CJP Protest News: दिल्ली में सोमवार को सीजेपी के संसद मार्च के दौरान पुलिस ने बल का प्रयोग किया और जंतर-मंतर में प्रदर्शन स्थल के मंच को भी हटा दिया। इसके बावजूद सीजेपी चीफ अभिजीत दीपके जंतर मंतर के पास ही अपने साथियों के साथ बैठे हैं। इस दौरान अभिजीत की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे कुछ समय के लिए बहोश भी हो गए।

न्यूज एजेंसी PTI ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें अभिजीत दीपके अचानक बेहोश होते हुए नजर आए हैं और वे जमीन पर लेट गए। इसके बाद उनके आस-पास मौजूद उनके साथियों ने उन्हें होश में लाने के लिए प्रयास किए और भीड़ को भी दूर जाने को कहा।

सुरक्षित स्थान पर ले गए साथी

अभिजीत दीपके के बेहोश होने पर उनके साथ मौजूद साथियों ने उन्हें पानी पिलाया और भीड़ से हटाकर एक सुरक्षित स्थान पर भी ले गए, जिससे उन्हें सहजता के साथ चिकित्सा सहायता दी जा सके।

बता दें कि यह घटना तब हुई जब जंतर-मंतर पर तनावपूर्ण माहौल था और सीजेपी का प्रदर्शन जारी था। प्रदर्शनकारियों को स्थिति को शांत करने और घायलों को तुरंत सहायता प्रदान करने के लिए आपस में समन्वय स्थापित करने की कोशिश करते भी नजर आए।

सोमवार को ही खत्म किया था अनशन

बता दें कि सीजेपी चीफ अभिजीत दीपके ने भी भूख हड़ताल खत्म की थी। संसद मार्च की अपील के बीच जंतर-मंतर पर ही उन्होंने ढाई दिन चला अपना अनशन तोड़ दिया था। इस दौरान मंच पर सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि भी मौजूद रहीं थी। उन्होंने अपना अनशन तब शुरू किया था, जब सोनम वांगचुक को सुरक्षाबलों प्रदर्शनस्थल से ले जाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया था।

सीजेपी की शर्तें क्या हैं?

सीजेपी ने हजारों प्रदर्शनकारियों के साथ संसद मार्च शुरू किया था लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संसद के पास नहीं पहुंचने दिया था। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू-गैस का इस्तेमाल किया था और लाठीचार्ज भी किया था। जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों का मंच भी हटा दिया है।

हालांकि, सीजेपी के दो सदस्यों सौरव दास और अभिषेक रांका ने सोमवार को ही केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। मुलाकात में सीजेपी ने सरकार के सामने तीन मांगें रखी हैं, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा प्रमुख मांग है। सीजेपी ने कहा है कि जब तक ये मांगे पूरी नहीं हो जातीं तब तक ये विरोध प्रदर्शन पहले की तरह जारी रहेगा।

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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला लगातार अपने प्रदेश को राज्य का दर्जा वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं। इसके समर्थन में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने नई दिल्ली और संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन को चुना। लेकिन न सिर्फ़ कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च ने इसे फीका कर दिया, बल्कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के इंडिया गठबंधन सहयोगियों ने भी इसे नजरअंदाज कर दिया। पढ़िए पूरी खबर