तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में अपने विवादित जॉ जेस्चर (विवादित इशारे) को लेकर सफाई दी। मंगलवार को उन्होंने हा कि भाषण के दौरान उनका यह हावभाव अनजाने में हुआ था और उनका मकसद किसी की व्यक्तिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
आपको बता दें कि 7 सितंबर को विधानसभा में दिए गए भाषण के दौरान विजय द्वारा किए गए इशारे के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हुई। इसके एक दिन बाद ही विजय की तरफ से सफाई आई है। इस भाषण में उन्होंने कथित भ्रष्टाचार को लेकर मुख्य विपक्षी दल डीएमके पर निशाना साधा था। इसी दौरान विजय एक हाथ से अपना जबड़ा पकड़कर उसे ऊपर उठाने जैसा इशारा करते नजर आए थे।
इस विवाद पर सफाई देते हुए विजय ने कहा, ”मेरी बॉडी लैंग्वेज एक अनैच्छिक अभिव्यक्ति थी। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह किसी भी तरह जानबूझकर नहीं किया गया था।”
उन्होंने आगे कहा, ”इसलिए मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि इसे किसी की व्यक्तिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए कृत्य के तौर पर ना देखा जाए।”
विजय के इशारे पर क्यों हुआ विवाद?
विजय का एक हाथ से अपना जबड़ा पकड़कर उसे ऊपर उठाने जैसा इशारा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। कुछ लोगों ने दावा किया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री इस इशारे के जरिए डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन का मजाक उड़ा रहे थे।
इस दावे को उन चर्चाओं से जोड़ा गया जिनमें कहा जाता है कि 1975 से 1977 के बीच आपातकाल के दौरान जेल में रहने के दौरान स्टालिन के जबड़े में चोट लगी थी। हालांकि, स्टालिन को हिरासत के दौरान वास्तव में ऐसी चोट लगी थी या नहीं, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
तमिलनाडु विधानसभा में विजय ने क्या कहा?
यह इशारा 7 सितंबर को राज्य विधानसभा में विजय के भाषण के दौरान हुआ। उस वक्त वह कथित भ्रष्टाचार को लेकर डीएमके पर निशाना साध रहे थे।
विजय के आरोपों का आधार प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आधिकारिक दस्तावेज और 1970 के दशक में सामने आई सरकारिया आयोग की रिपोर्ट थी। बाद में विजय की बॉडी लैंग्वेज खुद एक अलग मुद्दा बन गई और जबड़े को लेकर किए गए इस इशारे ने सोशल मीडिया पर खासा ध्यान खींचा।
CM विजय के भाषण पर बीजेपी का तंज, बोले- विधानसभा स्टूडियो नहीं
तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख और पूर्व मंत्री नैनार नागेंद्रन ने सोमवार को टीवीके सरकार और सीएम विजय की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सीएम को तमिलनाडु में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी, जनता की सुरक्षा के लिए नई योजनाएं पेश करनी चाहिए थीं और लोगों की जान-माल की सुरक्षा की गारंटी देनी चाहिए थी। इसके बजाय आपने असभ्य राजनीति की।
