UP Election 2027: महाराजा सुहेलदेव और सैयद सालार मसूद गाजी की विरासत को लेकर बहराइच में लंबे समय से चल रही राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस ने एक नया मोड़ ले लिया है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को एक जनसभा के लिए इसी जिले को चुना है।

इस कदम ने एआईएमआईएम को उस बहस के केंद्र में ला दिया है जो बीजेपी सरकार के दौर में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक चर्चा का अहम हिस्सा बन गई है। ओवैसी की रैली मटेरा विधानसभा क्षेत्र में हो रही है। यह समाजवादी पार्टी का गढ़ रहा है और 2008 में परिसीमन के बाद इस सीट के बनने के बाद से ही यह पार्टी के पास है। रैली की जगह का चुनाव राजनीतिक रूप से अहम है क्योंकि एआईएमआईएम पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है और मुस्लिम-बहुल इलाकों में खुद को बीजेपी और सपा दोनों के लिए चुनौती के तौर पर पेश करना चाहती है।

ओवैसी की रैली बहराइच की गाजी दरगाह को लेकर नए सिरे से उठे विवाद के बीच हो रही है। हाल ही में जिले के दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश के मंत्री अनिल राजभर ने दावा किया कि यह स्थल मूल रूप से सूर्य कुंड था और उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर एएसआई से सर्वे कराने का आग्रह करेंगे।

अनिल राजभर ने पिछली सरकारों पर गाजी जैसे आक्रमणकारियों को महिमामंडित करने और महाराजा सुहेलदेव की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। सुहेलदेव को राजभर और कई अन्य ओबीसी समुदायों में उस शासक के तौर पर माना जाता है जिसने गाजी को हराया था।

भारतीय जनता पार्टी का दांव

यह मुद्दा पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार की सांस्कृतिक और राजनीतिक कहानी का अहम हिस्सा बन गया है। हाल के सालों में, दरगाह से जुड़ा सदियों पुराना सालाना मेला बंद कर दिया गया है, जबकि आधिकारिक तौर पर महाराजा सुहेलदेव को याद करने पर जोर दिया जा रहा है। आदित्यनाथ ने बार-बार पिछली सरकारों पर स्थानीय नायकों के बजाय आक्रमणकारियों को सम्मान देने का आरोप लगाया है और अक्सर सुहेलदेव का उदाहरण दिया है।

इस माहौल में एआईएमआईएम नेताओं ने टकराव का रुख अपनाया है। ओवैसी की रैली से एक दिन पहले एआईएमआईएम के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने बीजेपी सरकार पर मुस्लिम धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आपने कई धार्मिक ढांचे ले लिए हैं। आपने पीर, दरगाह और मस्जिद ले लिए हैं। आए दिन हमारे धार्मिक ढांचे तोड़े जा रहे हैं।”

अली ने एएसआई सर्वे की मांग को लेकर अनिल राजभर पर भी निशाना साधा और कहा कि जो व्यक्ति अपनी ही पांच पीढ़ियों का ठीक से ब्योरा नहीं दे सकता, वह एक हजार साल पुराने इतिहास के बारे में बात कर रहा है।

क्या बोले एनडीए के साथी?

भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की ओर से सबसे तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उनकी पार्टी का नाम महाराजा सुहेलदेव के नाम पर रखा गया है। राजभर ने हाल ही में गाजी को एक विदेशी आक्रमणकारी बताया था जो मंदिरों और धन को लूटने आया था।”

ओम प्रकाश राजभर की ओर से सोशल मीडिया पर ओवैसी को सार्वजनिक तौर पर जवाब देने के बाद विवाद और गहरा गया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “अब जब आप उत्तर प्रदेश आ रहे हैं, तो कृपया अपने कमांडर-इन-चीफ के साथ भी हैदराबादी वकीलों वाली अपनी कुछ समझदारी साझा करें। बहराइच में गाजी की दरगाह पर अपनी श्रद्धा व्यक्त करने से पहले, उन्हें याद दिलाएं कि यह वही भूमि है जहां महाराजा सुहैलदेव राजभरजी ने भारत की पहचान और गौरव की रक्षा के लिए विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।”

राजभर ने आगे लिखा, “कृपया अपने कमांडर-इन-चीफ को समझाएं कि उन्हें अपनी गरिमा और व्यक्तित्व के अनुरूप भाषा का प्रयोग करना चाहिए। अनावश्यक आक्रामकता और अहंकार दिखाने से इतिहास के पन्नों में कभी सम्मान नहीं मिलता।”

एआईएमआईएम नेताओं ने सुहेलदेव की ऐतिहासिक स्थिति पर सवाल उठाए

इस विवाद में एक और पहलू जोड़ते हुए, एआईएमआईएम नेताओं ने सुहेलदेव की ऐतिहासिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। अली ने कहा कि वे सुहेलदेव को राजा नहीं मानते और उनका तर्क है कि अगर वे शासक रहे होते, तो बहराइच में किले जैसे भौतिक प्रमाण मौजूद होते। उन्होंने सुहेलदेव के बारे में प्रचलित धारणा को काल्पनिक बताया।

बीजेपी और उसकी सहयोगी सुभासपा के लिए सुहेलदेव की कहानी गैर-यादव ओबीसी समुदायों, खासकर राजभर समुदाय को एकजुट करने का एक अहम जरिया बन गई है, साथ ही यह ऐतिहासिक यादों और सभ्यतागत गौरव पर केंद्रित व्यापक हिंदुत्व विमर्श को भी मजबूत करती है।

एएमआईएम के लिए इस बहस में शामिल होने से उसे खुद को मुस्लिम धार्मिक विरासत के रक्षक के तौर पर पेश करने और साथ ही मध्यकालीन इतिहास की बीजेपी की व्याख्या को चुनौती देने का मौका मिलता है। 2027 के विधानसभा चुनाव पास आ रहे हैं, ऐसे में उम्मीद है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में ओबीसी और मुस्लिम वोटों के लिए जबरदस्त मुकाबला होगा। बहराइच को चुनकर और स्थानीय राजनीति में पहले से ही छाए विवाद में शामिल होकर, ओवैसी ने संकेत दिया है कि एआईएमआईएम इस मुकाबले का हिस्सा बनना चाहती है।

इस दखल से चुनावी फायदा होगा या नहीं, यह अभी पक्का नहीं है। हालांकि, ओवैसी के आने से ऐसा लगता है कि जो लड़ाई मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी बनाम समाजवादी पार्टी के बीच थी, वह अब त्रिकोणीय राजनीतिक मुकाबले में बदल गई है।

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एनडीए के घटक दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में 32 सीटों पर दावेदारी पेश कर दी है। सुभासपा की नजर समाजवादी पार्टी (सपा) के गढ़ आजमगढ़ पर है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…