लखीमपुरः सीजेआई ने योगी सरकार को लगाई फटकार, पूछा- हिंसा में हजारों लोग पर कोर्ट के सामने केवल 23 गवाह क्यों

यूपी सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि 68 गवाहों में से 30 के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किए जा चुके हैं और अन्य कुछ के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

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भारत का उच्चतम न्यायालय। फोटो (स्रोत- एएनआई)

लखीमपुर खीरी मामले की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को यूपी सरकार से पूछा कि जब घटना के वक्त वहां हजारों लोग मौजूद रहे तब आपको गवाह केवल 23 लोग ही क्यों मिले। उच्चतम न्यायालय ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए प्रदेश सरकार को फटकार लगाई। हालांकि यूपी सरकारी की ओर से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि मामले में और गवाहों को बुलाने के लिए सार्वजनिक विज्ञापन प्रकाशित कराए गए हैं। लोगों से कहा गया है कि जिनके पास जो भी जानकारी हो, वे उपस्थित होकर बता सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा मोबाइल से लिए गए वीडियो और घटना की वीडियोग्राफी को भी सबूत के तौर पर लिया गया है। घटना के चश्मीदीदों और मौके पर मौजूद अन्य लोगों से कहा गया है कि सरकार उन्हें सुरक्षा देगी। वे बिना किसी भय के आकर अपनी जानकारी दे सकते हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता साल्वे ने कहा कि 68 गवाहों में से 30 के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किए जा चुके हैं और अन्य कुछ के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। बताया, ‘‘30 गवाहों में से 23 ने ही चश्मदीद होने का दावा किया है। अधिकतर गवाह बरामदगी से जुड़े औपचारिक गवाह हैं।’’ कहा कि कई डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं और विशेषज्ञ उनकी जांच कर रहे हैं।

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को मामले के अन्य गवाहों के बयान भी दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत दर्ज करने का भी निर्देश दिया। उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि जो भी गवाही देना चाहता है उसे पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए और सबूतों से छेड़छाड़ बिल्कुल न की जाए।

पीठ ने कहा, ‘‘हम संबंधित जिला न्यायाधीश को सीआरपीसी की धारा 164 के तहत साक्ष्य दर्ज करने का कार्य निकटतम न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंपने का निर्देश देते हैं।’’ सीआरपीसी (आपराधिक प्रक्रिया संहिता) की धारा 164 के तहत बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किए जाते हैं और वे बयान मान्य होते हैं।

पीठ ने साल्वे से कहा कि वह ‘इलेक्ट्रॉनिक’ साक्ष्य की रिपोर्ट तैयार करने के संबंध में उसकी चिंताओं से ‘फॉरेंसिक’ प्रयोगशालाओं को अवगत कराएं। साथ ही, राज्य सरकार को पत्रकार की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले से जुड़ी दो शिकायतों के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने को निर्देश दिया। पीठ ने कहा, ‘‘राज्य को इन मामलों में अलग-अलग जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है।’’ न्यायालय ने इस मामले में अब आठ नवंबर को आगे सुनवाई करेगा।

शीर्ष अदालत तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले में सुनवाई कर रही है, जिसमें चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए थे। मामले में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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