केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के मद्देनजर वहां फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए बुधवार को 58 उड़ानें संचालित की जाएंगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में जारी संकट के कारण अब तक भारतीय और विदेशी एयरलाइंस द्वारा 1,609 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ”फंसे हुए यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। विमानन कंपनियां आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कर्मी तैनात कर रही हैं और विदेशी विमानन अधिकारियों तथा विभिन्न भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर सुरक्षित और सुचारू यात्री आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रही हैं।”
बयान के अनुसार, ”आज भारतीय विमानन कंपनियों द्वारा कुल 24 उड़ानें संचालित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, ‘एमिरेट्स’ और ‘एतिहाद’ एयरलाइन ने पिछले 24 घंटों में खाड़ी देशों से नौ उड़ानें संचालित की हैं।”
मंत्रालय ने कहा कि भारतीय एयरलाइन कंपनियां चार मार्च यानी बुधवार को 58 और उड़ानें संचालित करने की योजना बना रही हैं, जिनमें इंडिगो और एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानें शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच उड़ान भरने वाली विदेशी एयरलाइंस भी परिचालन और हवाई क्षेत्र संबंधी स्थितियों को ध्यान में रखते हुए सीमित संख्या में उड़ानें संचालित कर रही हैं।
मंत्रालय ने कहा, ”वर्तमान स्थिति के कारण अब तक भारतीय विमानन कंपनियों की 1,221 उड़ानें और विदेशी विमानन कंपनियों की 388 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं।”
हवाई किरायों की कड़ी निगरानी
मंत्रालय ने कहा है कि वह एयरलाइंस के साथ लगातार संपर्क में है और इस दौरान टिकटों की कीमतों में गलत बढ़ोतरी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए हवाई किरायों पर कड़ी निगरानी रख रहा है। इस बीच, एयर इंडिया ने X पर एक पोस्ट में कहा, ”पश्चिम एशिया में जारी स्थिति को देखते हुए, एयर इंडिया ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, इजरायल और कतर से आने-जाने वाली अधिकतर उड़ानों का निलंबन चार मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है।’
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने मध्य-पूर्व में हवाई सेवाओं को काफी हद तक प्रभावित किया है क्योंकि इस क्षेत्र में कुछ एयरस्पेस को बंद कर दिया गया है।
ईरान में नए ध्रुवीकरण की आहट
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने के बाद वैश्विक रणनीतिक समीकरणों को लेकर अनिश्चितता का माहौल है और दुनिया ऊर्जा संकट की आशंका को लेकर चिंतित है। इन स्थितियों में भारत के लिए रणनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
