‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’, के नारे से गूंजने वाला पंजाब इन दिनों एक राजनीतिक और धार्मिक विवाद के कारण उबल रहा है। सूबे के मुखिया भगवंत मान का होने का दावा करने वाले एक वायरल वीडियो को लेकर पंजाब की धार्मिक सिख संस्थाएं और लगभग सभी विपक्षी राजनीतिक दल एक मंच पर आ गए हैं।
राजनीतिक दलों का कहना है कि भगवंत मान को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। सीएम भगवंत मान ने ‘बेअदबी’ के आरोपों को उनके खिलाफ साजिश बताया है और कहा है कि राजनीतिक विरोधी उन्हें बदनाम करने पर तुले हैं।
राज्य में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर निश्चित रूप से मुश्किल में है क्योंकि अगर वह भगवंत मान से इस्तीफा देने के लिए कहती है तो नए मुख्यमंत्री की अगुवाई में चुनाव लड़ना और जीतना बेहद मुश्किल साबित हो सकता है।
पंजाब के विधानसभा चुनाव में अब पांच-छह महीने का ही वक्त बचा है। इससे पहले यह मुद्दा मान सरकार के लिए मुसीबत और विपक्ष के राजनीतिक संजीवनी लाता हुआ दिख रहा है। इस मामले में राजनीतिक दलों के अलावा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भी भगवंत मान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर चुकी है।
भगवंत मान पर सीधा आरोप है कि उन्होंने ‘बेअदबी’ की है यानी सिख गुरुओं का अपमान किया है।
2017 के चुनाव में क्या हुआ था?
पंजाब में 58 से 60% सिख आबादी है। राज्य में धर्म कितना बड़ा मुद्दा है और इसका राजनीति पर कितना असर होता है, इसके लिए 2017 के विधानसभा चुनाव के नतीजों की ओर देखना होगा।
2017 के विधानसभा चुनाव में श्री गुरु ग्रंथ साहब की ‘बेअदबी’ का मामला जोर-शोर से उठा था और इसका इतना बड़ा राजनीतिक असर हुआ था कि उस वक्त पंजाब में सरकार चला रही शिरोमणि अकाली दल-भाजपा सरकार की सत्ता से विदाई हो गई थी। इसके पीछे वजह 2015 में हुई ‘बेअदबी’ की घटनाएं हैं।
साल 2015 में फरीदकोट जिले के गांव बरगाड़ी के एक गुरुद्वारे में श्री गुरु ग्रंथ साहब की ‘बेअदबी’ का मामला सामने आया था। इस मामले में पंजाब उबल गया था। ना सिर्फ पंजाब में रहने वाले बल्कि दुनिया के देशों में बसे सिखों और पंजाबियों ने इसे लेकर गहरी नाराजगी जताई थी। यह कानून व्यवस्था के लिहाज से बड़ा मुद्दा बन गया था और इस मामले में पूरे पंजाब में जोरदार प्रदर्शन हुए थे।
ऐसे ही एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बहिबल कलां गांव में फायरिंग कर दी थी। इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी जबकि कोटकपुरा में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे।
ऐसे में अगर हम 2017 के चुनाव नतीजों को देखें तो समझ आता है कि पंजाब में धार्मिक विवाद का कितना बड़ा राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
मान को घोषित किया खालसा-पंथ विरोधी
भगवंत मान सरकार पर यह आरोप लगा है कि उसने पैसे देकर वायरल वीडियो को लेकर फर्जी रिपोर्ट तैयार करवाई। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने वायरल वीडियो की जांच करवाई और इसके बाद उन्हें गुरु दोखी और खालसा-पंथ विरोधी घोषित कर दिया।
अकाल तख्त ने इस बात को लेकर भी भगवंत मान सरकार से नाराजगी जताई है कि उसने जागत जोत गुरु ग्रंथ साहब सत्कार (संशोधन) अधिनियम को लेकर सिख संस्थाओं से विचार-विमर्श नहीं किया। सिख धार्मिक संस्थाओं का कहना है कि मान सरकार सिखों के धार्मिक मामलों में दखल दे रही है।
मान के समर्थन में उतरी पार्टी, सरकार
आम आदमी पार्टी की पूरी इकाई और पंजाब सरकार भगवंत मान के बचाव में है। उनका कहना है कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है और इसमें दिख रहा शख्स भगवंत मान नहीं है।
वायरल वीडियो के जरिये दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ‘बेअदबी’ की है लेकिन दूसरी ओर आम आदमी पार्टी की ओर से भी एक वीडियो जारी किया गया है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि एक शख्स ने भगवंत मान का मास्क पहना हुआ है और पैसे देकर यह वीडियो बनवाया गया है। मान सरकार का कहना है कि वह इस पूरी कथित साजिश का पर्दाफाश करेगी।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
भगवंत मान ने सिख गुरुओं का अपमान करने के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है और कहा है कि इस पूरे विवाद में उन्हें राजनीतिक निशाना बनाया जा रहा है। मान ने कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए धर्म का सहारा लिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के लिए इन आरोपों का मुकाबला करना आसान नहीं है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है और विपक्षी राजनीतिक दलों और आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया वॉरियर्स आमने-सामने हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मुद्दे का इतना राजनीतिक असर होगा कि आम आदमी पार्टी के लिए पंजाब की सत्ता में वापसी करना मुश्किल हो जाएगा? आम आदमी पार्टी इस वायरल वीडियो विवाद को भगवंत मान के खिलाफ साजिश बताने के लिए पूरा जोर लगा रही है लेकिन दूसरी ओर विपक्षी दल और सिख संस्थाओं ने मान को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
अगर यह विवाद जारी रहा और राजनीतिक दल, सिख धार्मिक संगठन और संस्थाएं भगवंत मान के खिलाफ मुखर रहीं तो आम आदमी पार्टी को सिख मतदाताओं के मामले में राजनीतिक नुकसान हो सकता है हालांकि सीएम मान और आम आदमी पार्टी दावा करते हैं कि वे पंजाब में फिर से सरकार बनाएंगे।
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पंजाब के साल 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद से आम आदमी पार्टी के नेता और मुख्यमंत्री भगवंत मान का राजनीतिक कद काफी बढ़ गया था। वे इतने अलग-थलग कभी नहीं थे, जितने पिछले कुछ हफ्तों से दिख रहे हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
