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सीमा विवाद पर वरिष्ठ चीनी नेता ने कहा- भारत तवांग दे दे, अक्साई चिन ले ले

तंवाग में बौद्धों का एक प्रमुख मठ स्थित है, और ये मठ तिब्बती बौद्धों के लिए भावनात्मक लगाव रखता है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल)

भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ने कुछ भू-भागों की अदला-बदली करने की ओर इशारा किया है। सूत्रों के मुताबिक अगर भारत चीन को अरुणाचल प्रदेश का तंवाग वाला हिस्सा देने पर राजी हो तो चीन कश्मीर स्थित अक्साई चिन पर अपना कब्जा छोड़ सकता है। चीन की ओर से ये सुझाव पूर्व चीनी राजनीतिज्ञ और कम्यूनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता दाई बिंगुओ ने एक इंटरव्यू में दिया है। दाई बिंगुओ 2013 में भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए गठित टीम के मुख्य वार्ताकार थे। उन्होंने बीजिंग के एक पब्लिकेशन को दिये गये इंटरव्यू में ये सुझाव दिया। आपको बता दें तवांग भारत-चीन सीमा के पूर्वी सेक्टर का सामरिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और संवेदनशील इलाका है।

हालांकि भारत सरकार के लिए तवांग और अक्साई चीन का आदान-प्रदान एक बेहद की कठिन प्रकिया है। तंवाग में बौद्धों का एक प्रमुख मठ स्थित है, और ये मठ तिब्बती बौद्धों के लिए भावनात्मक लगाव रखता है। इसके अलाव भारत का बौद्ध समुदाय भी इस मठ से धार्मिक और मानसिक रुप से जुड़ा हुआ है। फिर भी चीनी राजनयिक दाई का बयान यहां इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि बिना चीनी सरकार की आधिकारिक अनुमित के वे ऐसा बयान नहीं दे सकते थे। दाई को चीन की कूटनीति में सम्मानजनक रुतबा हासिल है, और वहां के राजनयिक समुदाय उनके हर बयान को गंभीरता से लेता है। इसलिए ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बिना विश्वास में लिये वे ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर बयान जारी नहीं कर सकते थे।

इंटरव्यू में दाई बिंगुओ ने कहा कि, ‘भारत-चीन के बीच सीमा विवाद इतने लंबे समय का चलने का मुख्य वजह ये है कि चीन की वाजिब मांगों पर अबतक ध्यान नहीं दिया गया’। उन्होंने कहा कि, ‘अगर भारत की सरकार पूर्वी क्षेत्र में चीन के हितों का ख्याल रखती है तो तो चीन भी उसी तरह से किसी दूसरे क्षेत्र में भारत के लिए सोचेगा।’

आपको बता दें कि अक्साई चिन कश्मीर का हिस्सा है। भारत का दावा है कि 1962 की लड़ाई में चीन ने अक्साई चिन के एक बड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया था। लेकिन चीन इस ज़मीन को अपने शिनच्यांग प्रदेश का हिस्सा बताता रहा है। अक्साई चिन का ये इलाक़ा वीरान है और यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है।

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