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चीफ जस्टिस खेहर के आगे नहीं गली राम जेठमलानी की दाल, तुरंत सुनवाई की अर्जी पर मिला जवाब- लाइन नहीं टूटेगी

सुप्रीम कोर्ट में आला वकीलों के अपने केस की सुनवाई के लिए मनचाही तारीख लेने के दिन अब लद सकते हैं।

जस्टिस जेएस केहर (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट में आला वकीलों के अपने केस की सुनवाई के लिए मनचाही तारीख लेने के दिन अब लद सकते हैं। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने शुक्रवार(3 मार्च) को मशहूर वकील राम जेठमलानी के केस में ऐसा ही किया और उन्‍हें प्रकिया का पालन करने को कहा। टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जेठमलानी ने उपहार मामले के दोषी गोपाल अंसल की ओर से पेश करते हुए सजा को कम करने की अर्जी को जल्‍द दाखिल करने को कहा था। इसमें अर्जी के जरिए उनकी जेल अवधि को सजा से काटे जाने और सरेंडर की तारीख को बढ़ाने की अपील की जानी थी। सोमवार (27 फरवरी) को जेठमलानी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि गोपाल को उनके भाई सुशील अंसल की तरह ही सजा में छूट दे दी जाए। सुशील को उनकी उम्र और बीमारियों के चलते कोर्ट ने सजा से राहत दी थी।

जेठमलानी ने कहा कि गोपाल की भी उम्र काफी हो गर्इ है और वे भी बढ़ती उम्र से होने वाली बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसलिए उन्‍हें भी राहत दी जाए। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट के रजिस्‍ट्रार को आपत्ति नहीं है तो मामला शुक्रवार को लिस्‍ट हो जाएगा। लेकिन रजिस्‍ट्रार ने आपत्ति जताई और इसके चलते मामला शुक्रवार को दर्ज नहीं हुआ। जेठमलानी ने शुक्रवार को इसकी शिकायत जेठमलानी से की और तुरंत सुनवाई चाही। साथ ही कहा कि अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो कोर्ट सरेंडर करने की समयसीमा को आगे बढ़ा दे। लेकिन जस्टिस खेहर ने कड़ाई से कहा कि प्रकिया का पालन सबको करना होता है।

उन्‍होंने कहा, ”यदि रजिस्‍ट्रार को आपत्ति है और उन्‍होंने मामले को लिस्‍ट करने से मना कर दिया है तो जेठमलानी के क्‍लाइंट रजिस्‍ट्रार के आदेश के खिलाफ अपील कर सकते हैं।” उन्‍होंने कह दिया कि किसी को लाइन नहीं तोड़ने दी जा सकती। बता दें कि अब तक दिग्‍गज वकील ऐसा करते रहे हैं कि वे अपने मामलों को जल्‍द सुनवाई के लिए दर्ज करा लेते थे। कई पूर्व मुख्‍य न्‍यायाधीश वकीलों के कद को देखते हुए इस तरह से याचिकाएं स्‍वीकार भी कर लेते थे लेकिन लगता है अब ऐसे दिन पूरे होने वाले हैं।

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