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पूर्वी सीमा पर चीन का नया पैंतरा

पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ने वाला संकरा गलियारा सिलिगुड़ी कॉरिडोर है, जिसे रक्षा विशेषज्ञ ‘चिकेंस नेक’ के नाम से जानते हैं।

Author नई दिल्ली | October 23, 2016 4:11 AM
चीनी सेना

भारत को कूटनीतिक दबाव में रखने के लिए चीन ने नया पैंतरा चला है। इसके लिए उसने पूर्वी सीमा पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की एलीट यूनिट का जमावड़ा बढ़ा दिया है। भारत के सिक्किम और भूटान के हा इलाके के बीच चीनी सीमा में पड़ने वाली चुंबी पहाड़ियों पर पीएलए ने ‘यूनिट 77656’ की पूरी ब्रिगेड तैनात कर दी है। निशाने पर पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ने वाला संकरा गलियारा सिलिगुड़ी कॉरिडोर है, जिसे रक्षा विशेषज्ञ ‘चिकेंस नेक’ के नाम से जानते हैं। जवाब में भारतीय सेना ने दुर्गम पहाड़ी इलाकों से आवागमन वाले पांच दर्रे सील कर दिए हैं। भूटान की सेना के साथ परस्पर सहयोग के कई कार्यक्रम चल रहे हैं। नई कवायद को लेकर उसे विशेष रूप से भरोसे में लिया जा रहा है।  पीएलए की यूनिट 77656 की ताजा सामरिक कवायद को भारत पर दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती दखलंदाजी और परमाणु आपर्तिकर्ता समूह के लिए भारत की दावेदारी- इन दोनों ही मुद्दों को लेकर चीन और भारत कूटनीतिक दांव-पेंच में उलझे हैं। पीएलए की जिस यूनिट 77656 को आगे किया गया है, वह चीनी सेना की उन दो इकाइयों में शुमार है, जिसपर वहां मुंहमांगा खर्च किया जाता है। दूसरी ‘सबमैरीन यूनिट 372’ है, जिसे दक्षिण चीन सागर में तब से इस्तेमाल करना शुरू किया गया, जब से भारत समेत बड़ी सामरिक ताकतों ने वहां चीन की दावेदारी का विरोध शुरू किया।

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जहां तक भारत की कमजोर नस ‘चिकेंस नेक’ का सवाल है तो यह इलाका सामरिक दृष्टि से बेहद महत्त्वपूर्ण रहा है। इस बेहद संकरे गलियारे को काट देने से पूर्वोत्तर शेष भारत के बाकी हिस्सों से अलग हो सकता है। कहीं-कहीं तो यह इतना संकरा है कि नेपाल और बांग्लादेश के बीच एक जगह तो इस कॉरिडोर की चौड़ाई सिर्फ 14 मील है। चीन के लिए चुंबी की पहाड़ियों से सिलिगुड़ी कॉरिडोर पहुंचना आसान है। यहां से डोका- ला दर्रा कुछ ही किलोमीटर पर है। डोका- ला से सटी है सिक्किम की जुलूक पहाड़ी। इस जुलूक पहाड़ी की तलहटी में बंगाल का जलपाईगुड़ी जिला शुरू हो जाता है, जो सिलिगुड़ी कॉरिडोर का अहम हिस्सा है। भारतीय सेना की पूर्वी कमान के एक आला अधिकारी के अनुसार, ‘हमने ना सिर्फ डोका-ला के रास्ते को सील किया है, बल्कि, चार अन्य दर्रों नाथू-ला, जलप-ला, दांग्चू- ला और बातांग- ला पर तैनाती बढ़ा दी है।’

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बंगाल के उत्तर में सिलिगुड़ी, माटीगड़ा, नक्सलबाड़ी, फांसीदेवा, चापड़ा और इस्लामपुर के इलाकों को मिलाकर बनता है सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जो पूर्व में नेपाल और पश्चिम में बांग्लादेश से जुड़ता है। असम समेत पूर्वोत्तर के राज्यों से संपर्क के लिए यही एकमात्र कॉरिडोर है। यह पूर्वोत्तर की तरफ नेपाल और भूटान का भी लिंक है। जानकारों के अनुसार, भारतीय सेना ने हर दर्रे के पास कुछ इस तरह की तैयारी कर रखी है कि किसी भी आकस्मिक स्थिति में दर्रों का रास्ता बंद करने में समय नहीं लगेगा। सिलिगुड़ी कॉरिडोर में घुसपैठ का अन्य एक विकल्प भूटान के हा जिले से है, जहां से दुआर्स में घुस सकते हैं। लेकिन चीन और भूटान के बीच डोकलम पठार (पूर्वी भूटान), जकरलंग घाटी और पसामलंग घाटी (उत्तर-पश्चिमी भूटान) को लेकर सीमा विवाद है। राजनयिक स्तर पर भारत इस मुद्दे पर भूटान का साथ देता है। साथ ही, भारतीय सेना ने भूटानी फौज को प्रशिक्षित करने के लिए हा जिले में एक प्रशिक्षण केंद्र खोल रखा है। इस जिले में 1500 किलोमीटर के इलाके में भारतीय सेना और सीमा सड़क संगठन के कई काम चल रहे हैं।

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