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जब संसद में ही संजय गांधी से भिड़ गए थे रामविलास पासवान, इंदिरा गांधी के सामने ही कहा था- मैं देश की संसद में हूं बेलछी में नहीं

1980 के बजट सत्र के पहले दिन ही राम विलास पासवान सदन में बोल रहे थे। इसी दौरान पहली बार सांसद बने संजय गांधी व्यंग्यात्मक लहजे में लोकसभा चुनाव में विपक्ष की करारी हार को लेकर कुछ बोले। इस पर राम विलास पासवान ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी।

भारतीय राजनीति में बहुत कम उम्र में बहुत चर्चित हो जाने वाले राजनेता संजय गांधी। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस आर्काइव)

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे और राजीव गांधी के छोटे भाई संजय गांधी बहुत कम उम्र में ही राजनीति में अपनी जगह बना ली थी। वह कांग्रेस पार्टी में न केवल एक दमदार नेता थे, बल्कि विपक्ष के लिए एक खौफ भी थे। देश के राजनीतिक परिदृश्य में कई ऐसी बड़ी घटनाएं हुई हैं, जिसमें संजय गांधी सीधे-सीधे जुड़े थे। वह स्वभाव से बहुत आक्रामक थे, लेकिन कई बार उनका यह आक्रामक रवैया उनके लिए मुसीबत बन जाता था।

देश में आपातकाल लगाए जाने के लिए उन्हें ही जिम्मेदार माना जाता है। उन्होंने ही मारुति कार उद्योग की स्थापना की थी। 1977 में कांग्रेस की हार के पीछे भी वही वजह थे। साथ ही 1980 में अपनी पार्टी कांग्रेस को अपनी मां इंदिरा गांधी के नेतृत्व में फिर से सत्ता में पहुंचाने का श्रेय भी उन्हीं को दिया जाता है। एक बार संसद के अंदर उनकी तत्कालीन लोकदल के वरिष्ठ नेता राम विलास पासवान से उनका विवाद हो गया। 1980 के बजट सत्र के पहले दिन ही राम विलास पासवान सदन में बोल रहे थे। इसी दौरान पहली बार सांसद बने संजय गांधी व्यंग्यात्मक लहजे में लोकसभा चुनाव में विपक्ष की करारी हार को लेकर कुछ बोले। इस पर राम विलास पासवान ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी।

उन्होंने कहा, “ऐ संजय गांधी, हम 1969 में विधायक बने थे और अब दूसरी बार लोकसभा में आया हूं। इसलिए मुझसे तमीज से बात करो। मैं बेलछी में नहीं बल्कि देश की संसद में बोल रहा हूं और यहां रंगबाजी नहीं चलेगी। और अगर रंगबाजी ही करनी है तो बताओ, कहां फरियाना है चांदनी चौक में या कनाट प्लेस में?” इस पर मामला गरम हो गया और स्थिति बिगड़ने लगी।

तब सदन में इंदिरा गांधी बीचबचाव के लिए आगे आईं। उन्होंने रामविलास पासवान से कहा, “रामविलास जी, आप वरिष्ठ हैं इसलिए संजय गांधी को माफ कर दीजिए। संजय तो न्यूकमर है और उसे अभी संसदीय परंपराओं के बारे में बहुत कुछ सीखना है।”

इसके बाद लंच के दौरान इंदिरा गांधी ने रामविलास पासवान और संजय गांधी को आपस में मिलवाया और दोनों पक्षों का एक-दूसरे के प्रति गुस्सा खत्म कराया। संजय गांधी राजनीति में बहुत तेजी से उठे थे, लेकिन दुर्भाग्य से वह बहुत जल्दी ही दुनिया छोड़कर चले गए। 23 जून 1980 को एक विमान हादसे में उनका निधन हो गया।

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