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CAA पर जेपी नड्डा ने सभी दलों के सांसदों को लिखी थी चिट्ठी, पर बीजेपी दफ्तर की गलती से हो गई बड़ी चूक!

संशोधित कानून बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए उन अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने की बात करता है जिन्हें धर्म के आधार पर उनके देश में सताया गया हो।

भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा।

केंद्र की सत्ता में काबिज भाजपा ने हाल में संसद के दोनों सदनों में नागरिकता संशोधन बिल (CAB) पास करा दिया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर के बाद बिल कानून की शक्ल ले चुका है। संशोधित कानून बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए उन अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने की बात करता है जिन्हें धर्म के आधार पर उनके देश में सताया गया हो। कानून में छह समुदाय अर्थात हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई का उल्लेख है। ये कानून 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए इन छह अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने की बात कहता है। हालांकि संशोधित कानून को लेकर भारत में एक तबके में नाराजगी है। विपक्षी पार्टियों ने भी कानून में कुछ कमियों का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा है।

भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने जब इस बाबत सभी पार्टियों के सांसदों को एक पत्र लिखा, जिसमें पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के ‘ऐतिहासिक’ निर्णय पर भाजपा के अभियान में उनकी भागीदारी की मांग की गई। मगर सांसदों को भेजे पत्र में गलती से एक बड़ी चूक हो गई। इंडियन एक्सप्रेस में दिल्ली कॉन्फिडेंशियल के एक कॉलम में छपी खबर के मुताबिक पत्र में यहूदी समुदाय को भी नागरिकता देने का उल्लेख कर दिया गया।

पत्र में लिखा गया, ‘पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में लाखों सताए गए अल्पसंख्यक (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, यहूदी और ईसाई) संशोधन नागरिकता कानून के जरिए भारत के नागरिक बनने के पात्र होंगे।’ पत्र में गलती से पारसी समुदाय की जगह यहूदी समुदाय का उल्लेख कर दिया गया। सूत्रों ने बताया कि यह एक अनजाने में हुई गलती थी।

उल्लेखनीय है कि संसद का शीतकालीन सत्र अब समाप्त हो चुका है और पार्टी का ध्यान संगठनात्मक चुनावों की ओर है। संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने और कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव होने के बाद अगले साल फरवरी में भाजपा के नए अध्यक्ष के कार्यभार संभालने की उम्मीद है।

अभी अमित शाह गृह मंत्री और पार्टी अध्यक्ष दोनों दायित्व संभाल रहे हैं जबकि जे पी नड्डा भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कई राज्यों में पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव 15 जनवरी से शुरू होगा, जब ‘उत्तरायन’ प्रारंभ हो रहा है और हिन्दू रीति में इसे पवित्र माना जाता है।

उन्होंने बताया कि बिहार, राजस्थान और कर्नाटक में पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों के बदले जाने की संभावना नहीं है क्योंकि इनकी हाल ही में नियुक्ति हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि नए प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव सर्वसम्मति से होगा, जैसा पार्टी में चलन रहा है। भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक फरवरी के उतरार्द्ध में होने की संभावना है।

उस समय या तो राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो जाएगा या पार्टी के संसदीय बोर्ड द्वारा नामित होने पर उनका अनुमोदन होगा। भाजपा संविधान के मुताबिक, 50 प्रतिशत राज्यों का चुनाव संपन्न होने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। (भाषा इनपुट)

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