Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जनवरी में आई-पैक के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर ईडी की छापेमारी में बाधा डालने के लिए कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि उनके कार्यों ने लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया।

जस्टिस पीके मिश्रा और एनवी अंजारी की पीठ ने कहा, “यह राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है। किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री जांच के बीच में आकर लोकतंत्र को खतरे में नहीं डाल सकता और फिर यह नहीं कह सकता कि इसे राज्य और केंद्र के बीच का विवाद न बनाएं। यह अपने आप में एक ऐसा कृत्य है जो मुख्यमंत्री द्वारा पूरे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए किया गया है।”

न्यायालय ने आगे कहा कि देश के कानून के दिग्गज भी ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं कर सकते थे। कोर्ट ने कहा, “आपने हमें केशवानंद भारती और सीरवाई के बारे में बताया है। लेकिन उनमें से किसी ने भी इस स्थिति की कल्पना नहीं की होगी कि इस देश में एक दिन ऐसा भी आएगा जब एक मौजूदा मुख्यमंत्री किसी अन्य एजेंसी के कार्यालय में जाएगा।”

क्या है पूरा विवाद?

ईडी ने जनवरी में पश्चिम बंगाल और दिल्ली में 10 परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह अनुप मजी के नेतृत्व में कथित तौर पर चल रहे कोयला तस्करी गिरोह से जुड़े धन शोधन की जांच के सिलसिले में था। तलाशी में आई-पैक का ऑफिस और टीएमसी के प्रमुख रणनीतिकार प्रतीक जैन का आवास शामिल था।

जब ईडी प्रतीक के आवास पर छापेमारी कर रही थी, तभी ममता बनर्जी अचानक सुरक्षाकर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गईं। इससे केंद्रीय अधिकारियों के साथ तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि उन्होंने दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत ले लिए।

बनर्जी का कहना है कि ये दस्तावेज और आंकड़े उनकी राजनीतिक पार्टी से संबंधित हैं और उन्होंने एजेंसी पर उन्हें और तृणमूल कांग्रेस को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने छापों को राजनीतिक प्रतिशोध का एक घिनौना प्रयास बताया और कोलकाता में एक विशाल राजनीतिक मार्च का नेतृत्व भी किया।

एजेंसी का कहना है कि तलाशी पूरी तरह से सबूतों पर आधारित है और किसी भी राजनीतिक प्रतिष्ठान या पार्टी कार्यालय को निशाना नहीं बना रही है। कलकत्ता हाई कोर्ट से तत्काल राहत न मिलने के बाद ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। यहां उसने बनर्जी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों की कथित तौर पर कोलकाता में छापेमारी में बाधा डालने की भूमिका की सीबीआई जांच की मांग की थी।

ED ने I-PAC के निदेशक ऋषि राज को भेजा समन

केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने हवाला से जुड़े लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में राजनीतिक दलों के लिए चुनावी मैनेंजमैंट करने वाली कंपनी आईपैक को हाल के दिनों में लगातार झटके लग रहे हैं। अब इसी केस में आईपैक के निदेशक ऋषि राज सिंह को समन भेजा है और 20 अप्रैल को दिल्ली में पेश होने के लिए तलब किया है। पढ़ें पूरी खबर…