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एनडीए के साथ रहते तो भाभी राज्‍यसभा में होतीं, केंद्र-राज्‍य में हमारे मंत्री होते- च‍िराग के चाचा पशुपत‍ि पारस बोले

लोक जनशक्ति पार्टी नेता और चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को एनडीए के साथ चुनाव न लड़कर इतना घाटा हुआ है कि पूछिए मत।

पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान पार्टी के नेतृत्व को लेकर आमने-सामने हैं।(फोटो: एक्सप्रेस फोटो/ एएनआई)

लोक जनशक्ति पार्टी नेता और चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को एनडीए के साथ चुनाव न लड़कर इतना घाटा हुआ है कि पूछिए मत। नेता ने कहा कि अगर एलजेपी ने एनडीए के साथ चुनाव लड़ा होता तो आज विधानसभा में पार्टी के विधायक होते, केंद्र और राज्य में मंत्री होते और भाभी (रामविलास पासवान की पत्नी) राज्यसभा में होतीं।

जब पत्रकार ने पशुपति पारस से इंटरव्यू में पूछा कि चिराग पासवान ने बागी होने वाले 5 सांसदों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है? इसका जवाब देते हुए पशुपति पारस ने कहा कि देश संविधान के हिसाब से चलता है न कि चिराग पासवान की मर्जी से। पार्टी के संसदीय दल ने मुझे नेता के तौर पर चुना है और इसे लोकसभा स्पीकर की स्वीकृति मिल गई है। ये हास्यास्पद है कि चिराग हमें पार्टी से निकाल रहे हैं। वे ऐसा किस हैसियत से कर सकते हैं।

पशुपति पारस ने बताया कि लोकजनशक्ति पार्टी में एक व्यक्ति एक पद का नियम है लेकिन चिराग खुद अपने पास तीन-तीन पद (संसदीय बोर्ड अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष, संसदीय दल नेता) रखे हुए थे। पारस ने बताया कि चिराग पासवान का अध्यक्ष बने रहना असंवैधानिक है। जल्द ही पार्टी के नए अध्यक्ष के लिए चुनाव होगा। पारस ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होगा।

पशुपति पारस ने कहा कि चिराग का ऐसा दावा करना कि उन्होंने मुझसे बात करने की कोशिश की सरासर झूठ है। पशुपति पारस कहने लगे कि रामविलास जब तक जीवित थे तब तक न उनसे मतभेद हुआ न कभी मनभेद हुआ। रामविलास पासवान मेरे लिए भगवान की तरह थे।

पशुपति पारस ने कहा कि चिराग को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने मुझे बिहार प्रदेश अध्यक्ष के पद से क्यों हटाया। लोकसभा चुनाव में मेरे अध्यक्ष रहते हुए पार्टी को 6 सीट मिली। पशुपति पारस ने दोहराया कि आज भी चिराग का स्वागत है। नेता ने कहा कि वे ही चाहते थे कि चिराग को राष्ट्रीय अध्यक्ष और संसदीय दल का नेता बनाया जाए। इसका प्रस्ताव उन्होंने दिया था।

पशुपति पारस ने कहा कि परिवार में टूट क्यों हुई ये भाभी से पूछिए। मैंने भाभी से कहा था कि ये व्यक्ति, मैं नाम नहीं लूंगा, अगर पार्टी और परिवार में दखल देगा तो मैं फिर नहीं आ सकूंगा। पशुपति पारस ने कहा कि पार्टी में सभी लोग चाहते थे कि एनडीए में रहकर चुनाव लड़ा जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोगों को टिकट काटे जाने की धमकी दी गई थी।

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