भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत हैदराबाद की एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर श्रीकृष्णा देवा राव के कार्यालय ने इंडियन एक्सप्रेस को इसकी पुष्टि की है। यह घोषणा छात्रों के एक वर्ग की ओर से किए गए विरोध के बावजूद की गई है। वह मांग कर रहे हैं कि सीजेआई को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित न किया जाए। समारोह की तारीख अभी तक तय नहीं हुई है।

कुलपति कार्यालय ने बताया, “हमने मुख्य न्यायाधीश को निमंत्रण भेजा था और उनके कार्यालय ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।” कार्यालय ने आगे कहा कि दीक्षांत समारोह की तारीख अभी तय नहीं हुई है। हालांकि, यह आमतौर पर अगस्त या सितंबर में आयोजित किया जाता है।

छात्रों ने किया था विरोध

एनएएलएसएआर के 1400 छात्रों में से लगभग 450 छात्रों ने पहले सीजेआई सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था। इसमें उन्होंने पिछले महीने नीट विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ज्यादतियों का आरोप लगाने वाली एक याचिका के संबंध में उनकी हालिया टिप्पणियों का हवाला दिया था।

अधिकारियों को पहला ज्ञापन 23 जुलाई को एलएलबी के पास आउट होने वाले 70 छात्रों द्वारा भेजा गया था। 25 जुलाई तक, 2027, 2028, 2029, 2030 और 2031 बैच के छात्रों ने इस बयान के साथ एकजुटता व्यक्त की और विश्वविद्यालय प्रशासन को अलग-अलग पत्र सौंपे।

22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 20 जुलाई को छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों पर स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। जब एक वकील ने पुलिस की बर्बरता के वीडियो सबूत पेश किए, तो मुख्य न्यायाधीश कांत ने मौखिक रूप से वीडियो देखने से इनकार कर दिया और कहा कि अदालत का समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए।

छात्रों ने लिखा था पत्र

टिप्पणियों के एक दिन बाद लिखे गए अपने पहले पत्र में छात्रों ने कहा, “हमारी चिंताएं माननीय मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की क्रूर कार्रवाई से संबंधित याचिका की तत्काल सुनवाई की अनुमति न देने से उत्पन्न हुई हैं। दीक्षांत समारोह एक ऐसा क्षण होता है जहां विश्वविद्यालय के अपने मूल्य, जिनमें संवैधानिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता, न्याय तक पहुंच और शिकायतों के साथ तर्कसंगत जुड़ाव शामिल हैं, उसके द्वारा लिए गए निर्णयों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होने चाहिए।”

छात्रों ने कहा, “हमें लगता है कि ऐसे गणमान्य व्यक्ति से अपनी उपाधियां प्राप्त करना, जिनका हालिया सार्वजनिक आचरण, प्रदर्शनकारी नागरिकों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता के गंभीर आरोपों को नजरअंदाज करता प्रतीत होता है, उन मूल्यों के साथ मेल नहीं खाता जो हमें एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी में अपने समय के दौरान सिखाए गए हैं। इसलिए हम विश्वविद्यालय से इस दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के चयन पर गंभीरता से पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं।”

अगले कुछ दिनों में, कई बैचों के छात्रों ने प्रशासन को एक समान शब्दों में पत्र लिखे। 2029 बैच ने कहा, “हम स्नातक होने वाले बैच द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं से सहमत हैं। हमारा यह भी मानना ​​है कि उनका प्रतिनिधित्व ऐसे प्रश्न उठाता है जो एक स्नातक बैच के तात्कालिक हितों से परे हैं और वास्तव में एनएएलएसएआर द्वारा अपनाए जाने वाले संवैधानिक मूल्यों से संबंधित हैं।” 2028 बैच के छात्रों की ओर से लिखे गए पत्र के मुताबिक, वे दीक्षांत समारोह में वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति का कड़ा विरोध करते हैं।

सीजेआई का आचरण संविधान के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं- छात्र

2030 बैच के पत्र में भाषा ज्यादा स्पष्ट थी। पत्र में कहा गया, “जैसा कि रिकॉर्ड में दर्ज है (मुख्य न्यायाधीश ने ये टिप्पणियां की थीं) ‘कृपया हमारा समय बर्बाद न करें। हमारे पास ये वीडियो देखने का समय नहीं है।’ पहले भी मुख्य न्यायाधीश ने युवाओं को सिस्टम पर हमला करने वाले परजीवी और कॉकरोच कहा था। हमारा मानना ​​है कि भारत के सर्वोच्च न्यायधीश का ऐसा आचरण हमारे संविधान के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और उन मूल्यों के साथ मेल नहीं खाता जिनका पालनएनएएलएसएआर ने अपने पूरे इतिहास में किया है।” यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…