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Citizenship Amendment Bill के समर्थन में आगे आए सिंगर अदनान सामी, कहा- धर्म के आधार पर अपने देश में परेशानियों का सामना करने वाले लोगों के लिए है बिल

सामी ने लिखा कि 'नागरिकता संशोधन बिल उन धर्म के लोगों के लिए है, जिन्हें धार्मिक रुप से कट्टर देशों में प्रताड़ित किया जा रहा है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में मुस्लिमों को धर्म के आधार पर प्रताड़ित नहीं किया जा रहा है, क्योंकि वो वहां पर बहुमत में हैं।'

Author नई दिल्ली | Updated: December 10, 2019 6:26 PM
बॉलीवुड सिंगर अदनान सामी। (फाइल)

संसद में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जमकर हंगामा हो रहा है। विपक्षी पार्टियां जहां इस बिल का विरोध कर रही हैं, वहीं सरकार इस बिल को लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी पास कराने की कोशिशों में जुटी है। सरकार की इस कोशिश को अब बॉलीवुड सिंगर अदनान सामी का समर्थन मिला है। अदनान सामी ने मंगलवार को एक ट्वीट कर लिखा कि “नागरिकता संशोधन बिल उन धर्म के लोगों के लिए है, जिन्हें धार्मिक रुप से कट्टर देशों में प्रताड़ित किया जा रहा है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में मुस्लिमों को धर्म के आधार पर प्रताड़ित नहीं किया जा रहा है, क्योंकि वो वहां पर बहुमत में हैं। मुस्लिम अभी भी पहले की तरह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। सभी का कानूनी तरीके से स्वागत है।”

बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल के तहत हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के वे लोग, जो 31 दिसंबर, 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हैं, और अपने देश में धर्म के आधार पर प्रताड़ना झेल चुके हैं, उन्हें अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।

नागरिक संशोधन बिल सोमवार को लोकसभा में पास हो गया। यहां इस बिल के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े। अब बुधवार को CAB राज्यसभा में पेश किया जाएगा। लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष ने इस बिल का कड़ा विरोध किया। एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तो विरोध में बिल की कॉपी संसद में फाड़ डाली। जिस पर सरकार की तरफ से कड़ा आपत्ति दर्ज करायी गई।

वहीं इस बिल का असर पाकिस्तान में भी दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान की सरकार ने इस पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि “हम इस विधेयक की ंिनदा करते हैं। यह प्रतिगामी और भेदभावपूर्ण है और सभी संबद्ध अंतरराष्ट्रीय संधियों और मानदंडों का उल्लंघन करता है। यह पड़ोसी देशों में दखल का भारत का दुर्भावनापूर्ण प्रयास है।’’ इसमें कहा गया कि इस कानून का आधार झूठ है और यह धर्म या आस्था के आधार पर भेदभाव को हर रूप में खत्म करने संबंधी मानवाधिकारों की वैश्विक उद्घोषणा और अन्य अंतरराष्ट्रीय संधियों का पूर्ण रूप से उल्लंघन करता है।

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