दिल्ली के सरकारी स्कूलों के छात्रों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने संबंधी अदालत के पूर्व आदेश का अनुपालन नहीं करने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।

अदालत ने गैर सरकारी संगठन सोशल जूरिस्ट की जनहित याचिका पर नोटिस जारी करते हुए सुनवाई 30 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी। याचिकाकर्ता संगठन की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने अदालत को सूचित किया कि हाई कोर्ट के सामने दिल्ली सरकार द्वारा स्पष्ट आश्वासन दिए जाने के बावजूद कक्षा एक से आठ तक में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने के बाद भी पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं।

हाई कोर्ट में इस मामले को लेकर अवमानना याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने देरी को लेकर नाराजगी जताई और पूछा कि आखिर इतने बड़े स्तर पर किताबें बांटने में इतनी देर क्यों हो रही है।

दिल्ली सरकार ने न्यायालय को बताया कि शहर के सभी सरकारी स्कूलों के छात्रों को ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने से पहले वर्तमान शैक्षणिक सत्र की पाठ्यपुस्तकें मिल जाएंगी।

किताबों के लिए तरस रहे स्कूली बच्चे: आप

दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में इन दिनों किताबों की कमी का नतीजा स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। स्कूली बच्चे किताबों के लिए तरस रहे हैं। उक्त आरोप गुरुवार को आम आदमी पार्टी के निगम प्रभारी प्रवीण कुमार और सह-प्रभारी प्रीति डोगरा ने भाजपा पर लगाए। दोनों नेताओं ने गुरुवार को दिल्ली के कई निगम स्कूलों का दौरा किया। उनका आरोप है कि शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र, जहां से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता चुनाव जीतीं हैं।

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