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‘सिगरेट पीने से कैंसर होता है, इसका सबूत नहीं’

धूम्रपान पर भाजपा सांसद और बड़े बीड़ी कारोबारी श्यामाचरण गुप्ता के बयान को एक और सांसद ने सहारा दिया है। इस विवाद के बीच भाजपा सांसद रामप्रसाद सरमा ने यह दावा किया कि सिगरेट और कैंसर के बीच संबंधों को स्थापित करने वाला कोई स्पष्ट सबूत नहीं है। उन्हें तो यह भी लग रहा कि […]

Author April 4, 2015 9:05 AM
श्यामाचरण गुप्ता ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया है कि लगातार धूम्रपान करने वाले कई लोगों को कोई कैंसर नहीं है।

धूम्रपान पर भाजपा सांसद और बड़े बीड़ी कारोबारी श्यामाचरण गुप्ता के बयान को एक और सांसद ने सहारा दिया है। इस विवाद के बीच भाजपा सांसद रामप्रसाद सरमा ने यह दावा किया कि सिगरेट और कैंसर के बीच संबंधों को स्थापित करने वाला कोई स्पष्ट सबूत नहीं है। उन्हें तो यह भी लग रहा कि कहीं तंबाकू में कोई औषधीय गुण तो नहीं है।

तेजपुर के भाजपा सांसद राम प्रसाद सरमा ने तेजपुर से करीब 175 किलोमीटर दूर विश्वनाथ चरियाली में कहा, सिगरेट पीने से कैंसर होता है या नहीं, इसके अब तक पूर्ण प्रमाण नहीं है। देश में तंबाकू की बिक्री से जुड़े नियमों पर विचार कर रही संसद की अधीनस्थ विधान समिति के सदस्य ने कहा कि पैनल तथ्यों पर गौर करेगा।

सरमा ने कहा, यह साबित करना मुश्किल है कि धूम्रपास से कैंसर होता है या नहीं। धूम्रपान या तंबाकू कैंसरकारक हैं या नहीं, या फिर उसमें कोई औषधीय गुण भी तो नहीं है, उसका पता लगाया जाना है। इसलिए हमने उसे समिति की बैठक में रखा है ताकि डॉक्टर आएं और इस बात की गवाही दें या रासायनिक सबूत, मेडिकल सबूत पेश कर पाएं कि धूम्रपान से कैंसर होता है।

सरमा ने कहा, हम (धूम्रपान) के पक्ष या विपक्ष में नहीं हैं, हम बस यह चाहते हैं कि इस बात पर निष्पक्ष ढंग से विचार किया जाए हैं कि सिगरेट पीने से कैंसर होता है या नहीं। उन्होंने कहा कि वे दो ऐसे वरिष्ठ वकीलों को जानते हैं जिनमें से एक हर रोज 60 सिगरेट और एक बोतल दारू पीते थे फिर 86 साल की उम्र में बिना कैंसर के उनकी मौत हुई। दूसरे वकील 75 साल के हैं और हर दिन 40 सिगरेट और शराब पीते हैं। उन्हें भी कैंसर नहीं है।

सरमा का बयान ऐसे समय में आया है जब इलाहाबाद के भाजपा सांसद और बीड़ी कारोबारी श्यामाचरण गुप्ता ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया है कि लगातार धूम्रपान करने वाले कई लोगों को कोई कैंसर नहीं है। उसी संसदीय समिति के सदस्य गुप्ता ने कहा, मैं आपके सामने ढेरों ऐसे लोगों को खड़ा कर सकता हूं जो लगातार बीड़ी पीते हैं और आज तक उन्हें कोई बीमारी या कैंसर नहीं है, आपको चीनी, चावल, आलू खाने से मधुमेह होता है।

गुप्ता के बयान से महज कुछ दिन पहले इस पैनल के प्रमुख भाजपा सांसद दिलीप गांधी ने कहा था कि तंबाकू के सेवन से कैंसर होने की बात को सत्यापित करने के लिए कोई भारतीय अध्ययन उपलब्ध नहीं है। उनके इस बयान से सरकार असहज स्थिति में है और विपक्षी दल व मेडिकल बिरादरी की भृकुटि तन गई है।

इसी बीच विपक्षी दलों ने गुप्ता के बयान की आलोचना जारी रखी है। जद (एकी) ने कहा कि दरअसल हितों का टकराव है और उन्होंने उस पैनल में गुप्ता को बनाए रखने पर सवाल खड़ा किया जिसे तंबाकू से जुड़े मुद्दों पर विचार करना है। जद (एकी) नेता केसी त्यागी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन, जिसका भारत एक सदस्य है, ने कहा है कि तंबाकू स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस पैनल को स्वास्थ्य पर तंबाकू के प्रभावों पर गौर करना है, उसमें गुप्ता की उपस्थिति हितों का टकराव है क्योंकि वह तो बीड़ी कारोबारी हैं। उन्होंने कहा कि संसद की नैतिकता समिति के मुताबिक ऐसा कोई भी सांसद उस समिति का हिस्सा नहीं हो सकता जिसमें उनका कारोबारी हित जुड़ा हो।

राजग सहयोगी पीएमके ने कहा कि भाजपा सांसदों ने बिना किसी वैज्ञानिक आधार के अज्ञानता भरा और मूर्खतापूर्ण बयान दिया है और उसने मोदी सरकार से ऐसे बयानों पर विराम लगाने की अपील की क्योंकि देश को शर्मिंदा नहीं किया जाना चाहिए। पीएमके संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबुमणि रामदास ने कहा, मेरा मतलब है कि इन लोगों को ये मूर्खतापूर्ण बयान देना बंद करना चाहिए क्योंकि दुनिया में लोग मानते हैं कि भारतीय सांसदों में कम बुद्धि है और ऐसा नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा शोध परिषद समेत वैश्विक ख्यातिप्राप्त संस्थानों ने सैकड़ों ऐसे अध्ययन किए हैं जिनसे पता चलता है कि तंबाकू से न केवल कैंसर बल्कि वृक्क, फेफड़े और मस्तिष्क के भी रोग होते हैं। रामदास ने कहा कि लोगों के मन में शंका है कि स्वास्थ्य मंत्रालय व तंबाकू लॉबी के बीच सांठगांठ है।

उन्होंने कहा कि तंबाकू बाजार 40,000 करोड़ रुपए का है जबकि तंबाकू जनित रोगों से निबटने में 1,15,000 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। सिगरेट के पैकेटों पर सचित्र चेतावनी बढ़ाने के खिलाफ दी जा रही दलीलें खारिज करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की अपील की कि नई चेतावनी 85 फीसद बड़ी हो।

रामदास ने चेन्नई में कहा, यह बिल्कुल ही सही वक्त है कि प्रधानमंत्री हस्तक्षेप करें। मैं आपसे स्वास्थ्य मंत्रालय को सचित्र चेतावनी तत्काल बढ़ाकर 85 फीसद करने का निर्देश देने की अपील करता हूं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक अप्रैल से तंबाकू उत्पादों के पैकेटों पर सचित्र चेतावनी बढ़कार 85 फीसद करने के कदम को स्थगित कर दिया है।

रामदास ने कहा कि बतौर स्वास्थ्य मंत्री वह तंबाकू लॉबी और अन्य वर्गों के दबाव के आगे नहीं झुके थे और सभी तंबाकू उत्पादों के पैकेटों पर उसके 40 फीसद स्थान पर सचित्र चेतावनी अधिसूचित करवाई थी।

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