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लड़ाई हुई तो चीन को उठाना पड़ सकता है ये नुकसान, रिस्क नहीं लेगा ड्रैगन

चीन ने धमकी दी है कि अगर डोकलाम विवाद बढ़ता है तो भारत को सिक्किम के अलावा समूची नियंत्रण रेखा पर संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (बाएं) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (फोटो-AP)

भारत चीन सीमा पर दोनों देशों के बीच जून पहले हफ्ते से ही तनाव बरकरार है। पहले चीनी मीडिया भारत को युद्ध की धमकी दे रहा था उसके बाद चीनी विदेश मंत्रालय और पिछले हफ्ते चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तक ने छिपे तौर पर धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किया। चीनी मीडिया बार-बार भारत को 1962 के युद्ध का सबक याद रखने के लिए कहता रहा है। वहीं भारतीय रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने चीन को जवाब देते हुए कहा कि भारत 1962 वाला नहीं है। राजनीतिज्ञों और मीडिया से इतर विशेषज्ञों की राय भी दोनों देशों की राय को लेकर बंटी हुई है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन ने अपनी सीमा के आसपास संचार तंत्र पिछले कुछ सालों में काफी विकसित कर लिया है इसलिए युद्ध की स्थिति में वो बेहतर स्थिति में होगा। लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के खिलाफ युद्ध से चीन ही घाटे में रहेगा। प्रभाष के दत्ता ने इंडिया टुडे में लिखे अपने लेख में दावा किया है कि चीन कभी भी भारत के खिलाफ युद्ध का जोखिम मोल नहीं लेगा। दत्ता लिखते हैं कि 1962 के बाद से भारत और चीन की सीमा रेखा पर कभी एक भी गोली नहीं चली है।

दत्ता के अनुसार आज चीन कई वजहों से भारत के खिलाफ युद्ध नहीं छेड़ सकता। इन वजहों में सबसे अहम है ऊर्जा की जरूरत। दत्ता के अनुसार चीन की ईंधन आपूर्ति मलाक्का की खाड़ी से होती है। चीन सबसे अधिक ईंधन का आयात पश्चिमी एशिया और अफ्रीका से करता है। दत्ता ने चीनी मीडिया के हवाले से लिखा है कि उसके देश का 80 प्रतिशत ईंधन हिन्द महासागर या मलक्का की खाड़ी के रास्ते पहुंचता है। मलक्का की खाड़ी भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह से बहुत दूर नहीं है जहां भारतीय नौसेना के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में एक है। भारत आसानी से मलक्का की खाड़ी या हिन्द महासागर में चीन को होने वाली ईंधन आपूर्ति रोक सकता है। तेज औद्योगिक विकास के लिए लालायित चीन ये जोखिम नहीं उठा सकता। दत्ता के अनुसार इसी डर से चीन ने कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तान की मदद नहीं की थी।

चीन ने धमकी दी है कि अगर डोकलाम विवाद बढ़ता है तो भारत को सिक्किम के अलावा समूची नियंत्रण रेखा पर संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए। दत्ता के अनुसार इससे साफ है कि चीन भारत-पाकिस्तान सीमा पर भी तनाव को बढ़ावा देना चाहता है लेकिन इसमें भी उसके लिए बड़ा जोखिम है। चीन अरबों डॉलर खर्च करके चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) बना रहा है। इस परियोजना की मौजूदा लागत 62 खरब डॉलर (करीब चार लाख करोड़ रुपये) बतायी जा रही है। अगर भारत और चीन के बीच बड़े पैमाने पर युद्ध होगा तो सीपीईसी की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होगी।

बांग्लादेश और म्यांमार में चीन के कारोबारी हित भी उसे युद्ध से बचने के लिए प्रेरित करेंगे। चीन ने हाल ही में अफ्रीकी देश जिबूती में एक नौसैनिक अड्डा बनाया है। चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के अलावा श्रीलंका में भी एक बंदरगाह को लेकर समझौता किया है। चीन के इन सभी नौसैनिक अड्डे या ठिकाने भारतीय नौसेना की जद में हैं। यानी भारत से युद्ध की चीन कोभारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। चीन का उसके सभी 14 पड़ोसी देशों से विवाद है। ऐसे में डोकलाम विवाद के युद्ध के रूप में बदलने पर इन सभी देशों के समेत अमेरिका और जापान के लिए भी ये खतरे की घंटी होगी। जाहिर है चीनी अखबार कुछ भी छापे शी जिनपिंग प्रशासन इतना भोला नहीं है कि वो ये माने कि अमेरिका और जापान और बाकी देश चीन की दादागिरी का तमाशा देखते रहेंगे।

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  1. H
    HIRA KANT
    Aug 1, 2017 at 4:46 pm
    भारतीय मिडिया दिवालियापन का शिकार हो गया है.
    (0)(0)
    Reply