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CAA-NRC विवादः जामिया-सीलमपुर के बाद दिल्ली में फिर भड़क उठी हिंसा, दिल्ली गेट पर फूंक डाली कार, CP और इंडिया गेट पर भी प्रदर्शन

दिल्ली के दरियागंज इलाके में शुक्रवार को नये नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक कार को आग के हवाले कर दिया गया।

दिल्ली गेट पर जमा प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन से उनपर पानी का छिड़काव किया। (फोटो-ANI)

जामिया मिल्लिया इस्लामिया और सीलमपुर इलाके में प्रदर्शन के बाद शुक्रवार को दिल्ली के दरियागंज इलाके में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई। इस दौरान  एक कार को आग के हवाले कर दिया गया। राष्ट्रीय राजधानी में दिनभर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद आगजनी की यह पहली घटना है। पुलिस ने पुरानी दिल्ली से जंतर मंतर की ओर मार्च का प्रयास कर रहे प्रदर्शनकारियों के विशाल समूह पर पानी की बौछारें कीं और लाठीचार्ज भी किया। पुलिस ने उन्हें दिल्ली गेट पर ही रोक दिया।

इससे  पहले  हिंसक प्रदर्शन और बवाल को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने शुक्रवार को कुल 16 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारा बंद कर दिए। डीएमआरसी ने ट्वीट किया है कि फिलहाल केन्द्रीय सचिवालय, चावड़ी बाजार, चांदनी चौक, राजीव चौक, दिल्ली गेट, लाल किला, जामा मस्जिद, खान मार्केट, जनपथ, प्रगति मैदान, मंडी हाउस, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जाफराबाद, मौजपुर..बाबरपुर, शिव विहार और जौहरी एन्क्लेव मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश एवं निकास द्वार बंद हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में जगह-जगह बैरिकेड लगाये गये लेकिन निषेधाज्ञा लागू होने और तमाम मेट्रो स्टेशनों के बंद होने के बावजूद जुमे की नमाज के बाद हजारों लोगों को जामा मस्जिद के पास एकत्रित होने से रोका नहीं जा सका। शाम होते-होते इंडिया गेट तथा सेंट्रल पार्क में बड़ी संख्या में तिरंगा और ‘संविधान बचाओ’ लिखी तख्तियां लिये लोगों ने नारेबाजी की। उन्होंने सरकार पर देश को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी सरकार ने जनता की आवाज का पूरी तरह अपमान किया है और असहमति को दबाने के लिए क्रूरता से बल का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि सीएए भेदभावपूर्ण है तथा प्रस्तावित एनआरसी खासकर गरीबों और वंचितों को प्रभावित करेगा।

हालांकि एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि सरकार विरोध कर रहे लोगों के सुझावों पर विचार करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि नये कानून को लेकर लोगों के भ्रम दूर करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। गृह मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकारों के पास सीएए और एनआरसी के क्रियान्वयन को खारिज करने का कोई अधिकार नहीं है। एनआरसी अगले साल किये जाने का प्रस्ताव है।

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