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कश्मीर पर गुप्त बैठक करे UN- चीन ने रखी मांग, पाकिस्तान का मददगार बना ड्रैगन

चीन को छोड़कर अभी तक किसी देश ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन नहीं किया है और जम्मू कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाने की सलाह दी है।

china pakistanपाकिस्तान के पीएम इमरान खान और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (रायटर्स)

जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर चीन, पाकिस्तान का मददगार बनता दिखाई दे रहा है। दरअसल चीन ने बुधवार को जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की एक गुप्त बैठक बुलाने की मांग की है। चीन की यह मांग पाकिस्तान की मांग का समर्थन मानी जा रही है, जिसमें पाकिस्तान ने पौलैंड सहित कई देशों को इस संबंध में चिट्ठी लिखी है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक खबर के अनुसार, एक डिप्लोमैटिक अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी है।

खबर के अनुसार, चीन की मांग पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है और बैठक का दिन और समय भी अभी तय नहीं किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने यूएन में जो मांग रखी है उसका एजेंडा India Pkiastan Question रखा है। बता दें कि पाकिस्तान जम्मू कश्मीर के मुद्दे को वैश्विक बनाकर यूएन से इसमें दखल देने की मांग कर रहा है। इसके लिए पाकिस्तान की सरकार ने कई देशों से समर्थन भी मांगा। हालांकि चीन को छोड़कर अभी तक किसी देश ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन नहीं किया है और जम्मू कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाने की सलाह दी है।

पाकिस्तान ने अगस्त माह के लिए यूनियन काउंसिल के अध्यक्ष देश पोलैंड को एक पत्र लिखकर यूएन की बैठक बुलाने की मांग की थी। पाकिस्तान ने यूएन में अपनी प्रतिनिधि मलीहा लोधी के हाथों यह पत्र पोलैंड की राजदूत जोआना वरोनेका को भिजवाया था। फिलहाल पोलैंड ने इस पर कोई फैसला नहीं किया है, लेकिन अब चीन के दखल के बाद माना जा रहा है कि यह बैठक जल्द ही बुलायी जा सकती है। पाकिस्तान के पत्र को यूनाइटेड सिक्योरिटी काउंसिल के सभी देशों के साथ साझा किया जाएगा।

पत्र में पाकिस्तान ने कहा है कि भारत के कदम को पाकिस्तान गैरकानूनी और यूएन रेजोल्यूशन के खिलाफ मानता है। ऐसे में यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक जल्द बुलायी जानी चाहिए। पाकिस्तान ने बीते दिनों इस मुद्दे पर चीन का समर्थन मिलने का दावा भी किया था।

बीते सोमवार को भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने भी चीन का दौरा किया था। इस दौरान एस.जयशंकर ने कहा कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाना भारत का आंतरिक मामला है। भारतीय विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि सरकार के इस फैसले से भारत और चीन की एलएसी में कोई बदलाव नहीं होगा।

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