West Bengal News: बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को मां के अंतिम संस्कार के लिए केवल पांच घंटे की पैरोल दी गई थी। उनका रोते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसको लेकर अब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रतिक्रिया दी है।

केस्टोपुर में गणेश पूजा का उद्घाटन करने के बाद बोलते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “चिन्मय प्रभु के आंसुओं ने दुनिया भर के सनातनियों को भावुक कर दिया था। उन आंसुओं को देखते हुए मैं सोच रहा था कि यदि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी या स्वामी प्रणबानंद के संघर्ष के माध्यम से उस दिन हमें भारत में शामिल न किया गया होता, तो आज हमारी स्थिति भी चिन्मय प्रभु जैसी ही होती।”

मैंने भी अपने जीवन में उस पीड़ा को सहा है- सीएम शुभेंदु अधिकारी

इसके बाद मुख्यमंत्री ने अपने परिवार के अनुभव का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैंने भी अपने जीवन में उस पीड़ा को सहा है।” उनके भाषण में विभाजन के दौरान उनके नाना के साथ पश्चिम बंगाल में पलायन करने का विषय भी सामने आया। अधिकारी ने विभाजन के दौरान पूर्व पूर्वी पाकिस्तान के लोगों की पीड़ा का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी शासन के दौरान पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों, धार्मिक ग्रंथों और त्योहारों को जानबूझकर हाशिए पर धकेल दिया गया।

उन्होंने दावा किया कि उस दौर में पूजा पंडालों में कम्युनिस्ट नेताओं कार्ल मार्क्स और लेनिन की किताबें मिल सकती थीं, जबकि स्वामी विवेकानंद, स्वामी प्रणवानंद और रामकृष्ण मिशन से जुड़ी रचनाएं अनुपस्थित थीं।

चिन्मय दास को पांच घंटे की पैरोल दी गई थी

गौरतलब है कि इस्कॉन के हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को उनकी माता के अंतिम संस्कार के लिए केवल पांच घंटे की पैरोल पर रिहा किया गया था। वह कई मामलों में दो सालों से जेल में हैं। चिन्मय के परिवार के आवेदन के बाद, चटगांव के उपायुक्त (डीसी) मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम मियां ने गुरुवार को दोपहर लगभग 2:30 बजे (बांग्लादेश समय) उनकी पैरोल पर रिहाई का आदेश दिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चिन्मय कृष्ण की माता संध्या रानी धर मरने से पहले अपने बेटे का चेहरा देखना चाहती थीं। लेकिन उनकी यह अंतिम इच्छा पूरी नहीं हो सकी। संध्या रानी धर का गुरुवार सुबह चटगांव के हाथाजारी स्थित एक अस्पताल में निधन हो गया। परिवार ने प्रशासन से अपील की थी कि उनके बेटे को माता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी जाए। इस अपील के आधार पर पांच घंटे की पैरोल दी गई थी।

यह भी पढ़ें: CM शुभेंदु अधिकारी ने कालीघाट मंदिर में खाई मछली, बीजेपी बोली- अब नॉनवेज विवाद खत्म होना चाहिए

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कौशिकी अमावस्या के अवसर पर कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना की। गुरुवार शाम को उन्होंने पूजा की टोकरी लेकर मंदिर में प्रवेश किया। टोकरी में बनारसी साड़ी, फूलों की माला और मिठाई थी। मुख्यमंत्री ने इन्हें देवी काली के चरणों में अर्पित किया और आरती की। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…