं हुए।
बैठक में शामिल न होने वाले विपक्षी सांसदों ने इसे TVK सरकार पर कावेरी जल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र सरकार बिल को पास कराने की नई कोशिश कर रही है और ऐसी अटकलें लगाई जा रही है कि वह आगामी मॉनसून सत्र में इस कानून को सदन में फिर से पेश कर सकती है।
विपक्ष ने किया बहिष्कार
इस बहिष्कार की अगुवाई मुख्य रूप से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि DMK के सभी 32 सांसद बैठक में शामिल नहीं होंगे।
DMK सांसद कनिमोझी ने कहा, “32 सांसदों ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया और परिसीमन पर मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई आज की बैठक के नतीजे के बारे में अभी कोई स्पष्टता नहीं है। सांसदों की यह बैठक तमिलनाडु में मेकेदातु बांध के मुद्दे से ध्यान भटकाने के मकसद से बुलाई गई है।”
आगे उन्होंने कहा, “हम परिसीमन के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं। हम निष्पक्ष परिसीमन की मांग कर रहे हैं। चुनाव के दौरान, DMK अध्यक्ष और तत्कालीन CM एमके. स्टालिन ने भी साफ कर दिया था कि चुनावी जीत से कहीं अधिक जरूरी तमिलनाडु की रक्षा करना है। चुनाव जीतने से अधिक, हमें तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा करनी है। यही हमारा और हमारे नेता का मकसद है। विपक्ष का आरोप है कि तमिलनाडु सरकार के मुख्य सचिव TVK मुख्यालय के सचिव की तरह काम कर रहे हैं और सीधे सांसदों को फोन करके बैठक में शामिल होने के लिए पत्र भेज रहे हैं।”
कनिमोझी ने आगे यह भी कहा कि सदन के मौजूदा सत्र में परिसीमन बिल पेश करने के बारे में केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि संशोधित ड्राफ्ट ही उपलब्ध नहीं है, इसलिए चर्चा के लिए कोई नई बात नहीं है।
जानकारी दे दें कि कावेरी विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर दशकों पुराना झगड़ा है। फिलहाल यह मुद्दा कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वॉयर परियोजना के कारण चर्चा में है, जिसका तमिलनाडु ने विरोध किया है। विजय ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों के बीच बातचीत का प्रस्ताव रखा है।
DMK और AIADMK पर बरसी कांग्रेस
इस बैठक का DMK और AIADMK द्वारा बहिष्कार किए जाने पर, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने बहिष्कार किया। पहली बार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने सभी पार्टियों के सांसदों के साथ बैठक बुलाई है… हमने परिसीमन योजना पर चर्चा की, जिसे 16 अप्रैल को खारिज कर दिया गया था। तमिलनाडु ने पूरी तरह से इसके खिलाफ वोट किया था, और इसलिए परिसीमन प्रस्ताव गिर गया था।
आगे मणिक्कम टैगोर ने कहा, “अब, मुख्यमंत्री दिल्ली में कह रहे हैं कि सरकार बदली हुई योजनाओं के साथ परिसीमन ला सकती है। हमने इस पर चर्चा की। बैठक में यह तय किया गया कि परिसीमन की कोई जरूरत नहीं है। 543 सांसदों की संख्या बढ़ाई नहीं जानी चाहिए। तमिलनाडु के 39 सांसदों की संख्या कम नहीं होनी चाहिए। यथास्थिति बनी रहनी चाहिए और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।”
सरकार के सहयोगी दल MDMK के प्रिंसिपल सेक्रेटरी और सांसद दुरई वाइको ने भी विपक्ष के बायकॉट को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि DMK और AIADMK जैसी विपक्षी पार्टियों ने इस अहम जरूरी बैठक का बहिष्कार किया है क्योंकि अगर यह परिसीमन संशोधन बिल पास हो जाता है, तो इससे तमिलनाडु के हितों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। 39 सांसद होने के बावजूद, हमें फाइनेंस के मामले में अपना उचित हिस्सा नहीं मिल पा रहा है।
आगे उन्होंने कहा, “अगर यह परिसीमन बिल पास हो जाता है, तो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे सभी दक्षिणी राज्यों को नुकसान होगा क्योंकि यह आबादी पर आधारित है। क्या आपको लगता है कि परिसीमन आयोग तमिलनाडु के हित में काम करेगा? यह 50% आनुपातिक बढ़ोतरी BJP सरकार की एक तरह की चाल है। भले ही वे यह 50 प्रतिशत दे दें, लेकिन संविधान के अनुसार इसे वापस ले लिया जाएगा। परिसीमन आयोग ही इस बारे में सभी महत्वपूर्ण फैसले लेने वाला है।”
यह भी पढ़ें: मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पत्नी ने वापस ली तलाक की अर्जी, कोर्ट ने बंद किया केस
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पत्नी संगीता ने तलाक की अर्जी वापस ले ली है। उन्होंने तलाक के लिए चेंगलपट्टू कोर्ट में दायर की गई अपनी याचिका वापस ले ली और कहा कि वह इस मामले को और आगे नहीं बढ़ाना चाहती हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
