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विशेष: डम-डम बोल रहा है काशी

शास्त्रीय कलाकार सुबह-शाम तीन से चार घंटे तक एक विशेष तरह की धुन बजाते हैं। उनकी नजर में यह ‘कोरोनामोचन’ के लिए उनकी एक तरह की संगीत साधना है।

कोरोनामोचन के लिए काशी का संगीत।

संगीत को साधना के साथ एक तरह का प्रण भी माना गया है। एक ऐसा प्रण जिसमें लोककल्याण की भावना हो। काशी के पुराने संगीत आचार्यों की यह सीख आज वहां के संगीतकारों की कोरोना महामारी के खिलाफ एक उम्मीद से भरी सांगीतिक मुहिम के तौर पर सामने आई है। यहां के कई शास्त्रीय कलाकार सुबह-शाम तीन से चार घंटे तक एक विशेष तरह की धुन बजाते हैं। उनकी नजर में यह ‘कोरोनामोचन’ के लिए उनकी एक तरह की संगीत साधना है।

उनकी इस धुन में सितार और तबले के साथ भगवान शिव के वाद्य डमरू को भी शामिल किया गया है। काशी का संगीत की दुनिया में बड़ा नाम है। कोरोना के खिलाफ इस संगीत साधना से जुड़े कलाकारों को लगता है कि उनकी यह साधना जरूर सफल होगी। उनका यह प्रण भी है कि वे तब तक अपनी इस संगीत साधना को जारी रखेंगे जब तब कोरोनामुक्ति की उनकी मुराद पूरी नहीं हो जाती।

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