कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में जंतर-मंतर पर चल रहा स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट शनिवार शाम को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का साथ समाप्त हो गया। इस प्रोटेस्ट के खत्म होने के साथ विपक्ष के हाथ से एक बड़ा राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा चला गया,लेकिन अब विपक्ष सरकार को घेरने के लिए अन्य मुद्दे की तरफ आगे बढ़ने के लिए तैयार है। जिसने देश को हिलाकर रख दिया है- अयोध्या चंदा चोरी का मामला।

जब संसद सत्र शुरू हुआ तो कथित राम जन्मभूमि चंदा चोरी का मुद्दा भाजपा को निशाना बनाने के लिए शीर्ष मुद्दे के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन इससे पहले युवा विरोध प्रदर्शन के भड़कने से ध्यान निर्णायक रूप से दूसरी तरफ मुड़ गया।

पेपर लीक के बाद देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शन का असर आने वाले सप्ताह में होने वाली घटनाओं पर भी पड़ेगा। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को छात्रों के खिलाफ “घातक हथियारों” के इस्तेमाल को मंजूरी देने के लिए “प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार” मानता है। उन्होंने कहा, “यह संसद में एक बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है।” उन्होंने यह भी मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से माफी मांगें।

इंडिया ब्लॉक सोमवार को मोदी सरकार द्वारा पेपर लीक के मामलों में त्वरित अदालती कार्यवाही से संबंधित विधेयक लाने के प्रयास के मद्देनजर आगे की कार्रवाई पर विचार-विमर्श करेगा। भाजपा विरोधी खेमा पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए दबाव बना रहा है, और सरकार ने “स्थगन प्रस्ताव” स्वीकार करने की इच्छा जताई थी। लेकिन अब सूत्रों के अनुसार, संभव है कि सरकार दोनों मुद्दों को एक साथ सुलझाने का प्रयास करे।

लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक बार जब पेपर लीक का विवाद शांत हो जाएगा तो विपक्ष का ध्यान अयोध्या पर केंद्रित हो जाएगा । कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को उठाने पर अड़े हुए हैं और वामपंथी जैसे अन्य सहयोगी दलों को भी इसमें दिलचस्पी हो गई है।

भाजपा विरोधी खेमा इस विवाद को सत्ताधारी दल को उसके गढ़ हिंदू धर्म में घेरने के एक शक्तिशाली हथियार के रूप में देख रहा है। खासकर आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और चुने हुए मंदिर ट्रस्ट के इसमें शामिल होने के बाद।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में विपक्ष को उम्मीद है कि इससे उन्हें बहुसंख्यक हिंदू मतदाताओं का समर्थन प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

यह स्पष्ट नहीं है कि विपक्ष इस मुद्दे को कैसे सुलझाना चाहता है। क्या वह सामान्य चर्चा चाहता है या फिर “स्थगन प्रस्ताव” के लिए दबाव डालेगा, जिसे सरकार इसके प्रतीकात्मक महत्व और व्यावहारिक निहितार्थों के कारण स्वीकार करने में अनिच्छुक होगी।

रणनीतिज्ञ भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पैनी नजर रखे हुए हैं। जिसकी कृषि क्षेत्र में किए गए रियायतों को लेकर किसान समूहों ने आलोचना की है। इस मुद्दे पर कोई भी कदम विरोध प्रदर्शनों को जन्म दे सकता है। जिसका फायदा विपक्ष उठाना चाहेगा। एथेनॉल ईंधन को लेकर विवाद भी विपक्ष के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल है।

‘बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए देश सबसे पहले…’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पहली बार बोले अमित शाह

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा बयान सामने आया है। अमित शाह ने पहली बार देर रात धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे वाला पोस्ट शेयर करते हुए अपनी बात रखी। शाह ने कहा कि भाजपा कार्यकर्तीओं के लिए पद से कहीं ज्यादा देश महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही शाह ने मोदी सरकार की तारीफ भी की। वहीं, इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर अमित शाह पर निशाना साधा। पढ़ें पूरी खबर।