कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने सोमवार को सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों की स्थिति से जुड़ा राज्यवार डेटा सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की कमी और सरकारी फंड के इस्तेमाल से संबंधित जानकारी मांगी है।
अपने पत्र में अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों में पीने के पानी और फंक्शनल क्लासरूम जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाया। उन्होंने शिक्षा मंत्रियों से पब्लिक एज्युकेशन की स्थिति को ‘तत्काल प्राथमिकता’ के तौर पर लेने और सरकारी स्कूलों में सुधार के लिए युद्धस्तर पर कदम उठाने की अपील की।
सरकारी स्कूलों की तस्वीरों पर जताई चिंता
CJP संयोजक ने कहा कि देश के सरकारी स्कूलों से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन तस्वीरों को देखकर नागरिकों को गंभीर रूप से चिंतित होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बच्चों को पढ़ने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, तो वे ऐसे माहौल में पढ़ाई कैसे कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जब बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा का माहौल नहीं मिलेगा, तो देश की प्रगति की उम्मीद कैसे की जा सकती है। दीपके ने राज्य सरकारों से सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सरकारी स्कूलों पर फोकस
CJP ने हाल ही में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। संगठन की टीमें अलग-अलग राज्यों में सरकारी स्कूलों का दौरा कर उनकी स्थिति का ऑडिट कर रही हैं। इससे पहले संगठन ने NEET में अनियमितताओं को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों के बाद अपना अभियान तेज किया था।
अब CJP का फोकस सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और शिक्षा व्यवस्था पर है। संगठन का कहना है कि स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए राज्य सरकारों से आधिकारिक आंकड़े मांगे जा रहे हैं।
शिक्षा मंत्रियों से मांगी ये जानकारी
अभिजीत दीपके ने अपने पत्र में कहा कि भारत को आजाद हुए 80 साल हो चुके हैं, लेकिन कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को अब भी साफ पीने के पानी, फंक्शनल टॉयलेट, प्रॉपर क्लासरूम और बैठने के लिए बेंच जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान करने से पहले यह जानना जरूरी है कि वर्तमान स्थिति क्या है। इसी आधार पर उन्होंने राज्य शिक्षा मंत्रियों से छह प्रमुख सवालों पर जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
- पिछले पांच वर्षों में राज्य के कितने सरकारी स्कूलों का नवीनीकरण हुआ और कितने स्कूलों को वर्तमान में मरम्मत या पूर्ण नवीनीकरण की जरूरत है?
- सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के कितने पद स्वीकृत हैं, कितने पद भरे हुए हैं और कितने पद खाली हैं?
- पिछले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों के लिए कितना बजट आवंटित किया गया और उसमें से कितनी राशि खर्च की गई?
- प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक उचित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए राज्य में कितने अतिरिक्त सरकारी स्कूलों की जरूरत है?
- शिक्षण कार्य के अलावा सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को कौन-कौन से गैर-शैक्षणिक कार्य और जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं?
- कितने सरकारी स्कूलों में पर्याप्त कंप्यूटर और डिजिटल लर्निंग सुविधाएं, साफ एवं चालू शौचालय तथा बच्चों के लिए खेलकूद की उचित सुविधाएं और उपकरण उपलब्ध हैं?
‘अभियान राजनीति के लिए नहीं, बच्चों के भविष्य के लिए’
अभिजीत दीपके ने कहा कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान किसी राजनीतिक दल या किसी एक सरकार को निशाना बनाने के लिए नहीं है। उन्होंने इसे बच्चों के भविष्य से जुड़ा अभियान बताया।
उन्होंने कहा कि हर बच्चे को, चाहे उसका जन्म कहीं भी हुआ हो या उसके माता-पिता की आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, सुरक्षित कक्षा, साफ पीने का पानी, कार्यात्मक शौचालय, बैठने के लिए बेंच और पढ़ाने के लिए शिक्षक मिलना उसका अधिकार है।
CJP संयोजक ने राज्य शिक्षा मंत्रालयों से मांगी गई जानकारी को सार्वजनिक करने की अपील करते हुए कहा कि सरकारों को यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए कि अपर्याप्त बुनियादी ढांचे के कारण किसी भी बच्चे को सम्मानजनक शिक्षा से वंचित न होना पड़े।
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कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार पर अपनी प्राथमिकताएं दुरुस्त नहीं रखने का आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले वित्त वर्ष केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों के रखरखाव पर खर्च किए गए रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये से 10 नए सरकारी स्कूल बनाए जा सकते थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
