क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को 14 मार्च 2026 को जोधपुर जेल से रिहा किया गया था। इसके बाद वह लद्दाख स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स में काम पर लौट आए हैं। उन्होंने लद्दाख लौटने को सामान्य जीवन में धीमी गति से वापसी कहा। हालांकि उन्होंने बताया कि उनके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट फोन और कंप्यूटर उन्हें वापस नहीं किए गए हैं।

एक वीडियो मैसेज में, वांगचुक ने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि पिछले 6 महीने परीक्षा के रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि क्रोध और कड़वाहट उस उद्देश्य को पूरा करने में मदद करेंगे जिसके लिए मैं लड़ रहा था। खासकर तब जब सरकार अपने रिहाई आदेश में रचनात्मक, सार्थक संवाद के लिए आपसी विश्वास बनाने की बात करती है।” उन्होंने यह भी कहा कि इसे गलतियों की स्वीकृति और उन्हें सुधारने के इरादे के रूप में देखना और सकारात्मक रहना सबसे अच्छा है।

सार्थक संवाद को पटरी से नहीं उतारना चाहता- वांगचुक

सोनम वांगचुक ने अपने बयान में कहा, “इस कठिन परिस्थिति के बारे में मुझे बहुत कुछ कहना है लेकिन फिलहाल मैं इस सार्थक संवाद को पटरी से नहीं उतारना चाहता क्योंकि अगर मेरा मकसद नाकाम हो जाता है तो वह जीत नहीं सकते।” उन्होंने आगे कहा कि उनका संघर्ष सरकार को संविधान की छठी अनुसूची के तहत लद्दाख की रक्षा करने और इस क्षेत्र में लोकतंत्र बहाल करने के अपने वादे को पूरा करने के लिए मजबूर करना है।

क्लाइमेट एक्टिविस्ट ने कहा, “हम वार्ता के अगले दौर का इंतजार कर रहे हैं यह देखने के लिए कि क्या लद्दाख में एक नई सुबह आएगी। कृपया अपना बहुमूल्य समर्थन जारी रखें।” उन्होंने एचआईएएल और एसईसीएमओएल के परिसर में छात्रों के साथ सत्र भी शुरू कर दिए हैं। लद्दाख स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स का नेतृत्व सोनम अपनी पत्नी गीतांजलि आंगमो के साथ करते हैं।

6 महीने जोधपुर जेल में रहे थे सोनम वांगचुक

सितंबर 2025 में लेह में हिंसा भड़कने के बाद से केंद्रीय गृह मंत्रालय और लद्दाख के सामाजिक-राजनीतिक नेतृत्व, सर्वोच्च निकाय लेह और कारगिल लोकतांत्रिक गठबंधन के बीच वार्ता ठप्प पड़ी है। इस हिंसा में पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया और 6 महीने के लिए जोधपुर जेल में रखा गया।

अरविंद केजरीवाल की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जनवरी में निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें