काकरोच जनता पार्टी की अगुआई में सोमवार के प्रस्तावित संसद मार्च में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव का अंदेशा है। इसे लेकर रविवार शाम को ही जंतर मंतर भर गया था। क्षमता के मुकाबले हजारों की संख्या में छात्र, युवा और अन्य समर्थक वहां पहुंच गए थे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों ने अपनी अपनी रणनीति बनाई है। जिससे वहां तनाव और टकराव की स्थिति बन गई है।
पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रस्तावित मार्च के लिए अनुमति नहीं ली गई है, इसलिए वे अनधिकृत मार्च को बढ़ने की अनुमति नहीं देंगे। दूसरी ओर काजपा की अगुआई में वाम और युवा प्रदर्शनकारियों ने अपनी रणनीति बनाई है।
सूत्रों के मुताबिक, संसद मार्च में कोई राजनीतिक पार्टी का झंडा नहीं होगा। केवल महापुरुषों की तस्वीरें (बापू, आंबेडकर, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस आदि) और राष्ट्रीय प्रतीक लेकर शामिल होंगे। इसके अलावा नारे लिखी तख्तियां होंगी। नीट को लेकर खुदकुशी कर चुके कुछ छात्रों की तस्वीरों को भी लहराए जाने की रणनीति है।
जंतर मंतर पर जुटे लोगों को था ‘पुलिस कार्रवाई’ का डर
जंतर मंतर पर जुटे लोगों का मानना था कि रविवार की रात ‘निर्णायक रात’ रात है। सैकड़ों लोग यहां जुट रहे हैं। लोग यह कहते सुने जा सकते थे कि ‘यह केवल छात्रों का आंदोलन नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मामलों के खिलाफ आवाज उठाने का अभियान है, इसी वजह से वे रात भर डटे रहेंगें।’
दूसरी ओर हर पल पुलिस बलों की संख्या वहां बढ़ती जा रही है। जंतर मंतर पर लोगों का यह भी मानना था कि रविवार की रात पुलिस एक कार्रवाई फिर कर सकती है। वामपंथी प्रदर्शनकारी इसे लेकर सतर्क हैं। वे मानव श्रृखंला बनाकर बैठे हैं।
उनका दावा था कि धरना स्थल के दोनों ओर मिलाकर करीब 40 डिटेंशन बसें खड़ी हैं और छह से सात वाटर कैनन तैनात हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि अगले कुछ घंटों में दिल्ली पुलिस धरना स्थल पर कार्रवाई कर सकती है। कई डिटेंशन बसें और वाटर कैनन भी मौके पर मौजूद थे। अवरोधक बढ़ा दी गई है और आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है।
मंच से की जा रही डटे रहने की अपील
कुल मिलाकर संसद मार्च से एक दिन पहले जंतर मंतर पर माहौल पूरी तरह आंदोलनमय बना गया। बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक धरना स्थल पर मौजूद रहे। रात बढ़ने के साथ भी लोगों का आना-जाना जारी रहा। प्रदर्शनकारी ढोल-ताशे बजाकर और नारे लगाकर अपने आंदोलन को जारी रखते रहे।
मंच से लगातार संबोधन होते रहे और छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से डटे रहने की अपील की जाती रही। इससे पहले नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद, आप नेता मनीष सिसोदिया सहित कई नेता रविवार को जंतर मंतर पहुंच युवाओं का उत्साहवर्धन किया।
जनसत्ता संपादकीय में पढ़िए संवाद की जगह बल प्रयोग क्यों?
दिल्ली में जंतर-मंतर पर पिछले बीस दिन से अनशन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा शनिवार को जबरन अस्पताल में भर्ती करा देने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरा लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें।
