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नागरिकता संशोधन बिल: शिया मुसलमानों को भी दायरे में लाना चाहते हैं वसीम रिजवी, अमित शाह को लिखी चिट्ठी

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा कि शियाओं को भी इस बिल के दायरे में लाया जाना चाहिए।

Author Edited By मोहित नई दिल्ली | Updated: December 9, 2019 5:16 PM
गृह मंत्री अमित शाह, शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी। फोटो: इंडियन एक्सप्रेस

गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (9 दिसंबर) को लोकसभा में नागरिकता विधेयक पेश कर दिया। इस बीच शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने मांग की है कि शिया मुसलमानों को भी इस बिल के दायरे में लाया जाए। उन्होंने शाह को चिट्ठी लिखकर कहा है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, सीरिया, साउदी अरब और केन्या में शिया मुस्लिमों को प्रताड़ित किया जाता है इसलिए उन्हें भी इस बिल के दायरे में लाया जाए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय में शियाओं की स्थिति बेहतर नहीं और वह कमजोर हैं।

वहीं लोकसभा में विपक्ष द्वारा मुसलमानों को निशाना बनाए जाने के आरोपों पर अमित शाह भड़क उठे। इस दौरान उन्होंने मुस्लिमों को इस बिल में शामिल न करने की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि हमारे यहां अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान की गई पर अन्य जगह ऐसा नहीं हुआ। हिन्दुओं, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी और ईसाई लोगों को धार्मिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा है। इस बिल ने किसी भी मुस्लिम का हक नहीं छीना। शाह ने कहा कि पड़ोसी देशों में मुसलमानों पर धार्मिक प्रताड़ना नहीं होती।

उन्होंने बिल लाने की वजह भी साझा की। शाह ने कहा कि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन किया। अगर धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं किया जाता तब इस बिल की जरूरत नहीं पड़ती।’ गौरतलब है कि इस बिल पर सरकार का कड़ा विरोध किया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार इस बिल के जरिए संविधान की मूल बातों को उल्लंघन कर रही है।

बता दें कि चार दिसंबर केंद्रीय कैबिनेट बिल को मंजूरी दी थी। नागरिकता बिल 1955 में संशोधन कर इस नए बिल में नॉन-मुस्लिम अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। सरकार ने इसके लिए 6 धर्मों के लोगों को चुना है। इसमें हिंदू, सिख, जैन, बुद्धिस्ट, क्रिश्चियन और पारसी लोग शामिल हैं।

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