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कैसे करेंगे मुकाबला? चीन का रक्षा बजट हमसे चार गुना ज्यादा, भारत के पास माउंटेन कॉर्प्स के लिए फंड तक नहीं

माउंटेन कॉर्प्स के लिए सरकार द्वारा अलग से फंड नहीं दिए जाने की वजह से सेना को अपने मौजूदा फंड से ही माउंटेन कॉर्प्स पर खर्च करना पड़ रहा है। इन कॉर्प्स की तैनाती लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन सीमा पर होगी।

Author नई दिल्ली | March 7, 2016 11:27 am
यूपीए सरकार के कार्यकाल में जुलाई 2013 में 90,274 अतिरिक्त सैनिकों के साथ 17 माउंटेन कॉर्प्स बनाने को मंजूरी दी गई थी

एक ओर जहां केंद्र सरकार भारतीय सेना में मैनपावर की कटौती करने की सोच रही हैं, वहीं भारतीय सेना अभी नई माउंटेन कॉर्प्स बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। माउंटेन कॉर्प्स के लिए सरकार द्वारा अलग से फंड नहीं दिए जाने की वजह से सेना को अपने मौजूदा फंड से ही माउंटेन कॉर्प्स पर खर्च करना पड़ रहा है। इन कॉर्प्स की तैनाती लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन सीमा पर होगी। इन कॉर्प्स के सैनिकों को नए हथियारों, उपकरणों से लैस करने की मंजूरी मिली थी। लेकिन अलग से फंड नहीं मिलने की वजह से सेना इन कॉर्प्स के लिए बनाई गई यूनिट्स को सेना के जर्जर पड़ चुके वार वैस्टेज रिजर्वस के साथ तैनाती करने को मजूबर है। वहीं दूसरी ओर देखें तो भारत के पड़ोसी देश चीन ने अपना रक्षा बजट बढ़ाकर भारत से चार गुना कर लिया है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में जुलाई 2013 में 90,274 अतिरिक्त सैनिकों के साथ 17 माउंटेन कॉर्प्स बनाने को मंजूरी दी गई थी। इस पर आठ वर्षों में 2021 तक 64,678 करोड रुपए खर्च किए जाने थे।

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फंड नहीं होने की वजह से ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों ने अभी इन कॉर्प्स के लिए प्रोडेक्शन भी शुरू नहीं किया है। मंजूर की गई 250 यूनिट्स में से अभी तक 90 यूनिट्स ही बन पाई हैं और 60 अभी प्रक्रिया में हैं। सेना अभी चीन और पाकिस्तान से लगती सीमा के साथ ही कश्मीर विद्रोह को भी संभाल रही है। ऐसे में इन नई कॉर्प्स के लिए अलग से बजट नहीं होने की वजह सेना को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है।

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एक मीडिया रिपोर्ट में एक सेना अधिकारी के हवाले से लिखा गया है कि चीन की सेना के पास अच्छी टेक्नोलॉजी और आधुनिक हथियार आने के बाद 23 लाख सैनिकों वाली पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी में साल 2017 में तीन लाख सैनिकों की कटौती करने जा रही है। लेकिन भारत ऐसी स्थिति में कहीं दूर तक नहीं है।

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भारतीय सेना को मजूबत करने और नए हथियारों से लैस करे का वादा कर चुके मोदी सरकार पेंशन और सैलरी के दबाव की वजह मैनपावर की कटौती करने की सोच रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा था कि वे चीन सीमा पर भारतीय सेना को और ज्यादा मजबूत करेंगे। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

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