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चिराग पासवान को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, खारिज हो गई चाचा पशुपति के खिलाफ याचिका

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के एक धड़े के नेता चिराग पासवान की याचिका को खारिज कर दिया।

पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान के बीच LJP के नेतृत्व को लेकर टकराव है। (फोटोः पीटीआई)

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के एक धड़े के नेता चिराग पासवान की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा पशुपति कुमार पारस को सदन में पार्टी के नेता के तौर पर मान्यता देने को चुनौती दी थी।

जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा, “मुझे इस याचिका में कोई दम नजर नहीं आ रहा।” अदालत इस मामले में चिराग पर जुर्माना लगाना चाहती थी लेकिन उनके वकील के अनुरोध करने के बाद उसने ऐसा नहीं किया। याचिका में लोकसभा अध्यक्ष के 14 जून के परिपत्र को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें चिराग के चाचा पारस का नाम लोकसभा में लोजपा के नेता के तौर पर दर्शाया गया था।

मालूम हो कि हाल ही में हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान चिराग के चाचा पशुपति पारस ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। पशुपति कुमार पारस ने बृहस्पतिवार को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। बिहार के हाजीपुर से सांसद पशुपति कुमार पारस को बुधवार को नरेद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल किया गया।

पारस इससे पहले लोक जनशक्ति पार्टी की बिहार इकाई के प्रमुख थे। अब वह इसके अलग हुए गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। मंत्री पशुपति कुमार पारस ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह अपने दिवंगत भाई रामविलास पासवान के ‘‘वास्तविक राजनीतिक उत्तराधिकारी’’ हैं न कि चिराग पासवान, जो अपने पिता की संपत्ति के वारिस हो सकते हैं।

वहीं, लोजपा नेता अब्दुल खालिक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, “पारस को (केंद्रीय) मंत्री बनाए जाने पर हमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन उन्हें लोजपा मंत्री के रूप में नहीं माना जा सकता है।”

इससे पहले चिराग पासवान ने दावा किया, ‘‘ बिहार के सीएम नीतीश कुमार उनके बागी चाचा पशुपति कुमार पारस के लिए केंद्रीय कैबिनेट में एक सीट छोड़ने के लिए सहमत हो गए जिसका उनका एकमात्र उद्देश्य मुझे नीचा दिखाना था।’’ उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में बहुत जल्द मध्यावधि चुनाव होगा और इसकी नीव नीतीश कुमार ने खुद डाल दी है।

बता दें कि पिछले साल रामविलास पासवान के निधन के बाद पारस और चिराग पासवान के बीच लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) में गुटबाजी शुरू हो गई और दोनों पक्ष अब पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं।

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