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खाड़ी देशों तक पहुंची CAA की आंच, फेसबुक पोस्ट पर कानून का समर्थन किया तो डॉक्टर को छोड़नी पड़ गई नौकरी

दोहा में नसीम हेल्थ केयर ग्रुप में आर्थोपेडिक एक्सपर्ट डॉक्टर अजित श्रीधरन कहते हैं कि फेसबुक पोस्ट में लोगों द्वारा हॉस्पिटल का बहिष्कार करने की धमकी मिलने के बाद उन्हें वापस आना पड़ा।

Author तिरुवनंतपुरम | December 24, 2019 12:27 PM
kerala CAA protestतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

देशभर में नागरकिता संशोधन कानून, 2019 को लेकर विरोध-प्रदर्शन की आंच अब खाड़ी देशों में पहुंच गई है। ताजा मामला कतर का है, जहां केरल के एक डॉक्टर को नागरिकता कानून का समर्थन करने पर नौकरी छोड़ने को मजबूर होना पड़ गया। राजधानी दोहा के एक निजी हॉस्पिटल में कार्यरत डॉक्टर ने कहा कि उसे अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी क्योंकि नए नागरिकता कानून के पक्ष में उसकी फेसबुक पोस्ट पर खासा हंगामा हो गया, जिसके चलते उसे घर वापस आने को मजबूर होना पड़ा।

दोहा में नसीम हेल्थ केयर ग्रुप में आर्थोपेडिक एक्सपर्ट डॉक्टर अजित श्रीधरन कहते हैं कि फेसबुक पोस्ट में लोगों द्वारा हॉस्पिटल का बहिष्कार करने की धमकी मिलने के बाद उन्हें वापस आना पड़ा। पिछले करीब 11 सालों से दोहा में नौकरी कर रहे श्रीधर ने केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून लाए जाने का फेसबुक पर समर्थन किया था।

पोस्ट में उन्होंने कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों की भी निंदा की। डॉक्टर अजित ने मलयालम भाषा में की गई अपनी पोस्ट में लिखा, ‘ये मुद्दा नागरिकता संशोधन बिल का नहीं है बल्कि मांग है कि मोदी सरकार को सत्ता से निकाला जाए। एक समुदाय को गुमराह करके दंगा पैदा करें, जिसे आसानी से उकसाया जा सकता है, और इस तरह यह भावना पैदा की जा सकती है कि देश में अराजकता का माहौल है।’

हालांकि श्रीधर दावा करते हैं कि अपनी पोस्ट में उन्होंने किसी का अपमान नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘किसी मुद्दे पर अपनी राय देने का मेरे पास अधिकार है। मैंने सिर्फ उस अधिकार का इस्तेमाल किया था।’ श्रीधर कहते हैं कि उनकी पोस्ट पर पिछले शुक्रवार को खासा हंगमा शुरू हो गया। सोशल मीडिया में कई कमेंट के जरिए हॉस्पिटल का बहिष्कार करने की धमकी दी गई। मुझे बताया गया कि इस अभियान के पीछे केरल के लोग थे। उन्होंने कहा कि, ‘जब मुझे महसूस हुआ कि भीड़ किसी संस्था को निशाना बनाएगी। तो मैंने अपने नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया और वापस आ गया।’

हालांकि डॉक्टर श्रीधर ने साफ किया कि नौकरी छोड़ने के लिए हॉस्पिटल प्रशासन की तरफ से उनके ऊपर कोई दबाव नहीं बनाया गया। उन्होंने कहा, ‘हॉस्पिटल का बहिष्कार करने की धमकी के चलते मैंने यह निर्णय लिया। मुझे निजी तौर पर किसी ने धमकी नहीं दी। वहीं जैसे-जैसे हालात खराब हो रहे थे, मैंने अपना अकाउंट बंद कर दिया और लोल्लम वापस लौट आया।’

इसी बीच नसीम हेल्थ केयर ग्रुप ने एक इंटरनल सर्कुलर में कहा कि डॉक्टर श्रीनगर ने विवादित राजनीतिक मुद्दे पर कमेंट करने के चलते सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाओं के बाद तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। बयान में आगे कहा कि गया कि डॉक्टर श्रीधर द्वारा लिया गया फैसला उनका निजी मामला है और ये हॉस्पिटल प्रशासन के संज्ञान में नहीं था।

उल्लेखनीय है कि नागरिकता कानून पर इस्लामिक सहयोग संगठन (आईओसी) ने भी प्रतिक्रिया दी। संगठन ने बीते रविवार को कहा कि वह भारत में मुसलमानों को प्रभावित करने वाले ताजा घटनाक्रमों की नजदीक से निगरानी कर रहा है। इसके साथ ही संगठन ने संशोधित नागरिकता कानून एवं अयोध्या फैसले पर चिंता जाहिर की।

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