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उड़ी हमले में पाक का हाथ होने के पर्याप्त सबूत: सेना

सेना ने रविवार को कहा कि उसके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि उड़ी में उसके शिविर पर हमला करने वाले छह आतंकवादी लश्कर ए तैयबा से जुड़े थे, उन्हें पाकिस्तानी प्रतिष्ठान का समर्थन प्राप्त था और उन्हें इस तरह के अभियान के लिए उच्च प्रशिक्षण दिया गया था। सेना ने यह भी […]
Author December 8, 2014 08:41 am
विधानसभा चुनाव से पहले दहशत पैदा करने के मकसद नागरिक लक्ष्यों को निशाना बनाने की फिराक में थे। (फोटो: भाषा)

सेना ने रविवार को कहा कि उसके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि उड़ी में उसके शिविर पर हमला करने वाले छह आतंकवादी लश्कर ए तैयबा से जुड़े थे, उन्हें पाकिस्तानी प्रतिष्ठान का समर्थन प्राप्त था और उन्हें इस तरह के अभियान के लिए उच्च प्रशिक्षण दिया गया था। सेना ने यह भी कहा कि मारे गए आतंकवादी जम्मू कश्मीर में मंगलवार को होने वाले तीसरे चरण के विधानसभा चुनाव से पहले दहशत पैदा करने के मकसद नागरिक लक्ष्यों को निशाना बनाने की फिराक में थे।

सेना की 15वीं कोर के जनरल आफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा ने यहां संवाददाताओं से कहा- मारे गए आतंकवादियों से मिले जीपीएस से पता चलता है कि वे नियंत्रण रेखा के दूसरी तरफ झेलम नदी के उत्तर में एक जगह इकट्ठा हुए थे। एक घुसपैठ तूट मारी गली (नौगाम सेक्टर) और एक घुसपैठ उड़ी सेक्टर में हुई। मैं कुछ स्पष्ट कारणों से सटीक जगह का खुलासा नहीं कर रहा। उन्होंने नौगाम और उड़ी सेक्टर की घटनाओं को नियमित घुसपैठ मानने से इनकार कर दिया।

नौगाम सेक्टर में मुठभेड़ में छह आतंकवादी मारे गए थे जबकि एक जेसीओ शहीद हो गया था। जनरल साहा ने चुनाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोमवार को प्रस्तावित श्रीनगर यात्रा का जिक्र करते हुए कहा- यह कहना कि यह नियमित घुसपैठ थी, अनुचित होगा। जिस क्रम से घटनाएं हुईं, इसमें शामिल आतंकवादियों की संख्या और जिस स्तर के प्रशिक्षण से वे गुजरे, उन सभी बातों पर गौर करने से लगता है कि यह कोई साधारण घुसपैठ नहीं थी। यह व्यापक घटनाक्रम से जुड़ा था जो यहां हो रहा है।

उड़ी सेक्टर के मोहरा में शुक्रवार तड़के सैन्य शिविर पर आतंकवादी हमले में आठ सैनिकों समेत ग्यारह सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे लेकिन सेना ने सभी छह आतंकवादियों को मार गिराया।

ये आतंकवादी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से घुस आए थे।

जनरल साहा ने कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि हमलावरों को पाकिस्तानी प्रतिष्ठान का समर्थन हासिल था और यह हमला व नियंत्रण रेखा के पास हुई अन्य घटनाएं पूरे तालमेल से अंजाम दी गईं। उन्होंने कहा- हमारे पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि दोनों समूह लश्कर ए तैयबा से जुड़े थे। उनके पास जो आयुध या अन्य चीजें थीं चाहे वह खाद्य सामग्री, दवाइयां, कपड़े आदि हों, उनके निशान संकेत करते हैं कि वे पाकिस्तान में बने थे या पाकिस्तान मूल के थे। आतंकवादी अत्याधुनिक उपकरणों से लैस थे और उनके पास कई दिनों तक के लिए भोजन था।

उन्होंने कहा कि नवंबर में हुई घटनाएं संकेत करती है कि कश्मीर में चल रही चुनाव प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने के लिए नियंत्रण रेखा के पार से समन्वित प्रयास किया गया। इस महीने के पहले हफ्ते उड़ी समेत दो अभियानों में मारे गए आतंकवादियों के बारे में कहा कि इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है कि आतंकवादी उच्च प्रशिक्षण प्राप्त थे। टीएमजी घुसपैठ ज्यादा ऊंचाई वाले और बर्फीले क्षेत्र में हुई। ऐसी स्थिति में घुसपैठ के लिए किसी के भी पास उच्च स्तर की शारीरिक दक्षता होनी चाहिए। दूसरा, मोहरा का अभियान- आतंकवादियों ने पैदल झेलम को पार किया, और उसके लिए भी निश्चित ही उच्च स्तर का प्रशिक्षण जरूरी है। मैं कहूंगा कि ये आतंकवादी विशेष अभियान चलाने में माहिर थे।

इस बीच, जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य में सोमवार को अपनी पहली चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंच रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेना के बदामी बाग मुख्यालय जाकर शुक्रवार को उड़ी में आतंकवादी हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देंगे। भाजपा की प्रदेश इकाई के एक नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री यहां चुनावी रैली को संबोधित करने से पहले बदामी बाग में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देंगे।

 

 

 

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